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किस्सा सीटों का : कलानौर की जनता का बहुत पुराना है कांग्रेस प्रेम, प्रचंड मोदी लहर में भी नहीं खिला था कमल

हरियाणा की कलानौर विधानसभा की जनता ने आजादी के बाद से ही कांग्रेस को अपने सुख-दुख का साथी मान लिया है, कभी मन हुआ तो दूसरी पार्टी को जिता दिया पर अगले ही चुनाव में फिर से कांग्रेस के पाले में खड़े हो जाते थे। 2014 की मोदी लहर में भी यहां कमल खिलने के बजाय हाथ का पंजा ही चमका... आइए जानते हैं इस विधानसभा सीट के बारे में सबकुछ

किस्सा सीटों का : कलानौर की जनता का बहुत पुराना है कांग्रेस प्रेम, प्रचंड मोदी लहर में भी नहीं खिला था कमल

कलानौर उस समय से विधानसभा सीट है, जब संयुक्त पंजाब होता था। इस सीट पर अधिकतर बार कांग्रेस के प्रत्याशी को ही जीत मिली है। 1951 से 2014 तक इस सीट पर 15 बार चुनाव विधानसभा चुनाव हुआ, इनमें 10 बार कांग्रेस पार्टी के विधायक बने। 1967 और 68 में दो बार जनसंघ और 1977 में एक बार जनता पार्टी ने विजय पताका लहराई। 1987 और 2000 में भाजपा ने भी दो बार कलानौर सीट जीती।

15 में से 7 बार महिला विधायक यहां से जीतकर विधानसभा पहुंची है। ताऊ देवीलाल के समय में रोहतक लोकसभा को अपनी सबसे मजबूत सीट मानने वाली लोकदल जो अब इनेलो है, आज तक कलानौर में खाता नहीं खोल पाई। कलानौर विधानसभा 1977 में आरक्षित की गई थी। कलानौर से कांग्रेस का वर्चस्व समाप्त करने और भाजपा की पताका लहराने के लिए इस बार जद्दोजहद तेज है। कांग्रेस और भाजपा में इस सीट पर कड़ा मुकाबला होगा।

कांग्रेस की बात करें तो फिलहाल यहां से शकुंतला खटक दो बार से विधायक हैं। इनसे पहले पांच साल कांग्रेस की ही करतारी देवी विधायक थी। यानी लगातार 15 साल से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। लेकिन इस बार जिस तरह लोस चुनाव में भाजपा को रोहतक लोस सीट से जीत मिली है।

उसे देखकर भाजपा उत्साहित है और 15 साल का सूखा खत्म करने के लिए मैदान में है। इस बार लोस चुनाव में खास बात यह भी रही कि पहली बार भाजपा प्रत्याशी कलानौर से करीब 4300 वोट की लीड लेकर निकले। यह भी एक कारण है कि भाजपा इस सीट को अपनी मानकर चल रही है। भाजपा का दावा है कि करीब 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के विकास कार्य कलानौर क्षेत्र में करवाएं हैं। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले दावेदार भी बढ़ते जा रहे हैं।


कांग्रेस के पास शकुंतला खटक को छोड़कर कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आता। कलानौर की जनता मानती है कि भाजपा किसे टिकट देगी इस पर हार और जीत निर्भर करती है। टिकट मिलने के बाद ही समीकरण बदलेंगे। फिलहाल इनेलो बिखर चुकी है, जेजेपी नई-नई मैदान में है। ऐसे में कलानौर सीट पर कांग्रेस और भाजपा में ही कड़ा मुकाबला होने वाला है। लेकिन दोनों की पार्टियों के लिए विधानसभा की डगर आसान नहीं है।

मनोहर सरकार से क्या मिला

भाजपा सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं। इस दौरान अकेले गांवों की बात करें तो 143.24 करोड़ विकास के लिए खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा सेक्टर-21 और 27 भी कलानौर क्षेत्र के लोगों को तोहफा दिया गया है। 10 मिनी डेयरी, गोशाला, एक पशु चिकित्सालय बनवाया गया है। तीन नए जलझार भी क्षेत्र में बनवाए हैं। इसके अलावा नई सड़कों के निर्माण और सुधार पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। चौराहों के नवीनीकरण पर 161.55 लाख रुपये की राशी खर्च की गई है।

कलानौर में एक गांव ऐसा है जहां जगमग योजना के तहत 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है, जबकि 4 ऐसे गांव हैं, जिनमें 15-15 घंटे बिजली आ रही है। पिलाना, बनियानी भिवानी सब ब्रांच पर खेतों की टेल तक पानी पहुंचाया गया है। 565.33 लाख रुपये से जलमार्ग बनाए गए हैं। सीवरेज व्यवस्था पर 132.2 लाख रुपये खर्च किए, जबकि 33.8 किमी लंबी पाइप लाइन बिछाई गई है।

किसानों का भी विशेष ध्यान रखा गया और फसल बीमा योजना के तहत 11584 किसानों का बीमा करवाया गया। इनमें से 510 किसानों को 8 करोड़ 90 लाख 1 हजार 78 रुपये का क्लेम मिला है। वहीं फसल खराब होने पर कलानौर विधानसभा क्षेत्र के 12789 किसानों को 22 करोड़ 50 लाख 16 हजार 120 रुपये का मुआवजा भी दिया गया।

क्या है विधायक का कहना

विधायक शकुंतला खटक ने कहा कि रोहतक से कलानौर फोरलेन कांग्रेस लेकर आई। बाईपास, स्कूल, जनरल अस्पताल, स्कूल अपग्रेड करवाना, काहनौर की पीएचसी को सीएचसी बनवाया, बालंद में स्कूल बनवाया। करौंथा में सीएचसी की बिल्डिंग बनवाई, आईटीआई का निर्माण करवाया, पीटीसी सुनारियां और आईआईएम समेत अनके विकास के काम कांग्रेस ने ही करवाए हैं। जब से भाजपा सरकार आई है विकास के नाम पर एक ईंट नहीं लगी।

कांग्रेस के शासन में खेतों की टेल तक पानी जाता था, अब नहीं जाता। सीएम ने कलानौर में रैली जरूर की, घोषणाएं भी बहुत की, लेकिन विकास नहीं हो पाया। कलानौर में घरों के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों का मुद्दा मैं विधानसभा में भी उठा चुकी हूं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। आज तक सरकारी कॉलेज की डिमांड पूरी नहीं हो पाई। जेबीटी सेंटर भी चाहिए। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। लोकसभा के चुनाव अलग बात हैं, अब विधानसभा चुनाव में मुद्दे स्थानीय होते हैं। इस बार भी कांग्रेस कलानौर से जीतेगी।

ये बन रहे हैं राजनीतिक समीकरण

इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी उसे नुकसान पहुंचा सकती है। संगठनात्मक कमजोरी के चलते कांग्रेस को इस सीट के लिए पहले से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी। कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से ही होगा। भाजपा ने जिस तरह सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता बरती है, वह हर जुबान पर चढ़ी हुई है। कलानौर से लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को पहली बार जीत मिलना इस बात के संकेत हैं कि कांग्रेस की जीत आसान नहीं। जिस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है फिलहाल वहां भाजपा मजबूत नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की छवि काम करेगी।

ये है इतिहास

हरिद्वार के बाद सबसे ज्यादा धार्मिक गद्दी कलानौर में हैं। सत जिंदा कल्याणा आश्रम, सति माई साईंदास आश्रम, गुुरद्वारा लऊवाला, सत बाबा शाह आश्रम, गुुरद्वारा भाई बल्ला साहेब, गुरुद्वारा भगत जी, गुरुद्वारा बहन जी, गद्दी दादू द्वारा आदि कलानौर की पहचान हैं। एक मत के अनुसार कल्याण सिंह ने की थी। कल्याण सिंह उज्जैन शहर धारार नगरी का रहने वाला था। वे पंवार वंश के थे। उनके लड़के की शादी दिल्ली के राजा अनंगपाल सिंह द्वितीय की लड़की से हुई थी। कल्याण सिंह ने इस क्षेत्र को सुरक्षित माना और एक नदी का किनारा देख (जिसे आजकर ड्रेन नंबर-8 कहते हैं) पहले भाली गांच बसाया।

ये रहे हैं विधायक :

साल

विधायक

पार्टी

1951

बदलूराम

कांग्रेस

1957

नानूराम

कांग्रेस

1962

रणबीर सिंह

कांग्रेस

1967

नसीब सिंह

जनसंघ

1968

सतराम दास

जनसंघ

1972

सतराम दास

कांग्रेस

1977

जयनारायण

जनता पार्टी

1982

करतारी देवी

कांग्रेस

1987

जयरानारयण

भाजपा


1991

करतारी देवी

कांग्रेस

1996

करतारी देवी

कांग्रेस

2000

सरीता नारायण

भाजपा

2005

करतारी देवी

कांग्रेस

2009

शकुंतला खटक

कांग्रेस

2014

शकुंतला खटक

कांग्रेस


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