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कौन मेहरबान जो जेई बना पहलवान, अफसरों के आदेशों के बाद भी डेढ़ साल से नहीं दे रहा जन सूचना

2013 में छीपटवाड़ा मोहल्ले में बनी एतिहासिक पानी टंकी को नगर परिषद की तरफ से जमींदोज कर दिया गया था। चूंकि यह टंकी तांबे की बनी हुई थी, इसलिए इसकी कीमत भी काफी ज्यादा थी।

सांकेतिक फोटो
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सांकेतिक फोटो

रेवाड़ी नगर परिषद का एक जेई अपनी हठधर्मिता पर इतना उतारू है कि उसके सामने उच्च अधिकारी भी खुद को बेबस पा रहे हैं। यह जेई नगर परिषद के संदर्भ में मांगी गई एक सूचना देने को तैयार नहीं है। अधिकारी बार-बार सूचना आयुक्त को इस मामले में पत्र लिख चुके हैं, परंतु जेई लगातार सूचना देने से बच रहा है।

वर्ष 2013 में छीपटवाड़ा मोहल्ले में बनी एतिहासिक पानी टंकी को नगर परिषद की तरफ से जमींदोज कर दिया गया था। चूंकि यह टंकी तांबे की बनी हुई थी, इसलिए इसकी कीमत भी काफी ज्यादा थी। इस टंकी को बेचने में बड़ा घोटाला होने की आशंका थी। जिसके चलते कई उच्च अधिकारियों ने इस मामले की जांच की।

उसके बाद एक बड़ा घोटाला सामने आया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सबकुछ दबा दिया गया। इसी मोहल्ले के रहने वाले साकेत धींगड़ा ने सूचना के अधिकार के तहत 24 सितंबर 2018 को आरटीआई लगाई थी। इसमें टंकी को बेचने से संबंधित जानकारी की मांग की गई थी। आरटीआई में 9 बिंदू शामिल किए गए थे।

संबंधित अधिकारियों ने आरटीआई का सही जवाब नहीं दिया। जो जवाब दिया, उसकी के आधार पर साकेत ने 9 अक्टूबर 2018 को फिर आरटीआई लगाई। जानकारी नहीं मिली तो उसने सीटीएम को प्रथम अपील दायर की। सीटीएम ने तुरंत नगर परिषद को जानकारी मुहैया कराने का आदेश दिया। नगर परिषद के आला अधिकारियों जानकारी देने का जिम्मा जेई सुनाई को दे दिया और यहीं से टरकाने का गेम शुरू हो गया।

कमीश्नर की फटकार का भी नहीं दिखा असर

इस मामले को लेकर साकेत धींगड़ा ने गुरुग्राम स्थित सूचना आयुक्त के पास 24 दिसंबर 2018 को अपील दायर की। कमीश्नर ने इसी साल 16 जून को नगर परिषद के ईओ मनोज यादव व जेई सुनील को तलब किया। ईओ तो पहुंच गए, लेकिन जेई नहीं पहुंचा। ईओ से जवाब मांगा गया तो देते नहीं बना। इस पर कमीश्नर ने दोनों को कारण बताओं नोटिस जारी कर तुरंत जानकारी मुहैया कराने के आदेश दिए, लेकिन अब भी जानकारी नहीं मिली है।

ईओ के कहने सुनने से बाहर जेई

ईओ मनोज यादव ने कमीश्नर को भेजे लेटर में साफ कहा कि उन्होंने संबंधित जानकारी देने के लिए जेई को आदेश दिए थे, लेकिन बार-बार कहने के बाद भी जानकारी नहीं दी। दिलचस्प बात यह है कि ईओ ने कहा कि जेई उनके कहने सुनने से बाहर है। बावजूद आज तक जेई का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका।

इतना ही नहीं एक्सईएन यह तक लिख चुके है कि आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी को जेई गंभीरता नहीं लेता। कमीश्नर, डीसी व एसडीएम एवं प्रशासक को लिखते हुए यह तक कहा गया कि जेई के कारण नगर परिषद की छवि खराब हो रही है। सिस्टम के हालात यह कि कोई जेई के खिलाफ कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहा।

जानकारी देते ही नप जाएगी गर्दन

सूत्रों के अनुसार पानी की टंकी को तोड़ने में हुआ घोटाला बहुत बड़ा है। कई उच्च स्तर की जांच में घोटाले का खुलासा हो चुका है। नगर परिषद के अधिकारियों ने अपने बचाव में जो सबूत व बयान दिए वह भी झूठ से कम नहीं थे। उन्हीं सूबतों के जरिए व राजनीतिक हस्ताक्षेप के कारण यह मामला दब गया, लेकिन आरटीआई से मांगी गई जानकारी अगर सामने आ जाती है तो फिर घोटाला तो पहले उजागर हुआ और अब भ्रष्टाचार फैलाने वाले कर्मचारियों की गर्दन तक नप सकती है।

भ्रष्टाचार के मामलों से घिरी रही नप

भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर हमेशा से ही नगर परिषद निशाने पर रही है। नगर परिषद में पहले जहां मामले उजागर हो रहे थे। वहीं अब मामलों को दबाने का खेल चल रहा है। यहीं कारण है कि अतीत के मामलों में जानकारी देने से अधिकारी कतरा रहे है।


मैने कई बार जानकारी देने के लिए जेई को नोटिस दिया, लेकिन जानकारी क्यो नहीं मुहैया कराई यह मुझे भी नहीं पता। जेई को लेकर उच्च अधिकारियों को भी लिखा जा चुका है। मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी, नप।

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