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हरियाणा की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार, एक लाख करोड़ का होगा निवेश

हरियाणा सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के जरिए सूबे में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश करवाना चाहती है।

हरियाणा की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार, एक लाख करोड़ का होगा निवेश
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चंडीगढ़. हरियाणा सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के जरिए सूबे में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश करवाना चाहती है। इससे चार लाख लोगों को रोजगार देना लक्ष्य है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में इंडस्ट्रियल पालिसी के जिस ड्राफ्ट को मंजूरी मिली है, उसे सात दिन तक उद्योगपतियों, जमीन मालिकों, छोटे उद्योगपतियों अन्य से सुझाव आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक कर दिया है। उद्योग और वाणिज्य मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

पॉलिसी में प्रावधान किया गया है कि अगर किसी बड़े निवेशक को हरियाणा में इंडस्ट्री लगानी है तो सीएम मनोहर लाल से सीधा संपर्क करे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाला इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड उसे जो सुविधाएं, रियायतें देना चाहता है, दे सकेगा। सेकंडरी सेक्टर का कुल घरेलू उत्पाद में हिस्सा 27 फीसदी से बढ़ाकर 32 फीसदी करने का प्रस्ताव है। यह भी प्रावधान है कि प्राइवेट कालोनाइजर भी इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित कर सकेंगे। उन्हें सीएलयू दिए जाएंगे। अभी तक हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रर डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) भूमि अधिग्रहण करके इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित कर प्लाट ऑफर करता है।
मगर नई पॉलिसी में प्रावधान किया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग एरिया 45 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी किया जाए और रेजिडेंशियल एरिया 15 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया जाए। कार्मशियल एरिया 5 फीसदी ही रहेगा। पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए बड़े मेगा प्रोजेक्टों के लिए मैन्युफैक्चरिंग एरिया 40 फीसदी में भी छूट देने दी जा सकती है। यह छूट 40 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी भी हो सकती है। मगर यह स्थिति और पूंजी निवेश के आकार को देखकर होगा। फ्लोर रेशो एरिया (एफएआर) भी बढ़ा दी है। कुछ उद्योग ऐसे हैं जो फ्लैटनुमा भवन में लग सकती है। ऐसे भवनों के लिए एफएआर 225 फीसदी हो सकेगा। यह एफएआर रेजिडेंशियल एरिया में लागू होगा। ये प्राइवेट कालोनाइजर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करेंगे। जिस जमीन पर एसईजेड लगना था मगर नहीं लग पाया और अब एसईजेड की अधिसूचना वापस हो गई है। उस जमीन पर भी प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित सकेंगे। दो सौ एकड़ से ज्यादा एरिया में मिर्शित लैंड यूज हो सकेगा। बिजली वितरण का लाइसेंस डीम्ड माना जाएगा।

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