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हरियाणा मना रहा है 50 वां स्थापना दिवस, जानिए इसके बनने की कहानी

सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिनमें हरियाणा क्षेत्र से चौ. देवीलाल समेत कांग्रेस के 38 विधायक चुने गए।

हरियाणा मना रहा है 50 वां स्थापना दिवस, जानिए इसके बनने की कहानी
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हिसार. 1 नवंबर को हरियाणा अपना स्थापना दिवस मना रहा है। किसान और जवान, हुक्के और चौपाल, पगड़ी और धोती, घाघरे और कुर्ती, पहलवान और दंगल, पनघट और पहेलियां, सांग और रागनी तथा कड़ी मेहनत और खड़ी बोली दशकों से हरियाणा के सामाजिक परिदृश्य की विशेष पहचान हैं। इस अवसर पर हम आपको बता रहे हैं हरियाणा के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, कला, विकास और सुनी-अनसुनी कहानियां।
हरियाणा को अलग राज्य बनाने की सबसे पहले मांग सन् 1923 में स्वामी सत्यानंद ने लाहौर (पाकिस्तान) में की थी। इसके बाद दीनबन्धु,सर छोटूराम की अध्यक्षता में मेरठ में आल इंडिया स्टूडैंटस की कांफ्रेस में हरियाणा को अलग राज्य बनाने की मांग उठी। सन् 1926 में दिल्ली में आल इंडिया मुस्लिम लीग की कांफ्रेंस में प्रस्ताव पारित किया गया कि पंजाब में हिंदी भाषीय क्षेत्र एवं अंबाला मंडल को पंजाब से हटाकर दिल्ली के साथ जोड़ देना चाहिए। हरियाणा क्षेत्र के अनेक नेताओं जैसे देशबंधु गुप्ता, पंडित नेकीराम शर्मा और पंडित श्रीराम शर्मा ने अलग हरियाणा राज्य के गठन के लिए प्रयास किए।
सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिनमें हरियाणा क्षेत्र से चौ. देवीलाल समेत कांग्रेस के 38 विधायक चुने गए। अलग राज्य बनवाने के लिए चौ. देवीलाल एवं चौ. चरण सिंह ने उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा क्षेत्र से 125 विधायकों का हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री जीबी पंत को दिल्ली में दिया।1953 में चौ. देवीलाल ने भारत सरकार द्वारा बनाए गए राज्य पुनर्गठन आयोग के सामने अलग हरियाणा राज्य बनाने की मांग रखी। 1955 में अकाली नेताओं ने धर्म के आधार पर पंजाब को बांटने की मांग रखी। उधर पंजाबी प्रांत की मांग को लेकर संत फतेहसिंह ने 16 अगस्त 1965 को आमरण अनशन की घोषणा करते हुए कहा कि - यदि सरकार ने पंजाबी सूबा नहीं बनने दिया तो वह आत्मदाह कर लेगें। केन्द्र सरकार ने पार्लियामेंटरी कमेटी की सिफारिशों को सिद्धांतिक आधार पर स्वीकार कर लिया तथा 23 अप्रैल 1966 को तीनों राज्यों के अलग-अलग गठन के लिए पंजाब सीमा आयोग का गठन किया गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 12 जून, 1966 को रेडिय़ो से हरियाणा के अलग राज्य की घोषणा करते हुए कहा कि हरियाणा और पंजाब के आपसी संबन्ध मजबूत बनाने के लिए चंडीगढ़ दोनों प्रांतों की संयुक्त राजधानी होगी और इसे केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया जाएगा। 7 सितंबर 1966 को संसद द्वारा यह विधेयक पारित कर दिया गया तथा 18 सितंबर को राष्ट्रपति द्वारा साइन कर दिए गए।
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