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किसानों ने खट्टर सरकार से की मांग, प्रदेश में एक जनवरी से बढ़ें गन्ना मूल्य

भारतीय किसान संघ ने खट्टर सरकार से गन्ने की कीमतों में नए साल से बढ़ोतरी की मांग की।

प्रदेश का ऐसा पहला सुगर मिल, जहाँ चप्पे-चप्पे पर तीसरी आँख का पहरा
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सुगर मिल पर काम करता मजदूर (प्रतीकात्मक फोटो)

भारतीय किसान संघ ने कुरूक्षेत्र में प्रेसवार्ता का आयोजन कर सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखी। बीकेएस के प्रवक्ता रणदीप सिंह आर्य ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सरकार से गन्ने की कीमतों में नए साल से बढ़ोतरी की मांग करते है।

सरकार ने पिछले पांच वर्षों में गन्ने की कीमत में केवल 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। उन्होंने सरकार को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने मांग पूरी न होने पर राज्य की सभी चीनी मिलों को बंद करने की धमकी दी।

बीकेएस के हरियाणा के प्रवक्ता रणदीप सिंह आर्य ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य बना रही है लेकिन पिछले पांच वर्षों में अपने प्रदर्शन के अनुसार यह कहीं भी उस लक्ष्य को पार नहीं कर सकती।

आपको बात दें कि 2018-19 के पेराई सत्र के दौरान गन्ने की शुरुआती किस्म की दर 340 रुपये प्रति क्विंटल, मध्य किस्म के लिए 335 रुपये और लेट किस्म के लिए 330 रुपये थी। राज्य की भाजपा सरकार ने 2019-20 के पेराई सत्र के लिए गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया, इसलिए किसान निकाय उत्पादन लागत में वृद्धि को देखते हुए गन्ना मूल्य में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

संघ के प्रवक्ता ने कहा कि हम पिछले एक साल से हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वह गन्ना मूल्य के मुद्दे पर किसानों को समय नहीं दे रहे हैं।

बीकेएस सदस्यों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि 20 दिसंबर से करनाल में एक विरोध मार्च निकाला जाएगा और सीएम जहां भी जाएंगे उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे। अगर 30 रुपये से दाम नहीं बढ़ाए गए तो 1 जनवरी से किसान हरियाणा की 14 चीनी मिलों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 5 जनवरी से सभी चीनी मिलों को बंद कर दिया जाएगा

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