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Haryana Election 2019: भाजपा को मिली 75 सीटें तो 42 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा

Haryana Election 2019 (हरियाणा चुनाव 2019) हरियाणा विधानसभा चुनावों (Haryana Assembly Election) से पहले भाजपा (BJP) ने बड़ी जीत का लक्ष्य तय किया है, मनोहर लाल (Haryna CM Manohar Lal) की सरकार ने नारा दिया है अबकी बार 75 पार , यदि भाजपा सरकार (Haryana BJP Govt) ऐसा कर पाने में सफल होती है तो 42 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा।

Haryana Election 2019: भाजपा को मिली 75 सीटें तो 42 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा

Haryana Election 2019 हरियाणा विधानसभा (Haryana Vidhan Sabha) चुनावों से पहले भाजपा (BJP) ने बड़ी जीत का लक्ष्य तय किया है। मनोहर लाल की सरकार ने नारा दिया है अबकी बार 75 पार। यदि भाजपा सरकार ऐसा कर पाने में सफल होती है तो 42 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा। हरियाणा विधानसभा के चुनाव अक्टूबर में होंगे। विधानसभा की 90 सीटों पर होने वाले चुनाव प्रचार में भाजपा 75 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रही है। भाजपा के दावे यदि हकीकत में बदले तो हरियाणा का इतिहास पहली बार खुद को दोहराएगा। 42 साल बाद दोबारा ऐसा होगा जब कोई पार्टी 75 या इससे अधिक सीटें जीतेगी।




पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा के इतिहास में अभी तक सिर्फ एक बार ऐसा कारनामा हुआ है। जब कोई पार्टी 90 सीटों में से 75 सीटें जीती है। इमरजेंसी हटने के बाद 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी ने 75 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के लोगों पर इमरजेंसी थोपने के गुस्से के चलते लोगों ने जनता पार्टी को जमकर वोट दिए। जिसके कारण जनता पार्टी को 75 सीटों पर जीत मिली।

कांग्रेस से ज्यादा जीते निर्दलीय

कांग्रेस के खिलाफ लोगों के गुस्से का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उस वक्त की सबसे बड़ी पार्टी को 5 फीसदी सीट भी नहीं मिली। कांग्रेस को मिली सीटों से अधिक निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली थी। आंकड़ों के मुताबिक जहां पांच निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे। वहीं कांग्रेस को सिर्फ तीन सीटों पर ही जीत मिली।

वीएचपी दूसरी बड़ी पार्टी

हरियाणा चुनाव में उस वक्त कांग्रेस के मुकाबले क्षेत्रीय दल बड़ी पार्टी बन गए। उस वक्त वीएचपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और विपक्ष बनकर उभरी। वीएचपी के पांच प्रत्याशियों को चुनाव में जीत मिली।

1977 में बढ़ीं थीं सीटें

हरियाणा राज्य बनने के बाद विधानसभा सीटों की संख्या 81 थी। उसके बाद 1977 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 90 की गई। विधानसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ने के बाद जनता पार्टी ने 75 सीटें जीतीं। विपक्ष को सिर्फ 15 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।

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