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हरियाणा विधानसभा चुनाव : एक ही गांव से जीतकर निकले पांच विधायक, बदली तेजाखेड़ा की किस्मत

अगर एक गांव के रिकॉर्ड की बात करें तो सिरसा के तेजाखेड़ा गांव की पहचान चौधरी देवीलाल के कारण ही है, लेकिन इस बार इस गांव से पांच विधायक चुने गए हैं। इनमें ऐलनाबाद से अभय सिंह चौटाला, रानियां से चौधरी देवीलाल के बेटे चौधरी रणजीत सिंह, डबवाली से विधायक बने अमित सिहाग, उचाना से दुष्यंत चौटाला और बाढडा से नैना चौटाला विधानसभा में पहुंचे हैं।

हरियाणा चुनाव परिणाम: कांग्रेस-भाजपा को छोड़ 1977 के बाद पहली बार दोबारा सत्ता में आ सकता है कोई अन्य दल
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जजपा भाजपा और कांग्रेस

हरियाणा की राजनीति में 2019 के विधानसभा चुनाव कुछ अलग तरह के परिणामों के जाने जाएंगे, वहीं जाने अनजाने कई दूसरे कारणों से भी ये चुनाव याद किए जाएंगे। पहली बार ऐसा होगा जब विधानसभा में एक ही गांव से पांच विधायक चुनकर पहुंचेंगे। वहीं, चौधरी देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल परिवार के सदस्य भी विधानसभा में पहुंचे हैं। चौथे लाल मनोहर भी हरियाणा में दूसरी बार सरकार बनाने जा रहे हैं।

अगर एक गांव के रिकॉर्ड की बात करें तो सिरसा के तेजाखेड़ा गांव की पहचान चौधरी देवीलाल के कारण ही है, लेकिन इस बार इस गांव से पांच विधायक चुने गए हैं। इनमें ऐलनाबाद से अभय सिंह चौटाला, रानियां से चौधरी देवीलाल के बेटे चौधरी रणजीत सिंह, डबवाली से विधायक बने अमित सिहाग, उचाना से दुष्यंत चौटाला और बाढडा से नैना चौटाला विधानसभा में पहुंचे हैं। ये सब मूल रूप से तेजाखेड़ा के ही निवासी हैं।

लाल परिवारों में खुशियां

हरियाणा की राजनीति में लाल परिवारों का हमेशा से ही योगदान रहा है। इसके बिना हरियाणा का राजनीति अध्याय अधूरा है। चौधरी देवीलाल के परिवार से इस बार उनके बेटे चौधरी रणजीत सिंह, अभय सिंह, दुष्यंत और नैना चौटाला पहुंचे हैं। इसी तरह चौधरी बंसीलाल के परिवार से किरण चौधरी तोशाम से फिर से विधायक बनी हैं, लेकिन चौधरी बंसीलाल के बेटे रणबीर महेंद्रा और दामाद सोमवीर सिंह ने हार की हैट्रिक बनाई है। चौधरी भजनलाल परिवार ने अपना गढ़ बरकरार रखा है। कुलदीप बिश्नोई ने टिकटॉक स्टार को हराकर जीत हासिल की है।

महिला मंत्री हारी, दो महिला विधायक

भाजपा की पिछली सरकार में एकमात्र महिला मंत्री कविता जैन चुनाव हार गई हैं लेकिन अब भाजपा के 40 विधायकों में कलायत से कमलेश ढांडा और बडखल से सीमा त्रिखा चुनीं गई हैं, जिनमें से अब एक मंत्री पद से भी नवाजी जा सकती हैं। वहीं पूंडरी ने फिर निर्दलीय विधायक चुनने का रिकॉर्ड बरकरार रखा है। बरवाला हलके ने भी हर बार नया विधायक चुनने के रिकॉर्ड पर फिर से मोहर लगाई है। इसी तरह बाढडा में भी लंबे समय से हर बार नया विधायक चुना जाता रहा है इस बार भी यहां से यही परंपरा निभाई गई है।

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