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दीपेंदर सिंह हुड्डा : हरियाणा का वह युवा नेता जिसको विश्व आर्थिक मंच से मिला यंग ग्लोबल लीडर का अवार्ड

दीपेंदर सिंह हुड्डा (Deepender Singh Hooda ) हरियाणा (Haryana Assembly Elections) के पूर्व मुख्‍यमंत्री व कांग्रेस नेता भूपेंदरसिंह हुड्डा के पुत्र हैं। राजनीति उन्हें विरासत के रूप में मिली है वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता है। इनके दादा रणबीर सिंह हुड्डा एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।

दीपेंदर सिंह हुड्डा : हरियाणा का वह युवा नेता जिसको विश्व आर्थिक मंच से मिला यंग ग्लोबल लीडर का अवार्ड

हरियाणा कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा की राजनीति में खुद अपनी पहचान है। रोहतक से पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने मोदी लहर को चुनौती देते हुए 2014 में चुनाव दिया था। इसके अलावा 2019 में जब सभी सीटों पर कांग्रेस बैकफुट पर थी। उस वक्त भी रोहतक सीट से विपक्षी उम्मीदवार के पसीने निकाल दिए थे। मतगणना के अंत में महज 7 हजार के करीब वोटों से हारे थे।

रोहतक से पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्‍म 4 जनवरी 1978 को रोहतक में हुआ। वह हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री व दिग्‍गज कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र हैं। राजनीति उन्हें विरासत के रूप में मिली है वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता है। इनके दादा रणबीर सिंह हुड्डा एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। रोहतक में एमडी यूनिवर्सिटी से उन्होंने तकनीकी में स्‍नातक डिग्री हासिल की और स्‍नातकोत्‍तर की डिग्री अमेरिका से प्रबंधन क्षेत्र में की।

राजनैतिक सफर

पहली बार रोहतक उपचुनाव में 2005 में उन्‍होंने कांग्रेस प्रत्‍याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस कार्यकाल में उन्‍हें विदेशी मामलों की समिति का सदस्‍य बनाया गया। इसके बाद 5 अगस्‍त 2007 को कृषि समिति के सदस्‍य घोषित किए गए। 2009 में वह दोबारा लोकसभा चुनाव जीते और इस कार्यकाल में उन्हें मानव संसाधन विकास और संसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना की समिति का सदस्‍य बनाया गया। राजनीति के अलावा वे आईआईटी के सदस्‍य हैं और भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के उपाध्‍यक्ष भी रहे। इसके अलावा वे परंपरागत कुश्‍ती, क्रिकेट और टेनिस आदि खेलों के क्‍लबों के सदस्‍य भी हैं। राजनिति में प्रवेश करने से पहले उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी इंफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए काम किया।

विरासत में मिली सियासत

दीपेंद्र हुड्डा को सियासत परिवार से विरासत में मिली है इनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं वहीं इनके दादा रणबीर सिंह हुड्डा संविधान सभा के सदस्य थे। वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं। मोदी लहर के बावजूद वर्ष 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी ओपी धनखड़ को हराया था। हलांकि 2019 में उनको सफलता नहीं मिली और प्रदेश की सभी 10 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया।

मोदी लहर में भी कांग्रेस को दिलाई थी जीत

रोहतक की जनता ने 2009 और 2014 में फिर दीपेंद्र को जीत दिलाई और वो यहां से सांसद बने। 2014 में मोदी लहर में हरियाणा में कांग्रेस मात्र एक जीती वह सीट दीपेंद्र हुड्डा की ही थी। लेकिन 2019 में फिर वह रोहतक से कांग्रेस का चेहरा बने लेकिन सफलता नहीं मिली। जब 2005 में वह सांसद बने उस समय वह भारतीय राजनीति के सबसे युवा सांसद थे। हलांकि बाद में दुष्यंत चौटाला ने उनसे भी कम उम्र में सांसद बनकर उनका रिकार्ड तोड़ दिया।

विश्व आर्थिक मंच ने दिया यंग ग्लोबल लीडर का अवार्ड

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने 2011 में दीपेंदर हुड्डा को यंग ग्लोबल लीडर के रूप में नामित किया। फोरम ऑफ यंग ग्लोबल लीडर्स 40 साल से कम उम्र के दुनिया के ऐसे युवा नेताओं को हर साल चुनती है जो समाज सेवा में अपना योगदान दे चुके हो। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अब तक भारत के सिर्फ 11 युवा नेताओं को इस अवार्ड के लिए चुना है।

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