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अजय सिंह चौटाला: शिक्षक भर्ती घोटाले में जाना पड़ा जेल, कारागार में पिता से बगावत करके बना ली पार्टी

ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला (Ajay Singh Chautala) के जेल में रहते चौटाला परिवार में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। परिवारिक खटपट के बीच इनेलो (INLD) टूट गई और एक नई पार्टी जजपा (JJP) का गठन हुआ। देखना दिलचस्प होगा कि अब यह नई पार्टी किस तरह सूबे की राजनीति में अपनी पकड़ बनाती है।

जजपा की सरकार बनने के बाद पहली बार जनता के बीच पहुंचे अजय चौटाला, कहा एहसान सूद समेत उतारेंगेजजपा नेता अजय चौटाला

अजय सिंह चौटाला हरियाणा राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले चौटाला परिवार से आते हैं। इनके पिता ओमप्रकाश चौटाला व दादा चौधरी देवी लाल हरियाणा के माने जाने जाट नेता और मुख्यमंत्री रहे हैं। वर्तमान में अजय सिंह चौटाला अपने पिता ओमप्रकाश चौटाला के साथ तिहाड़ जेल में सजा काट रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। इनकी पत्नी नैना चोटाला भी हरियाणा राजनीति में सक्रिय हैं। इनके दो बेटे दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला हैं जो मौजूदा वक्त में पिता की अनुपस्थिति में परिवार से अलग पार्टी बनाकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने में लगे हुए हैं। पारिवारिक घमासान के बीच बेटे दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता दल नामक अपनी अलग पार्टी बनाई है।

राजनीतिक जीवन

अजय सिंह चौटाला का जन्म हरियाणा के सिरसा में 13 मार्च 1961 को चौटाला परिवार में हुआ था। इनके पिता ओमप्रकाश चौटाला इंडियन नेश्नल लोकदल के मुख्य नेता थे। इन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक किया और राजस्थान विश्वविद्यालय से एम. ए. और कानून की डिग्री ली।

इन्होंने 1980 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह राजस्थान से दो बार विधायक रहे। इसके बाद 1999 में यह हरियाणा की भिवानी लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने। फिर 2004 में वह राज्य सभा के निर्वाचित हुए और 2009 में अंतिम बार हरियाणा के डबवाली से विधायक बने। 2013 में शिक्षक भर्ती घोटाले में नाम आने के बाद उनको पिता ओमप्रकाश चौटाला के साथ 10 साल की सजा सुनाई गई।

क्या था शिक्षक भर्ती घोटाला

दिल्ली की एक अदालत ने तीन हजार से अधिक शिक्षकों की अवैध भर्ती के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला समेत 54 अन्य को दोषी ठहराया। इस मामले में अजय चौटाला भी दोषी करार दिए गए हैं। अदालत ने इस घोटाले में कुल 55 लोगों को दोषी करार दिया। ये घोटाला 1999 से 2000 के बीच का है जब 3 हज़ार से ज़्यादा शिक्षकों की भर्ती की गई थी। शिक्षा विभाग के ही एक आईएएस अफसर संजीव कुमार की शिकायत पर इस घोटाले का खुलासा हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। मामले में ये बात साबित हुई कि जेबीटी भर्ती में नौकरी पाने वाले हर व्यक्ति से 3 से 5 लाख रुपए की रिश्वत ली गई थी।

परिवारिक घमासान के बीच बेटों ने बनाई अलग पार्टी

ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला के जेल में रहते चौटाला परिवार में परिवार में सत्ता की लड़ाई छिड़ गई। अभय चौटाला की राजनीतिक हैसियत लगातार पार्टी में बढ़ रही थी वह राज्य में बतौर प्रधान सचिव पार्टी का पूरा कार्यभार संभाले हुए हैं और खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी प्रोजेक्ट करने में लगे। जिसके बाद पार्टी में बर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। परिवारिक खटपट के बीच इनेलो टूट गई और एक नई पार्टी का गठन हो गया। देखना दिलचस्प होगा कि अब यह नई पार्टी किस तरह सूबे की राजनीति में अपनी पकड़ बनाती है।

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