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महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल, बीजेपी का टिकट मिलने पर गांव वालों ने हटवाया बहू का घूंघट

हरियाणा (Haryana) में लंबे समय से घर की बहू के घूंघट करने की परंपरा चली आ रही है। प्रदेश के सामाजिक परिवेश में इसे लेकर काफी गंभीरता भी रहती है। लेकिन हरियाणा की उकलाना विधानसभा सीट (Uklana Vidhan Sabha Seat) पर खुद गांव वालों नें बीजेपी से उम्मीदवार (BJP Candidate) गांव की बहू का घूंघट हटवा दिया।

महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल, बीजेपी का टिकट मिलने के बाद खुद गांव वालों ने हटवाया बहू का घूंघटNew example of women empowerment, after getting BJP ticket, villagers themselves removed daughter-in-law

भारत ने महिला सशक्तिकरण के लिए सत्ता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की चर्चा लंबे समय से चलती आई है। लेकिन इसकी एक मिसाल हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) से पहले सामने आई। हिसार (Hisar) जिले की उकलाना विधानसभा सीट (Uklana Vidhan Sabha Seat) पर बीजेपी (BJP) ने महिला को टिकट दिया है। इनका नाम आशा (Asha) है और यह एक व्यापारी की दलित पत्नी हैं। बड़ों के प्रति आदर सत्कार का ध्यान रखते हुए वर्षों से घूंघट करती आ रही हैं। लेकिन टिकट मिलने पर गांव की बहू का घूंघट बीजेपी का टिकट मिलते ही खुद गांव वालों नें हटवा दिया।

आशा एक पारंपरिक बहू के तौर पर घूंघट में अपने ससुराल पहुंची थीं। वहां सभा में लगभग दो हजार लोग मौजूद थे। उन्होंने आशा का घूंघट हटवा दिया और कहा कि रीति-रिवाज अलग की बात है। लेकिन अब बहू चुनाव लड़ने जा रही है तो लोगों के बीच उठना-बैठना पड़ेगा। ऐसे में घूंघट, बहू और वोटरों के बीच दीवार बन जाएगा। गांव वालों ने कहा कि सब लोग चाहते हैं आशा पूरे आत्मविश्वास के साथ घूंघट हटा कर चुनाव लड़े। बीजेपी की उकलाना विधानसभा प्रत्याशी आशा संस्कृत और अंग्रेजी में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। वह पुलित्जर विनर और बुकर फाइनलिस्ट झुंपा लाहिड़ी पर पीएचडी कर रही हैं।

सभा में उपस्थित जिला परिषद के सदस्य राजबीर खेदड़ ने इस पर कहा कि चुनाव में उतर चुकी महिला का पर्दा या घूंघट में रहना अच्छा संदेश नहीं है। चुनाव जीतने के बाद हो सकता है उन्हें आगे मंत्री पद मिले। गांव के पूर्व सरपंच शमशेर सिंह ने कहा कि वह गांव की बहू के तौर पर पर्दा करती थीं। लेकिन अब वह चुनाव में उम्मीदवार हैं। इसलिए हम सब चाहते हैं कि वह घूंघट हटा कर पूरी मेहनत के साथ चुनाव लड़ें। आशा भी गांव वालों के इस फैसले से काफी खुश नजर आईं। उन्होंने कहा कि अब वह पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों के बीच जा सकेंगी और उनकी सेवा कर सकेंगी।

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