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Sonipat Ground Report: कांग्रेस के गढ़ सोनीपत में प्रत्याशियों का चयन तय करेगा वोटर का रुख

Sonipat Ground Report: हरियाणा विधानसभा चुनावों (Haryana Assembly Election) में सोनीपत पर फतह पाना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कांग्रेस का गढ़ (Congress Stronghold) माने जाने वाले जाट बाहुल्य सोनीपत में पिछली बार भाजपा सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। कांग्रेस ने सोनीपत की 6 सीटों में से पांच जीती थीं।

कांग्रेस के गढ़ सोनीपत में प्रत्याशियों का चयन तय करेगा वोटर का रुखSelection Of Candidates Will Decide the Voter's Stand In Sonipat

हरियाणा विधानसभा चुनावों (Haryana Assembly Election) में भाजपा के लिए सोनीपत अभेद्य किला साबित हो सकता है। कांग्रेस का गढ़ (Congress Stronghold) माने जाने वाले सोनीपत में विधानसभा 2014 में भाजपा 6 में से सिर्फ 1 सीट ही जीत सकी थी। जबकि बची हुई सभी 5 सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। हालांकि पांच साल में भाजपा काफी मजबूत हुई है। सोनीपत की ग्राउंड रिपोर्ट (Sonipat Ground Report) ये है कि कांग्रेस के गढ़ में प्रत्याशियों का चयन ही वोटरों का रूख तय करेगा।

भाजपा को संजीवनी देंगे केजीपी-केएमपी



भाजपा सरकार ने सोनीपत के लोगों को दो सबसे बड़ी परियोजना केजीपी-केएमपी का तोहफा दिया है। कांग्रेस के गढ़ में दो बड़ी परियोजनाएं भाजपा के लिए संजीवनी का कार्य कर सकती है। हजारों करोड़ रुपये के ये दोनों प्रोजेक्ट एक तरह से जिले के लोगों के लिये वरदान बनकर उभरे हैं। केजीपी के जरिए जहां यूपी की तरफ से होते हुए दिल्ली को पार करते हुए पलवल पहुंचा जा सकता है। वहीं केएमपी के जरिये मानेसर से होते हुए पलवल पहुंचा जा सकता है। केएमपी और केजीपी एक तरह से दिल्ली के लिये रिंग रोड बने हैं। लेकिन जिले के लोगों को इसका बड़ा फायदा पहुंचा हैं। जिले के लोगों को अब ज्यादा चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विशेषतौर पर कुंडली, राई और बड़ी औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगपतियों को। इसके अलावा जिले में कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने किया मजबूत


कांग्रेस के गढ़ में सोनीपत से विधायक कविता जैन ने भाजपा को मजबूत किया। सोनीपत जिले की छह सीटों में से सोनीपत सीट पर बीजेपी की कविता जैन के जीतने से कांग्रेस पांच सीटें ही जीत सकी। भाजपा ने इसका इनाम देते हुए कविता जैन को कैबिनेट मंत्री बना दिया। जिसके बाद कविता जैन ने तेजी से विकास कार्य कराकर काफी हद तक माहौल बदला। जिसके चलते लोकसभा 2019 चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी चुनाव हार गए। 6 विधानसभा में से चार विधानसभाओं में भूपेंद्र हुड्डा पीछे रहे। तभी से माना जा रहा है कि कांग्रेस का किला विधानसभा चुनावों में ढह जाएगा।

नेताओं के जाने से इनेलो कमजोर

सोनीपत जिले में कई नेता इधर से उधर हो चुके हैं। सबसे अधिक संख्या इनेलो के नेताओं की हैं। सोनीपत से चुनाव लड़ चुके इनेलो नेता सुरेंद्र पंवार कांग्रेस में जा चुके हैं। जबकि बरोदा से चुनाव लड़ने वाले डाक्टर कपूर नरवाल भाजपा में शामिल हुए हैं। जबकि खरखौदा से विधायक रहे पदम सिंह दहिया अब जजपा के साथ हैं। इसके अलावा गन्नौर के कांग्रेस नेता देवेंद्र कादियान और इनेलो नेता निर्मल सिंह भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

सोनीपत में तीसरी बार जीतना चुनौती

पिछले विधानसभा चुनाव में सोनीपत की सभी छह सीटों पर सभी प्रत्याशी दूसरी बार विधायक बने थे। जिले की सोनीपत विधानसभा सीट को कविता जैन, राई को जयतीर्थ दहिया, गन्नौर को कुलदीप शर्मा, खरखौदा को जयवीर वाल्मीकि, गोहाना को जगबीर मलिक और बरोदा को श्रीकृष्ण हुड्डा ने बरकरार रखा था। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन प्रत्याशी तीसरी बार सीट को बरकरार रख पाता है। क्योंकि कांग्रेस विधायकों के लिए तीसरी बार सीट बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती होगा।

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