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हरियाणा चुनाव : तीन दशक में सबसे कम मतदान,1991 के बाद सबसे कम वोट पड़े

हरियाणा विधानसभा चुनावों में वोटिंग प्रतिशत के लिहाज से सबसे कम मतदान 1968 के चुनाव में 57.26 प्रतिशत हुआ था। सबसे अधिक मतदान 2014 के चुनाव में चुनाव 76.2 प्रतिशत रहा था।

हरियाणा विधानसभा चुनाव
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हरियाणा विधानसभा चुनाव

हरियाणा के मतदाताओं ने मत डालने में सोमवार को सुस्ती दिखाई। मत प्रतिशत कछुए की चाल से आगे बढा और कुल मिलाकर हरियाणवी मतदाता 1991 के चुनाव के प्रतिशत से होड करते नजर आए। 1991 के चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने 65.86 प्रतिशत मतदान दर्ज करवाया था वहीं 2019 में भी मतदाताओं ने 68.30 प्रतिशत वोट डाले। मतदान के लिहाज से हरियाणा के मतदाता तीन दशक पीछे खिसकते हुए नजर आए। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को चुनावी अवकाश के चलते मतदाता छुट्टी के ही मूड में रहे। कई दूसरे कारण भी ऐसे सामने आए जिनके चलते मतदाता घर से नहीं निकले या रविवार को ही अपने बूथ से दूरी बनाकर दूर चले गए।

वोटिंग प्रतिशत के लिहाज से देखें तो हरियाणा में आज तक सबसे कम मतदतान 1968 के चुनाव में 57.26 प्रतिशत रहा था और सबसे अधिक मतदान प्रतिशत 2014 के चुनाव में चुनाव 76.2 प्रतिशत रहा था। चुनाव आयोग की कोशिश थी कि 2019 में 2014 का रिकॉर्ड तोडा जाए लेकिन मतदाता पहुंच गए 1991 के दाैर में। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संभवत दो छुट्टियां एक साथ पडने को भांप गए थे तभी रैली में इसको लेकर अपील भी कि थी दो छुट्टी एक साथ आ रही हैं, कहीं बाहर मत चले जाना।

ये कारण रहे वोटिंग कम होने के

दो छुट्टियां: रविवार और सोमवार की दो दिन की छुट्टी होने के चलते बहुत सारे लोग छुट्टी के मूड से ही बाहर नहीं निकल सके। ग्रामीण क्षेत्रों मेें तो फिर भी मतदान को लेकर उत्साह दिखाई दिया लेकिन शहरी क्षेत्र में तो मतदान की सुस्ती पूरा दिन ही कायम रही।

बदलाव के संकेत नहीं: आमतौर पर मतदान ज्यादा तब होता है जब मतदाता बदलाव के लिए वोट डालते हैं। 75 पार के नारे पर सवार भाजपा ने जिस तरह युद्ध स्तर पर चुनाव लडा उसको देखते हुए यह लगने लगा था कि मतदाता कम से कम बदलाव के लिए वोट नहीं डाल रहा है। ये कारण भी हो सकता है कि वोट प्रतिशत कम रहने का।

अहोई अष्टमी का व्रत: महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत भी कम रहा है और इसका कारण सोमवार को अहोई अष्टमी का व्रत होना भी रहा है। सुबह से उपवास पर चल रही महिलाओं ने संभवत मतदान केंद्र में पहुंचने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

दिवाली की सफाई: इसको लेकर तो सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चाएं रही। दो दिन की छुट्टी का प्रयोग दीवाली की सफाई के लिए किया गया और पुरुषाें को भी साथ देना पडा। ये कारण भी हो सकता है मतदान कम रहने का।

वर्ष---------------कुल मतदान प्रतिशत में

1967---------------------72.65

1968---------------------57.26

1972---------------------70.46

1977---------------------64.46

1982---------------------69.87

1987---------------------71.24

1991---------------------65.86

1996---------------------70.54

2000---------------------69.01

2005---------------------71.96

2009---------------------72.29

2014---------------------76.20

2019---------------------68.30

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