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कांग्रेस गढ़ खरखौदा विधानसभा में पहली बार खिल सकता है कमल, जाट वोटर निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

खरखौदा विधानसभा सीट पर भाजपा कभी जीत हासिल नहीं कर पायी है। पिछले 13 चुनावों में चार बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। जबकि दो बार से लगातार कांग्रेस का विधायक है। लेकिन इस बार विधानसभा में कांग्रेस की जड़े कमजोर नजर आ रही हैं।

कांग्रेस गढ़ खरखौदा विधानसभा में पहली बार खिल सकता है कमल, जाट वोटर निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिकाBjp may win for the first time in Congress stronghold Kharkhoda Assembly, Jat voters will play important role

खरखौदा विधानसभा क्षेत्र पहले रोहट हलके के नाम से जाना जाता था। कांग्रेस के गढ़ खरखौदा में आज तक ऐसा मौका नहीं आया जब भाजपा के किसी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की हो। इतना ही नहीं इस सीट पर हुए सभी चुनावों में कोई भी भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर भी नहीं रहा। हालांकि इस बार स्थिति कुछ अलग है। लोगों का मानना है कि इस बार खरखौदा सीट पर कमल खिल सकता है।

जानकारी के मुताबिक रोहट से खरखौदा बनने पर विधानसभा सीट को आरक्षित किया गया। अब तक हुए 12 चुनावों में सबसे अधिक बार 4 बार कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा किया है। एक बार नेशनल कांग्रेस के प्रत्याशी ने भी यहां जीत दर्ज की है। इसके बाद एलकेडी का नंबर आता है। जिसके उम्मीदवार ने यहां दो बार चुनाव जीता है। 1967 में जब पहली बार हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए थे। पूरा प्रदेश जहां कांग्रेस के समर्थन में था। वहीं इस हलके ने उस समय आजाद प्रत्याशी बी सिंह को जीत का हार पहनाया था।

जातिगत समीकरण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण

खरखौदा हलके में जातिगत समीकरण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसकी बात करें तो जाट समुदाय के मतदाता सबसे अधिक हैं। वहीं नंबर दूसरे नंबर पर अनुसूचित जाति के मतदाता आते हैं। वहीं लगातार दो बार से विधायक जयवीर वाल्मीकि को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का लगातार साथ मिल रहा है। जोकि उनके लिये पॉजीटिव प्वाइंट, हालांकि उनका जनसंपर्क काफी कमजोर रहा जो उनके लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है। मोटे तौर पर कहें तो जयवीर वाल्मीकि सिर्फ हुड्डा नाम के सहारे से अपनी नैय्या पार लगाने की इंतजार में है। वहीं भाजपा के लिए सही प्रत्याशी चुनना कठिना होगा। पूर्व प्रत्याशी कुलदीप जहां पिछले चुनावों में जमानत भी नहीं बचा पाए थे।

दिल्ली से सटे होने के बावजूद नहीं हुआ विकास

एक तरफ से दिल्ली और दूसरी तरफ से रोहतक जिले की सीमा को छूने वाले इस हलके में हमेशा ही विकास की कमी दिखाई दी है। केएमपी जहां खरखौदा के कुछ क्षेत्रों से निकलता है। वहीं यूपी से आने वाला रोहतक जाने वाला हाइवे भी खरखौदा से होकर गुजरता है। इसके बावजूद खरखौदा शहर की हालत शहरों जैसी नहीं है।

जब 38 वोट से जीते कांग्रेस प्रत्याशी

वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव का परिणाम काफी करीबी रहा था। कांग्रेस प्रत्याशी हुकम सिंह ने 19,834 वोट हासिल किए थे। जोकि जपा के प्रत्याशी मोहेंद्र से सिर्फ 38 वोट से जीते थे। मोहेंद्र को 19796 मत मिले थे।

विधानसभा क्षेत्र में ये हुए विकास कार्य


सर्व शिक्षा अभियान/राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 28 लड़के-लड़कियों के शौचालय, 3 मुख्याध्यापक कक्ष, 4 विज्ञान प्रयोगशाला तथा 9 आर्ट एडं क्राफ्ट कक्ष, 5 कंप्यूटर कक्ष, 4 लाईब्रेरी कक्ष का निमार्ण करवाया गया। इसके अलावा 9 स्कूलों की मुरम्मत करवाई तथा 4 हैंड पम्प लगवाये। इन सब कार्यों पर कुल एक करोड़ 58 लाख 71 हजार रुपये खर्च हुए। लोक निर्माण विभाग द्वारा 117.82 किलो मीटर सड़कों का सुधारीकरण किया गया। वहीं लगातार दो बार से विधायक जयवीर वाल्मीकि कहते हैं कि मौजूदा सरकार ने हमारे हलके के साथ सौतेला व्यवहार किया है। कोई भी ऐसा गांव नहीं है जिसमें नहरों का पानी टेल तक पहुंचता हो। बिजली आपूर्ति की हालत खस्ता है। यहां तक की मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जो घोषणाएं की थी वो भी आज तक अधूरी है।

1967

बी सिंह

आजाद

1968

कंवर सिंह

कांग्रेस

1972

फूलचंद

एनसीओ

1977

भीम सिंह

एलकेडी

1982

ओमप्रकाश

जेएनपी

1987

महेंद्र

एलकेडी

1991

हुकम सिंह

कांग्रेस

1996

कृष्णा गहलावत

एचवीपी

2000

पदम सिंह

इनेलो

2005

सुखबीर

एनसीपी

2009

जयवीर

कांग्रेस

2014

जयवीर

कांग्रेस

1.57 लाख करेंगे हार-जीत का फैसला

मतदाताओं की बात करें तो हलके में इस समय एक लाख 57 हजार 936 मतदाता हैं। इसमें 86 हजार 915 पुरुष तो 71 हजार 741 महिला मतदाता शामिल हैं। क्षेत्र में एनआरआई मतदाता के तौर पर एक मतदाता ही रजिस्टर्ड है। हलके में कुल 1214 सर्विस वोटर्स हैं। इसमें 1159 पुरुष तो और 55 महिलाएं शामिल हैं।

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