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Om Prakash Chautala: घड़ी तस्करी से हुई राजनीतिक सफर की शुरूआत, शिक्षक भर्ती घोटाले से हुआ अंत

भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (INLD) के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला राज्य के चार बार मुख्यमंत्री रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अब जेल में बंद हैं।

Om Prakash Chautala: घड़ी तस्करी से हुई राजनीतिक सफर की शुरूआत, शिक्षक भर्ती घोटाले से हुआ अंत

हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला का राजनीतिक जीवन शुरू से ही विवादों से घिरा रहा है। पिछले चार दशक में कई बार उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी। सबसे पहले 1978 में बड़ी संख्या में कलाई घड़ी तस्करी करने पर जेल जाना पड़ा। कलाई घड़ी तस्करी करने पर विदेश से लौटते समय दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। वह अपने पिता की राजनीतिक धाक के चलते बाहर तो जरूर आ गए। लेकिन आगामी वर्षों में फिर ऐसी गतिविधियां की जिनके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा।

ओम प्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1935 को हरियाणा के सिरसा जिले में हुआ था। इनके पिता चौधरी देवी लाल हरियाणा के बड़े नेता और मुख्यमंत्री रहे थे। इनका विवाह स्नेहलता से हुआ है। इनके दोनों बेटे अभय व अजय चौटाला राजनीति में सक्रिय है। भारतीय राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इन दिनों ओम प्रकाश चौटाला शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोप में जेल में हैं। इनके बेटे अभय सिंह चौटाला पार्टी को कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संचालित कर रहे हैं।

चौटाला ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए स्कूल छोड़कर राजनीति में करियर बनाने का विकल्प चुना। 1970 में जनता दल (पीपुल्स पार्टी) के सदस्य के रूप में वे पहली बार हरियाणा राज्य विधान सभा के लिए चुने गए। जब चौधरी देवी लाल ने हरियाणा संघर्ष समिति के लिए न्याय युद्ध चलाया तो ओमप्रकाश चौटाला ने उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। न्याय युद्ध के आयोजन व प्रबंधन की जिम्मेदारी को खुद संभाला। राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए इन्होंने हरियाणा बचाओ और कानून रैली जैसी सार्वजनिक सभाओं का भी संचालन किया।

पांच बार बने राज्य के मुख्यमंत्री

चौटाला 1987 में राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके बाद दिसंबर 1989 में वह पिता की जगह हरियाणा के पहली बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि उन्होंने मई 1990 में पद छोड़ दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने विधानसभा के लिए एक उप-चुनाव जीता। इसके बाद 1990 में छह दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। तीसरी बार मुख्यमंत्री 1991 में 16 दिन के लिए बने। कांग्रेस की भजनलाल सरकार पर यमुना के पानी को साझा करने के लिए राज्य को खतरे में डालने का आरोप लगाकर 1995 में इस्तीफा दे दिया।

भाजपा की मदद से पांच साल रहे सीएम

ओम प्रकाश चौटाला अपने राजनीतिक जीवन में सिर्फ एक बार पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहे। चौटाला ने 1996 के राज्य विधानसभा चुनावों में 9 सीट जीती। हरियाणा विकास पार्टी (एचवीपी) की सरकार बनने के बाद सदन में विपक्ष के नेता बन गए। एचवीपी सरकार ने 1999 में राज्य विधानसभा में अपना बहुमत खो दिया। जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से चौथी बार सरकार बनाई। 2000 में हुए चुनाव में भाजपा से गठबंधन कर 47 सीटें जीतकर पांचवें कार्यकाल में पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहे।

इनेलो का 2005 से प्रदर्शन कमजोर

इनेलो की 2005 के राज्य विधानसभा चुनावों में बुरी तरह हार गई। कांग्रेस पार्टी ने नई सरकार बनाई। 2009 के राज्य चुनावों में आईएनएलडी ने बेहतर प्रदर्शन जरूर किया। लेकिन सरकार बनाने में विफल रही। चौटाला का राजनीतिक करियर 2013 में समाप्त हो गया था। पांचवें कार्यकाल के दौरान 3,200 शिक्षक उम्मीदवारों को अवैध रूप से पदोन्नत करने के लिए दोषी ठहराया गया था। जनवरी 2013 में उन्हें उनके बेटे को उनके अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। 10 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन 2015 में देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उनकी सजा बरकरार रखी।

क्या था शिक्षक भर्ती घोटाला

दिल्ली की एक अदालत ने तीन हजार से अधिक शिक्षकों की अवैध भर्ती के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे समेत 53 अन्य को दोषी ठहराया। इस मामले में चौटाला के बेटे अजय चौटाला भी दोषी करार दिए गए हैं। अदालत ने इस घोटाले में कुल 55 लोगों को दोषी करार दिया। ये घोटाला 1999 से 2000 के बीच का है जब 3 हज़ार से ज़्यादा शिक्षकों की भर्ती की गई थी। शिक्षा विभाग के ही एक आईएएस अफसर संजीव कुमार ने इस केस में विशिल ब्लोअर का काम किया। सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। मामले में ये बात साबित हुई कि जेबीटी भर्ती में नौकरी पाने वाले हर शख्स से 3 से 5 लाख रुपए की रिश्वत ली गई थी।

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