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Haryana Assembly Election: हरियाणा विधानसभा चुनाव में ये चार फैक्टर करेंगे हार जीत का फैसला

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जनता का आशीर्वाद प्राप्त है। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में दस सीटें जीतने के बाद अब पार्टी प्रदेश में 75 से अधिक सीटें जीतेगी। समूचा विपक्ष बिखरा पड़ा है लेकिन कुछ खास सीटों पर मुकाबले भी होंगे।

Haryana Assembly Election: हरियाणा विधानसभा चुनाव में ये चार फैक्टर करेंगे हार जीत का फैसलाHaryana Assembly election 2019: These Four factors Will Decide Victory Or Defeat

2014 में पहली बार अपने बूते पर प्रदेश में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब फिर अकेले ही चुनाव के मैदान में खडी है। प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) रोहतक में मनोहर (Manohar Lal Khattar) को नमोहर कहकर साफ कर चुके हैं हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) में पार्टी मनोहर सरकार के काम पर ही वोट मांगेंगी। 2014 में जहां भाजपा में ही मुख्यमंत्री पद के कई चेहरे थे वहीं इस बार अकेले मनोहर लाल के नाम और काम पर पूरी भाजपा वोट मांगती हुई दिखाई दे रही है। 2014 में जहां भाजपा नेताओं के निशाने पर हुड्डा का दस साल का शासन था वहीं इस बार उन्हें खुद के कामों पर ही वोट मांगने होंगे। पांच साल में बदली परिस्थितियों को देखते हुए 2019 के चुनाव में चार फैक्टर छाए रहेंगे और इन्हीं पर हार जीत भी तय होगी।

1. अनुच्छेद 370

देश की सेना में हर दसवां सैनिक हरियाणा से है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार देश के किसी राज्य में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। प्रदेश में भाजपा के हर छोटे-बडे नेता ने जहां 370 अनुच्छेद पर जनता के बीच पैरवी की है वहीं बदली हुई परिस्थितियों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा तक मोदी सरकार के इस कदम का समर्थन करने पर मजबूर हुए हैं।

2. मनोहर- नमोहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोहतक में सरकार के साै दिन के कार्यकाल पर रैली में साफ कर गए थे कि अब हरियाणा में नमोहर-मनोहर का नारा चल पडा है। 2019 का चुनाव प्रदेश में भाजपा मुख्यमंत्री मनोहर लाल की कार्यशैली, तबादलों व नौकरियों में पारदर्शिता के नाम पर लडेगी वहीं मनोहर लाल खुद कह चुके हैं कि सरकार का अगला फोकस स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा होगा। भाजपा अपने संकल्प पत्र में इसका विजन सामने रखेगी।

3. लोकसभा चुनाव के नतीजों की पुनरावृत्ति

लोकसभा चुनाव 2019 में 79 हलकों में भाजपा, 10 में कांग्रेस और एक में जजपा को जीत मिली थी। इसी चुनाव परिणाम से उत्साहित भाजपा 75 प्लस सीटें जीतने का टारगेट निर्धारित करके चुनाव मैदान में उतर चुकी है। वहीं पर प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस में हाल ही नेतृत्व परिवर्तन हुआ है और कमान सैलजा के हाथों में है। एक तरह से ये सैलजा और हुड्डा के नेतृत्व परीक्षा हैं।

4. विपक्ष की टूट

2014 के मुकाबले 2019 में चुनावी परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। इनेलो प्रमुख विपक्ष पार्टी बनी थी लेकिन अब अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। कांग्रेस में गुटबाजी हावी रही हैं और हाल ही में तंवर को हटाकर सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। एक नई पार्टी जेजेपी अस्तित्व में आ चुकी है, लेकिन कोई एक ऐसा गठबंधन या दल नहीं बना है जो मजबूत पकड़ बना सके। अलग-अलग पॉकेट में भाजपा का मुकाबला अलग अलग पार्टियों से बन सकता है।

75 से अधिक सीटें जीतेंगे

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को जनता का आशीर्वाद प्राप्त है। लोकसभा चुनाव में दस सीटें जीतने के बाद अब पार्टी प्रदेश में 75 से अधिक सीटें जीतेगी। समूचा विपक्ष बिखरा पड़ा है लेकिन कुछ खास सीटों पर मुकाबले भी होंगे। भाजपा सभी 90 सीटों पर मजबूत है और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले हम इन सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन कर लेंगे। संभावित उम्मीदवार कई हो सकते हैं लेकिन अंत में केवल 90 को ही टिकट मिलेगी। भाजपा का हर कार्यकर्ता पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित होता है और असली जीत के सूत्रधार वही होते हैं। हम साफ कर चुके हैं कि अगले कार्यकाल में हम स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा पर फोकस करेंगे।

मतदाता परमेश्वर, फिर सरकार बनाएंगे

वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि लोकतंत्र के जिस महापर्व का हरियाणा के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उसका ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया। हरियाणा के मतदाता न्यायधीश एवं पंच परमेश्वर बनकर फिर राज्य की सरकार चुनेंगे। पिछले पांच साल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने जिस पारदर्शिता, मेहनत और ईमानदारी के साथ काम किया है। उसके आधार पर हम जनता से वोट की अपील करेंगे। जनता अपना आशीर्वाद देकर एक बार फिर मनोहर सरकार बनाने का काम करेगी। उन्हें विधानसभा के चुनाव में लोकसभा के चुनाव की तरह बेहतर परिणाम की उम्मीद है।

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