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हरियाणा का मुख्यमंत्री बनने को लेकर चलती रहती है उठापटक, विधानसभा के 13 चुनावों में 23 बार बने मुख्यमंत्री

हरियाणा में 1967 से लेकर 2019 तक 13 विधानसभा चुनाव हुए हैं। जबकि 23 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली गई है। इतिहास में सिर्फ 6 मुख्यमंत्री ही कार्यकाल पूरा कर पाए हैं।

हरियाणा विधानसभा के 13 चुनावों में 23 बार बने मुख्यमंत्री, 17 बार मुख्यमंत्री नहीं कर पाए कार्यकाल पूरा
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The Fight To Become Haryana Chief Minister Has Been Going On, 23 Times In The 13 Assembly Elections

हरियाणा विधानसभा का शुरुआती इतिहास काफी ज्यादा अस्थिर रहा है। विधानसभा के पांच दशकों के इतिहास में मुख्यमंत्री बनने की चाह में अल्पमत की सरकारें बनायी गईं। लेकिन अधिकांश सरकारें कार्यकाल पूरा होने से पहले गिर गईं। पिछले पांच दशक में 13 बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं। जबकि 23 बार नेताओं ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। लेकिन 6 बार ही मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं।





हरियाणा विधानसभा के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार विधानसभा के चुनाव 1967 में हुए। उसके बाद 2014 तक पिछले पांच दशक में 13 बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं। जबकि 14वीं विधानसभा गठन के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं। लेकिन पिछली 13 विधानसभा में 7 विधानसभा अस्थिर रही हैं। 13 विधानसभा कार्यकाल के दौरान 23 मुख्यमंत्री बने हैं। इनमें से 7 विधानसभा गठन के बाद 17 मुख्यमंत्री बने हैं।

तीन दशक तक रही अस्थिर सरकार

हरियाणा की राजनीति में शुरूआती तीन दशक तक अस्थिर सरकारें रहीं। जबकि पिछले दो दशक से सरकारें स्थिर हैं। 1967 में हुए चुनाव के बाद पटौदी विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार 'गया राम' ने 15 दिन के भीतर तीन पार्टियां बदलीं। जिसके बाद से आया राम-गया राम की राजनीति चर्चा में रही। गया राम ने पहले कांग्रेस जॉइन की। इसके बाद कांग्रेस छोड़कर यूनाइटेड फ्रंट की सदस्यता ले ली। उसके बाद वापस कांग्रेस में लौट आए। लेकिन 9 घंटे के भीतर ही वापस यूनाइटेड फ्रंट में लौट गए। जिससे चौधरी बीरेंद्र सिंह की सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। इसके बाद 1968 से लेकर 1972 तक बंसीलाल ने स्थिर सरकार दी। लेकिन 1972 से लेकर 1991 तक करीब तीन दशक तक अस्थिर सरकारें चलती रहीं।

ये मुख्यमंत्री ही कर पाए कार्यकाल पूरा

हरियाणा के इतिहास में सिर्फ छह बार ही ऐसा हुआ है जब मुख्यमंत्री कार्यकाल पूरा कर पाए हैं। सबसे पहले 1968 से 1972 तक बंसीलाल ने सफलता पूर्वक सरकार चलायी। हालांकि मुख्यमंत्री 1975 तक बंसीलाल रहे। इसके बाद 1991 से लेकर 1996 तक भजनलाल ने सरकार चलायी। उसके बाद 2000 से 2005 तक ओमप्रकाश चौटाला, 2005 से 2014 तक भूपेंद्र हुड्डा और अब पिछले पांच पांच साल से मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार चला रहे हैं।

पांच साल में बने छह मुख्यमंत्री



हरियाणा की सातवीं विधानसभा सबसे ज्यादा अस्थिर रही। 1987 से 1991 तक छह मुख्यमंत्री बने। जानकारी के मुताबिक जनता दल की तरफ से देवीलाल 20 जून 1987 को मुख्यमंत्री बने। लेकिन छह माह से कम वक्त में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद जनता दल की तरफ से ही ओम प्रकाश चौटाला 2 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन पांच माह में इन्हें भी इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद दो माह के लिए बनारसी दास मुख्यमंत्री बने। लेकिन फिर से ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री बन गए। जनता दल के अंतिम मुख्यमंत्री 17 जुलाई 1990 को हुकम सिंह बने। लेकिन आठ माह सरकार चलाने के बाद 22 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। हुकम सिंह हो हटाकर समाजवादी जनता दल से फिर ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री बने, लेकिन सरकार गिर गई। जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।

सबसे कम दिन सीएम का रिकार्ड चौटाला के नाम

हरियाणा के इतिहास में सबसे कम दिन तक मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड ओमप्रकाश चौटाला के नाम पर है। जनता दल की सरकार में ओम प्रकाश चौटाला महज छह दिन के लिए मुख्यमंत्री रहे। 12 जुलाई 1990 को शपथ लेने के बाद 17 जुलाई 1990 को पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद जनता दल की सरकार में 16 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। ओम प्रकाश चौटाला 22 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991 तक मुख्यमंत्री रहे। सरकार के अल्पमत में आने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। उनके अलावा सबसे कम 52 दिन के लिए बनारसी दास मुख्यमंत्री रहे।

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