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हरियाणा : प्रदूषण की रफ्तार थामने के लिए सरकार ने कसी कमर, 20 हजार मशीनें की वितरित

प्रदूषण की समस्या 2006 से शुरु हुई थी। उसे 2014 तक पहचाना नहीं जा सका। लेकिन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लांच किया गया।

हरियाणा : प्रदूषण की रफ्तार थामने के लिए सरकार ने कसी कमर, 20 हजार मशीनें की वितरितharyana 20 thousand machines distributed farmers punjab

सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राजधानी में बढ़ने वाले प्रदूषण की रफ्तार थामने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। बीते कुछ वक्त में किए गए प्रयासों की वजह से दल्लिी में साफ हवा वाले दिनों में इजाफा हुआ है। यहां सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रदूषण को लेकर पांच राज्यों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक कर राजधानी के मुद्दे को लेकर चर्चा की गई।

पराली से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए सरकार ने 20 हजार से अधिक मशीनें पंजाब और हरियाणा के किसानों को वितरित की हैं। इनकी कीमत करीब 1150 करोड़ रुपये है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के प्रयासों से दिल्ली-एनसीआर में अच्छी हवा वाले दिनों में इजाफा हुआ है। बोर्ड की 46 टीमें प्रदूषण की निगरानी कर रही हैं और हम तमाम जरुरी कदम उठा रहे हैं।

अप्रैल 2020 से बीएस-6 लागू

इस क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या 2006 से शुरु हुई थी। उसे 2014 तक पहचाना नहीं जा सका। लेकिन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लांच किया गया। आज 113 निगरानी स्टेशन दिल्ली-एनसीआर में हैं।

29 और जल्द ही लगाए जाएंगे। साफ हवा को लेकर 30 सितंबर 2019 तक 273 दिन अच्छे और संतोषजनक थे और 165 मध्यम थे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि ईंधन के मामले में बीएस-6 एक क्रांतिकारी कदम है।

इससे उत्सर्जन से जुड़े हुए 80 फीसदी कारक तत्वों में कमी आएगी। जबकि बीएस-4 से यह 30 प्रतिशत घटेगा। बीएस-6 की ओर बढ़ने के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अभी बीएस-4 लागू है। बीएस-6 वाला पेट्रोल, डीजल पहले से दिल्ली-एनसीआर में मौजूद है।

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