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खरीदी हुई दुल्हनों से वंश बढ़ा रहे हरियाणावी, खरीदी दुल्हनों का आंकड़ा एक लाख तीस हजार के पार

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चला कर बेटियों को कोख में मारने का कलंक धोने में जुटे हरियाणा की एक और कड़वी सच्चाई है। जहां इस समय एक लाख 30 हजार परिवार ऐसे हैं जिनमें दुल्हनें पड़ोसी राज्यों से खरीद कर लाई गई हैं।

खरीदी हुई दुल्हनों से वंश बढ़ा रहे हरियाणावी, खरीदी दुल्हनों का आंकड़ा एक लाख तीस हजार के पार

हरियाणा के हार्ट के नाम से प्रसिद्ध जींद जिला की 48 वर्षीय संतरा देवी औकी 32 वर्षीय नीतू की कहानी एक समान है। एक को वर्षों पहले संपत्ति विवाद सुलझाने के लिए पश्चिम बंगाल से 20 हजार रुपये में खरीद कर हरियाणा लाया गया था और दूसरी को दो माह पहले एक नौजवान ने एक लाख 60 हजार रुपये में खरीदकर लाया है। अब दोनों का घर हरियाणा है और अंतिम समय तक यही रहेंगी।

यह बॉलीवुड की किसी मसाला फिल्म की कहानी नहीं बल्कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चला कर बेटियों को कोख में मारने का कलंक धोने में जुटे हरियाणा की एक और कड़वी सच्चाई है। जहां इस समय एक लाख 30 हजार परिवार ऐसे हैं जिनमें दुल्हनें पड़ोसी राज्यों से खरीद कर लाई गई हैं। सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन संस्था द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार हरियाणा में एक लाख 30 हजार के करीब ऐसे परिवार हैं जहां दूसरे प्रदेशों से बहुएं लाई गई हैं।

इनमें 90 फीसदी खरीदकर लाई गई हैं। संस्था द्वारा जुलाई 2017 जुलाई 2019 तक दिल्ली, पंजाब व हरियाणा के कई विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा करवाए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि यह महिलाएं संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा अलग होने के बावजूद करीब डेढ़ लाख परिवारों का घर रोशन किए हुए हैं। दूसरे प्रदेशों से लाई जाने वाली बहुओं को सम्मान दिलाने के लिए संस्था ने परदेशी बहु, म्हारी शान अभियान शुरू किया है जिससे मोल की बहुएं, भगोड़ी बहुओं का कलंक इन पर से हटाया जा सके।


सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के संचालक सुनील जागलान ने बताया कि दशकों पहले शुरू हुई यह परम्परा आज भी जारी है। इन्हें गांवो में मोल की बहुएं कहा जाता है। सर्वे के अनुसार हरियाणा में सबसे पहले गुरुग्राम व रेवाड़ी क्षेत्र में इस परम्परा की शुरूआत हुई। इसके बाद रोहतक, जींद, सोनीपत, हिसार, कैथल, झ'जर, यमुनानगर, कुरूक्षेत्र में मोल की लाई गई बहुओं का प्रतिशत दक्षिण हरियाणा के बाद आता है।

शुरुवाती दौर में बंगाल से बहुएं आती थी लेकिन अब बिहार, उत्तर प्रदेश, नोर्थ ईस्ट के असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड से भी बहुएं हरियाणा में लाई जाने लगी हैं। इस सर्वे में लेडी इरविन कालेज दिल्ली, हिंदू कालेज नार्थ दिल्ली, हरियाणा के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय तथा पंजाब के कुछ विश्वविद्यालयों के करीब 125 छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इन विद्यार्थियों ने बाकायदा प्रोजेक्ट बना कर इस पर काम किया। इसके अलावा संस्था द्वारा सोशल मीडिया पर मिशन पॉसिबल अभियान चला कर इन बहुओं की जानकारी जुटाई गई। हरियाणा के हर जिले से यह आंकड़े जुटाए गए है।

अंतरजातीय शादियों को भी मिल रहा बढ़ावा

गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान के अनुसार कई बार दूसरे प्रदेशों से बहुएं लाने को लेकर लोग धोखे को शिकार हो जाते हंै। शादी के नाम पर उनको ठगा जाता है और उनसे मोटी रकम वसूल कर ली जाती है। इन शादियों का पंजीकरण बेहद जरूरी है। मैरिज रजिस्ट्रेशन करके उसे आधार कार्ड से जोड़ा जाए ताकि कोई व्यक्ति धोखे को शिकार न हो सके।

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