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राज्यपाल ने MDU कार्यकारी परिषद के चार सदस्य मनोनीत किये

आयोग के अतिरिक्त सचिव डॉ. देव स्वरूप को स्थान मिला है। ईसी के ये पद सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के चलते खाली हुए थे।

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हरिभूमि न्यूज. रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने मदवि ईसी के चार सदस्य मनोनीत किए हैं। इनमें से एक सदस्य को दोबारा से कार्यकारी परिषद का सदस्य बनाया गया है। जबकि तीन नए सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। दोबारा से जिम्मेदारी भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर की कुलपति प्रो. सुषमा मिली है। इसके अलावा ईसी में केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र कुहाड़, डीडीएफ कन्सलटेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रो. अमित कुमार बोस, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अतिरिक्त सचिव डॉ. देव स्वरूप को स्थान मिला है। ईसी के ये पद सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के चलते खाली हुए थे। इधर गत बृहस्पतिवार को मदवि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने प्रो. नीना सिंह को अस्थाई डीन एकेडमिक एफेयर्स की जिम्मेदारी दी है। प्रो नीना सिंह ही गत 3 जनवरी से इस पद पर अस्थाई रूप से कार्य रही थी।

कुलपति की बजाय ईसी सदस्य मनोनीत

बताया जा रहा है कि डॉ. देव स्वरूप ही महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के लिए कई माह तक दौड़ धूप करते रहे। लेकिन प्रदेश सरकार ने गत 20 फरवरी को प्रो. राजबीर सिंह को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी दी। प्रो. सिंह ही गत एक साल से कार्यवाहक वीसी के रूप में कार्य कर रहे थे। प्रो राजबीर सिंह के लम्बे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने कुलपति नियुक्त किया। क्योंकि एमडीयू प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विश्वविद्यालय में से एक हैं। ऐसे में अनुभवी व्यक्ति को ही जिम्मेदारी सौंपा जाना जरूरी था।

प्रो. नीना सिंह स्थाई डीन नियुक्त

भूगोल विभाग की प्रो. नीना सिंह को विश्वविद्यालय ने गत तीन जनवरी को अस्थाई डीन अकेडमिक अफेयर नियुक्त किया था। प्रो. सिंह को यह जिम्मेदारी प्रो. अजय राजन के स्थान पर दी गई थी। क्योंकि प्रो. राजन का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। 28 दिसम्बर 2019 को उनका आप्रेशन किया गया था। इसके बाद से उन्होंने 27 फरवरी तक की छुट्टी ली हुई थी। बताया जा रहा है कि प्रो. राजन ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कुलपति डीन अकेडमिक अफेयर का कार्यभार दोबारा से लेने में असर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद ही प्रो नीना सिंह को स्थाई डीन नियुक्त किया।

20 सितम्बर तक बनी रहेंगी पद पर

प्रो नीना सिंह 30 सितम्बर 2020 को सेवानिवृत हो रही हैं। ऐसे में सात महीने के बाद विश्वविद्यालय को एक नए डीन अकेडमिक अफेयर की तलाश करनी पड़ेगी। यूनिवर्सिटी में डीन काफी महत्वपूर्ण पद है। कुलपति के बाद डीन ही सर्वेसर्वा होता है। प्रोटोकॉल की दृष्टि से कुल सचिव विश्वविद्यालय में दूसरे स्थान पर होते हैं। लेकिन शैक्षणिक मामलों में अगर कोई निर्णय लिया जाता है तो डीन अकेडमिक अफेयर को तरजीह दी जाती है।

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