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बेटे के ससुराल से परेशान होकर ससुर ने की आत्महत्या, 2 महीने पहले पुलिस से लगाई थी सुरक्षा की गुहार

शादी के बाद से ही उसकी पत्नी व उसके माता-पिता उसके पुत्र व उसे तरह-तरह से परेशान कर रहे थे कि वह अपनी तमाम संपत्ति उसके नाम कर दे। उसने यह सब करने से मना कर दिया था, जिस पर उन्होंने उन्हें धमकी दी थी कि वे उसके व उसके पुत्र तथा अन्य के खिलाफ दुष्कर्म व अन्य आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करा देंगे।

प्रतीकात्मक फोटोप्रतीकात्मक फोटो

पुत्र के ससुराल पक्ष द्वारा ससुर, पति व अन्य के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व दुष्कर्म करने का मामला दर्ज होने पर ससुर ने खुद को निर्दोष बताते हुए लोक-लाज के भय से विषैले पदार्थ का सेवन कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर डाली है।

हालांकि दो माह पूर्व ससुर ने गुड़गांव पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी कि उसे अपने पुत्र के ससुराल पक्ष से अपनी जान-माल और इज्जत का खतरा है, इसलिए उसे पुलिस संरक्षण दिया जाए, लेकिन उसकी इस गुहार पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी, जिसके चलते उसने यह कदम उठा लिया।

मृतक की अधिवक्ता डा. अंजूरावत नेगी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के गांव इस्लामपुर के विजेंद्र ने इस वर्ष 22 जुलाई को पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर गुहार लगाई थी कि उसके पुत्र की शादी मथुरा यूपी में इस वर्ष 16 अप्रैल को हुई थी।

शादी के बाद से ही उसकी पत्नी व उसके माता-पिता उसके पुत्र व उसे तरह-तरह से परेशान कर रहे थे कि वह अपनी तमाम संपत्ति उसके नाम कर दे। उसने यह सब करने से मना कर दिया था, जिस पर उन्होंने उन्हें धमकी दी थी कि वे उसके व उसके पुत्र तथा अन्य के खिलाफ दुष्कर्म व अन्य आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करा देंगे।

अधिवक्ता का कहना है कि इसी को देखते हुए विजेंद्र ने पुलिस आयुक्त से गुहार लगाई थी कि उसे पुलिस संरक्षण दिया जाए, ताकि वह और उसका परिवार ससुराल पक्ष की कार्यवाही से बच सके। हालांकि ससुराल पक्ष ने गत 17 सितम्बर को मथुरा के कोसीकला पुलिस थाना में दुष्कर्म व अन्य आपराधिक धाराओं में विजेंद्र व उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था।

कुछ दिन पूर्व मथुरा पुलिस क्षेत्र के सदर थाना पुलिस के साथ विजेंद्र के घर भी आई थी और उसे धमकी दे गई थी कि वह एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण कर दे, अन्यथा पुलिस कार्यवाही करेगी। गत दिवस विजेंद्र ने कोसीकलां थाना में दर्ज हुए आपराधिक मामले में खुद व परिवार को निदार्ेष बताते हुए उत्तरप्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व पुलिस के उच्चाधिकारियों को पत्र भी भेजे थे।

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