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हरियाणा : किसानों के लिए बाजरा बना आफत, औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर

पहली समस्या तो ये है कि बाजरे की पैदावर एक एकड़ में 12 क्विंटल तक होती है, जबकि सरकार सिर्फ 8 क्विंटल ही खरीद रही है। उसके बावजूद भी किसानों को दो क्विंटल तक के पास जारी किए जा रहे हैं।

Farmers worried about millet Not getting fair priceFarmers worried about millet Not getting fair price

महम क्षेत्र के किसानों के लिए बाजरा बेचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकार के निर्देशानुसार किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया गया है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी विभाग के रिकॉर्ड में गलती होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया गया है, लेकिन पटवारियों के हस्तक्षेप से उसमें फेरबदल किए जाने से उनको भारी मुसीबत हो रही है।

बाजरा बेचने में आने वाली परेशानी में मुख्यमंत्री के गांव निंदाना के किसान मुख्य रूप से फंसे हुए हैं। बाजरा बेचने आए अजय नहरा, कृष्ण, धौला राठी, रमेश, बबला, लीला, सुनेहरा, अनिल आदि का कहना है कि सरकार की ओर से 2000 रुपये प्रति क्विंटल बाजरे की खरीद निर्धारित की गई है। इसके लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। आरोप है कि उन्होने ऑनलाइन करनाने के बाद भी जब वे बाजरा बेचने के लिए मंडी में आए तो गेट पास जारी करने वाले अधिकारियों ने उनको कम बाजरे के गेट पास दिए।

उन्होने बताया कि पहली समस्या तो ये है कि बाजरे की पैदावर एक एकड़ में 12 क्विंटल तक होती है, जबकि सरकार सिर्फ 8 क्विंटल ही खरीद रही है। उसके बावजूद भी किसानों को दो क्विंटल तक के पास जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में उनके पास सस्ते दामों में बेचने के अलावा कोई चारा नहीं है। उनका कहना है कि वे पिछले कई दिनों से मंडी में बाजरा डाले बैठे हैं। सरकार द्वारा खरीद न किए जाने के कारण उनको ओने पोने दामों में बाजरा बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

इस बारे में मार्किटिंग बोर्ड की सचिव ज्योति धनखड़ का कहना है कि निंदाना गांव में चकबंदी का कार्य किया जा रहा है। उनका ऑनलाइन रिकार्ड नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि इस तरह के और भी हरियाणा में भी कुछ गांव हैं, जिसमें ऐसी समस्या है। इस बारे में उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। जैसा भी आदेश होगा अमल में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक ऊपरी आदेश नहीं मिल जाते तब तक वे कुछ नहीं कर सकते। उन्होने बताया कि इसके अलावा कोई समस्या नहीं है, एजेंसियों द्वारा महम की मंडी में अभी तक 363 मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की जा चुकी है।

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