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गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग को लेकर आज शुगर मिल महम में गरजेंगे किसान

रोहतक में गन्ने का रेट बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और भुगतान 14 दिन में सुनिश्चित करवाने समेत आठ मांगों को लेकर शनिवार को किसान महम शुगर मिल में गरजेंगे।

भारतीय गन्ना नीति के खिलाफ डब्लूटीओ में ब्राजीलगन्ना (प्रतीकात्मक फोटो)

रोहतक में गन्ने का रेट बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और भुगतान 14 दिन में सुनिश्चित करवाने समेत आठ मांगों को लेकर शनिवार को किसान महम शुगर मिल में गरजेंगे।किसान सभा के जिला सचिव बलवान सिंह ने बताया कि गन्ना का रेट बढ़वाने व अन्य मांगों को लेकर उनका संगठन अभियान चलाए हुए हैं। इसी कड़ी में 25 जनवरी को महम शुगर मिल में किसान पंचायत होगी। उन्होंने बताया कि ऐसी ही पंचायत रोहतक मिल में आयोजित की जा चुकी है। पंचायत को लेकर शुक्रवार को सभा ने जनसम्पर्क अभियान चलाया। महम शुगर मिल क्षेत्र में आने वाले गांवों में पहुंचकर किसान सभा के पदाधिकारियों ने किसानों को पंचायत का न्यौता दिया।

सरकार नहीं दे रही ध्यान

सचिव बलवान सिंह ने कहा कि गन्ना पैदा करने वाले किसानों की मांगों की तरफ सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। इसी वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अपनी फसल लेकर किसान मिल में पहुंचते हैं, पर वहां किसानों के लिए न तो पर्याप्त ठहरने व सोने की व्यवस्था है। स्नान घर शौचालय खराब हालत में हैं। ऐसे में किसानों को कैंटीन में रात गुजारनी पड़ती है।

किसान के हालात किए खराब

जिला अध्यक्ष प्रीत सिंह ने बताया कि मिल प्रशासन का इस और कोई ध्यान नहीं है। देश को अन्न पैदा कर देने वाला किसान की हालत को और खराब किया जा रहा है। पहले मिल में गन्ना डालने वाले किसानों को कंट्रोल रेट पर चीनी मिलती थी। उसे भी बंद कर दिया गया। गन्ने का रेट बढ़े 7 साल हो चुके हैं। जबकि मंहगाई बढ़ चुकी है तो गन्ने का रेट क्यों नहीं बढ़ाये जा रहे । महा सचिव ने बताया कि किसानों को 335 व 340 रुपये प्रति क्विंटल का रेट सरकार दे रही है।

ये हैं प्रमुख मांग

-शुगर मिलों में किसानों के ठहरने के लिए कमरे व बिस्तरों का प्रबंध हो

-कंट्रोल रेट पर किसानों को चीनी देने की स्कीम पुनः शुरू की जाए

- किसान रंगराजन कमेटी की सिफारिशों को हटाया जाए तथा एमएसपी पर गन्ने की खरीद हो

- शुगर मिल रोहतक में चल रहे फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए

- मिलों में कार्यरत श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा हो

- मिलों की क्षमता और संख्या बढ़ाई जाए।



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