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भू-अधिग्रहण मुद्दे पर किसानों की केंद्र को चुनौती, उचित मुआवजा नहीं तो नहीं देंगे जमीन

इससे पहले प्रदेश के अंदर सभी धरने लगभग 15 दिन तक ही सीमित रहे है।

भू-अधिग्रहण मुद्दे पर किसानों की केंद्र को चुनौती, उचित मुआवजा नहीं तो नहीं देंगे जमीन
कैथल. तितरम मोड़ पर जमीन अधिग्रहण को लेकर चल रहे किसानों के धरने ने प्रदेश के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए है। सोमवार को इस धरने का 36वां तथा आमरण अनशन का 22वां दिन रहा। इससे पहले प्रदेश के अंदर सभी धरने लगभग 15 दिन तक ही सीमित रहे है।
धरना समिति के सदस्य सुलतान सिंह व किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि सरकार के साथ फैसला हो या न हो 30 अगस्त को तितरम मोड़ पर प्रदेश के किसानों की एक महापंचायत होगी।
जिसके लिये किसानों ने तैयारियां करनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार या तो सही मुआवजा दे वरना किसान अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े। धरने में महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला हुआ था।
27 तक का अल्टीमेटम -
धरना समिति के सदस्यों ने बताया कि सरकार के संदेश वाहक ने किसानों को मुख्यमंत्री के साथ वार्ता का समय 27 अगस्त का अल्टीमेटम दिया हुआ है।
यदि यह वार्ता सफल होती है तो महापंचायत में सरकार का धन्यवाद किया जाएगा और यदि वार्ता विफल रहती है तो अन्तिम दौर की आरपार की लड़ाई सरकार के साथ लड़ी जायेगी।
आज देश का अन्नदाता आमरण अनशन पर बैठा है और सरकार को किसानों की बिल्कुल भी चिंता नही है। धरने पर बैठे धरती पुत्रों का वजन तेजी से घट रहा है जो चिंता का विषय है।
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