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अपना घर मामला: नौ दोषियों की सजा पर सबकी नजर, बच्चियों को मिलेगा न्याय

बहुचर्चित अपना घर मामले में शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी। जिन बच्चियों पर जुल्म ढहाए गए थे, उन्हें सजा का बेसब्री से इंतजार है।

अपना घर मामला: नौ दोषियों की सजा पर सबकी नजर, बच्चियों को मिलेगा न्याय
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रोहतक के बहुचर्चित अपना घर मामले में शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी। जिन बच्चियों पर जुल्म ढहाए गए थे, उन्हें सजा का बेसब्री से इंतजार है। छह साल में 121 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, 62 बच्चों और 65 महिलाओं की डॉक्टरी जांच की गई, सीबीआई की अदालत में सुनवाई हुई, तब जाकर जसवंती और उसके सहयोगियों को आज सजा का ऐलान होगा।

इस मामले में 18 अप्रैल को जसवंती समेत 9 लोगों को दोषी करार दिया गया था। पूर्व बाल विकास परियोजना अधिकारी अंग्रेज कौर हुड्डा को बरी कर दिया गया था। जिन बच्चियों को हवस का शिकार बनाया गया था, उनकी गवाही ने आरोपितों को दोषी साबित करने में अहम भूमिका निभाई। 10-12 बच्चियों और युवतियों ने गलत काम कराए जाने की गवाही दी थी।

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उन्होंने अपना घर के सारे माहौल के बारे में बताया। इस केस में बाद में जय भगवान और सतीश पर गैंगरेप की धाराएं जोड़ी गई थीं।

ऐसे हुआ खुलासा

अपना घर में हो रहे जुल्म से बचकर तीन लड़कियां भाग गई थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कस्टडी में बाल संरक्षण आयोेग के समक्ष यहां होने वाले कारनामों का खुलासा किया था। इसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम ने 8 मई 2012 की रात को रोहतक के अपना घर में छापा मारा था। यहां से 103 बच्चियों-युवतियों को छुड़ाया गया। तभी खुलासा हुआ कि यहां बच्चियों-युवतियों का शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है। जून 2012 को मामल सीबीआई को सौंप दिया। 30 मार्च को पंचकूला की सीबीआई में एक पीडि़ता ने डांस पार्टियों में भेजने का खुलासा किया था।

पानीपत और हांसी भेजी थी बच्चियां

2012 में खुलासा होने के बाद अपना घर में मिली बच्चियों और महिलाओं को पानीपत के बिंझोल स्थित अनाथालय में भिजवा दिया गया था। वहीं कुछ को हांसी के अनाथालय में भिजवाया था।

इंदिरा गांधी महिला शक्ति पुरस्कार

जसवंती को वर्ष 2011 में इंदिरा गांधी महिला शक्ति पुरुस्कार से भी नवाजा जा चुका है। मदवि के ऑडिटोरियम में 26 मार्च को यह पुरस्कार दिया गया था। 15 अगस्त को प्रशासन ने सम्मानित भी किया था। खुलासा होने के बाद सभी सम्मान वापस ले लिए गए थे।

इन्हें होगी सजा

जसवंती, भाई जसवंत सिंह, बेटी सुषमा उर्फ सिमी, दामाद जयभगवान, ड्राइवर सतीश और शीला को दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म, मानव तस्करी का दोषी पाया गया। इसके अलावा वीना को मंजूरी के बिना गर्भपात करवाने, क्रूरतापूर्ण तरीके से श्रम कराने का दोषी पाया गया। रोशनी को अपना घर में पैदा हुए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया। उसमें खुद को मां बताया। राम प्रकाश सैनी ने बच्चों से काम करवाने और उन्हें भुगतान नहीं करने का दोषी ठहराया गया।

बदले हुए पोस्को एक्ट के अनुसार सजा हुई तो

हाल ही में पोस्को एक्ट में बदलाव किया गया है। अगर बदले हुए पोस्को एक्ट के तहत सजा हुई तो फांसी भी हो सकती है। जसवंती के सहयोगियों को भी बराबर की ही सजा होगी। कम से कम 10 साल सजा का प्रावधान तो पहले से ही है।

मोहित वर्मा, एडवोकेट, रोहतक

मुझे पूरापता नहीं कि क्यां धाराएं लगी हुई हैं। लेकिन ऐसे मामलों में कम से कम आजीवन कारावास सजा हो सकती है। बेल मिलने के चांस तो है ही नहीं। जितने दिन दोषियों ने जेल में गुजारे हैं, कुल सजा में से वे कम हो जाएंगे।

दीपक कुंडू, एडवोकेट, रोहतक

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इन्होंने पुलिस की लाठियां खाई

2012 में जसवंती और उसके सहयोगियों को सजा दिलवाने की मांग को लेकर जनवादी महिला समिति ने रोहतक में प्रदर्शन किया था। इस दौरान जब महिलाएं नारेबाजी करती हुई, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर की ओर बढ़ रहीं थी तो पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज कर दिया था। इसमें रामकली को गंभीर चोट आई थी। समिति की सविता और जगमति सांगवान ने बताया कि जसवंती और उसके सहयोगियों को सजा दिलवाने के लिए हमने कड़ा संघर्ष किया है। उन्हें सख्त सजा होनी चाहिए।

शारीरिक शोषण ऊपर से भूखा भी रखा जाता था

बच्चियों और महिलाओं ने गवाही में बयान दर्ज करवाए थे कि कई बच्चियों का शरीरिक शोषण बाहर के लोग करते थे। मना करने पर उन्हें भूखा भी रखा जाता था, मारपीट की जाती थी।

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