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हरियाणा : चिटाने वाली माता की मूर्ति को लेकर विवाद बढ़ता, पहुंचा प्रशासन के पास

चिटाने वाली माता की दूर-दराज तक मान्यता है। यहां दूर-दूर से भक्तजन आते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। शहर की संस्था चढ़ावे का कोई हिसाब किताब नहीं दे पाई है।

हरियाणा : चिटाने वाली माता की मूर्ति को लेकर विवाद बढ़ता, पहुंचा प्रशासन के पासdispute for goddes statue sonipat

चिटाने वाली माता की मूर्ति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। गांव चिटाना वासियों ने ऐलान किया है कि माता हमारी कुलदेवी है, यहीं रहेगी। इसको लेकर पूरा गांव एकजुट है। वहीं दूसरी तरफ माता की मूर्ति न लौटाने से बिफरी शहर की सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने माता को लौटाकर लाने के लिए पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपील की है कि माता की मूर्ति परंपरा के अनुसार शहर में लाने का प्रबंध किया जाए। माता चिटाना वाली की मूर्ति स्थापना को लेकर दोनों पक्षों को तनाव बढ़ता दिख रहा है। जिसे देखते हुए पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है। थाना शहर पुलिस प्रभारी ने सामाजिक संस्थाओं की शिकायत पर ग्रामीणों को मंगलवार को थाने में पहुंचने को कहा, लेकिन ग्रामीणों ने आने से साफ इंकार कर दिया।

ग्रामीणों ने की बैठक-किसी कीमत पर नहीं जाने देंगे माता की प्राचीन मूर्ति

गांव चिटाना पहुंची माता की पवित्र व प्राचीन मूर्ति को भव्य मंदिर में स्थापित करने के बाद गांव में दूसरे दिन सोमवार को भी बैठक का दौर जारी रहा। बैठक में पूरे गांव से ग्रामीण एकजुट रहे। सभी ने एकमत होकर निर्णय लिया कि वे किसी कीमत पर माता की पवित्र व प्राचीन मूर्ति को अब गांव से नहीं जाने देंगे।

चढ़ावे के हिसाब-किताब को लेकर बिगड़ी स्थिति

ग्रामीणों ने बताया कि चिटाने वाली माता की दूर-दराज तक मान्यता है। यहां दूर-दूर से भक्तजन आते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। शहर की संस्था चढ़ावे का कोई हिसाब किताब नहीं दे पाई है। गांव में सप्तमी के दिन लगे मेले में 39 लाख से ज्यादा का दान आ चुका है, जबकि शहर में हर बार दान के रूप में होने वाली मंदिर की आमदनी बेहद कम बताई जाती है। यही नहीं माता चिटाने वाली के नाम से प्रसिद्ध है तो इनका स्थल भी गांव चिटाना में ही होना प्रासंगिक है।

ग्रामीणों ने मंदिर में शुरू किया पहरा

ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर दोपहर बाद पंचायत बुलाई। जिसमें निर्णय लिया गया कि माता की पवित्र मूर्ति को अब नहीं जाने देंगे। ग्रामीणों ने प्राचीन मूर्ति को लेकर मंदिर में पहरा शुरू कर दिया है। ट्रस्ट के चैयरमैन अनिल कुहाड़, उप प्रधान बिजेंद्र लाकड़ा, गांव की सरपंच मुकेश देवी, सचिव नरेंद्र वर्मा, मातुराम सुनेहरी, जोगेंद्र कुहाड़, दिनेश भारद्वाज, समुंद्र, कृष्ण दत्त, रामफल, जयदीप कुहाड़, दीपक पंडित, अमित कुहाड़, जतिन, जितेंद्र सोलंकी, दीपक, मास्टर राम स्नेही, लाला प्रेम चंद गोयल, पूर्ण, जयपाल कुहाड़ सहित अन्य ने बताया कि वे अब 24 घंटे मंदिर में पहरे पर रहेंगे।

यह है मामला

सोनीपत में चिटाने वाली माता की काफी मान्यता है और दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। प्राचीन परंपरा के अनुसार नवरात्रों में षष्ठी तिथि के रात शहर के छोटा हलवाई हट्टा मंदिर से माता चिटाना की प्राचीन मूर्ति गांव चिटाना में जाती है और सप्तमी व अष्टमी को वहां मेला लगता है। अष्टमी की रात वापिस हलवाई हट्टा स्थित मंदिर में पहुंचती है, लेकिन इस बार चिटाना के ग्रामीणों ने मंदिर में पहुंची माता की मूर्ति को वापस भेजने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने इसको लेकर तर्क दिया कि माता चिटाने वाली की प्राचीन मूर्ति को केवल स्थान के अभाव में ही शहर में स्थापित किया गया था, लेकिन अब गांव में भव्य

मंदिर का निर्माण हो चुका है। ऐसे में अब माता यहीं रहेंगी। वहीं दूसरी तरफ शहर की देवी जी चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई और माता की मूर्ति को वापस लाने की मांग को लेकर एसपी दरबार में अपील की। एसपी के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पदाधिकारियों व अन्य शहरवासियों ने कहा कि 250-300 साल पुरानी परंपरा के अनुसार षष्ठी की रात को सोनीपत से चलकर माता चिटाने गांव में रात दो बजे पहुंच जाती थी और अष्टमी को 12 बजे वापस शहर के छोटा हलवाई हट्टा मंदिर में पहुंच

जाती थी, लेकिन इस बार ग्रामीणों ने इंकार कर दिया। इस परंपरा को कायम रखने के लिए माता की मूर्ति को वापस लाने के प्रबंध किया जाए। संस्था के पदाधिकारियों ने इस मामले की शिकायत एसडीएम व उपायुक्त को भी दी है।

गांव के भव्य मंदिर में विराजमान रहेंगी माता

गांव चिटाना से माता चिटाने वाली सिद्धपीठ ट्रस्ट के प्रधान शशीकांत भारद्वाज ने बताया कि 300-400 साल पहले गांव में ही खुदाई के समय माता की मूर्ति निकली थी। उस समय जोहड़ के पास माता का स्थल बना था, लेकिन बार-बार पानी जमा होने के कारण स्थल खंडित हो जाता था। जिस कारण माता को शहर के हलवाई हट्टे के मंदिर में स्थापित किया गया था, लेकिन अब गांव में माता का भव्य मंदिर बन चुका है। ऐसे में माता अब यहीं विराजमान रहेंगी।

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