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मछलियां की जान बचाने के लिए दोस्तों को कर दीं गिफ्ट, तोते और चिड़ियां की घर पर कर रहे देखभाल

लोक डाउन के चलते मछलियों व पक्षियों का कारोबार करने वाले ने मछलियां दोस्तों को दे दी हैं ताकि उनकी जान बचाई जा सके वहीं पंछियों की घर पर लाकर देखभाल करनी शुरू कर दी है।

मछलियां की जान बचाने के लिए दोस्तों को कर दीं गिफ्ट, तोते और चिड़ियां की घर पर कर रहे देखभाल

हरिभूमि न्यूज। मनोज वर्मा

लॉक डाउन के असर से पशु पक्षी भी अछूते नहीं। जो आजाद हैं, उनके लिए इस समय प्रकृति किसी वरदान से कम नहीं। शुद्ध हवा चल रही है प्रदूषण है ही नहीं, लेकिन उनका क्या जो बेचने के लिए स्टोर में रखे हैं। रोहतक में जाट भवन के पास फिश स्टोर चलाने वाले गौरव जुनेजा चिंतित थे कि उनके पास जो मछलियां हैं, अन्य पक्षी हैं, उनका क्या होगा। गौरव के पास गोल्ड फिश, हर्ट फिश समेत कई प्रजातियों की 100 मछलियां थी। लॉक डाउन के दौरान वे भूख से ना मरें इसलिए उन्होंने सभी मछलियां गिफ्ट कर दी, ताकि वे जीवित रहें। तोते, आस्कर, चिड़ियां और अन्य 15 पक्षियों को अपने घर ले गए और वहीं उनकी देखभाल कर रहे हैं।

गौरव बताते हैं कि 15 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा के बाद उन्होंने अपने पहचान वालों को फोन कर दुकान पर बुलाया और मछलियां उन्हें दे दी ताकि वे इसकी देखभाल करें और इनकी जिंदगी बच जाए। उन्होंने मछलियां गिफ्ट की हैं।

बिना देखभाल 3 दिन रहती हैं जीवित

गौरव बताते हैं कि मछलियों को रोजाना दो समय भोजन दिया जाता है। इसके अलावा फिश टैंक का पानी बदलने सहित कई सावधानियां बरतनी पड़ती हैं, ताकि मछलियां स्वस्थ रह सकें। अगर देखभाल करते हुए भी कोई मछली मर जाती है तो उसे तुरंत बाहर निकाल दिया जाता है, ऐसा न करने पर अन्य मछलियां बीमार हो जाती हैं और मर भी सकती हैं। अगर वे अपने पहचान वालों को मछलियां गिफ्ट नहीं करते तो मछलियां जिंदा न बचती।

घर ले आए हैं मछलियों का खाना

गौरव ने बताया कि उनके पास मछलियों का खाना भी होता है। लॉकडाउन की घोषणा के बाद वे मछलियों का खाना अपने साथ घर लेकर आ गए। ऐसा इसलिए किया क्योंकि इन दिनों दुकान तो खुलेगी नहीं और उनके जो ग्राहक हैं जो मछलियों का खाना ले जाते हैं उन्हें वो कहां से उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि अब सभी ग्राहक उनके घर आकर मछलियों का खाना ले जाते हैं। वहीं उन्होंने ये भी बताया कि एक ऐसी गोली भी होती है जिसे पानी में डालने से वो उसमें घुल जाती है और मछलियां एक सप्ताह उस पानी में जीवित रह सकती हैं। ये एक प्रकार से ग्लूकोज का काम करती है।

गौरव ने कहा कि वे काफी समय से इस व्यापार में हैं। लॉकडाउन के बाद उन्होंने अपने उन पहचान वालों को फोन किया जिनके पास फिश टैंक है, ताकि वे उसमें मछलियों को रखकर उनकी सही तरीके से देखभाल कर सकें। साथ ही उन्हें मछलियों का भोजन भी उपलब्ध करवा दिया।

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