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आइडल लाइनों पर ठेकेदारों का डाका, पुराने बिजली के तार व पोल बेच रहे ठेकेदार

बिजली निगमों ने अब उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन जारी करने का ठेका निजी लोगों को दिया हुआ है। इन ठेकेदारों को नए कनेक्शन जारी करने के लिए अपनी ओर से बिजली के तार व पोल खुद के खर्च पर खरीदने होते हैं।

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बिजली निगमों की आइडल लाइनों पर ठेकेदार जमकर डाका डाल रहे हैं। निगमों की बेकार हुई लाइनों के लाखों रुपये के तार व खंभे नए कनेक्शनों में यूज करने का फंडा काफी समय से चल रहा है। बिजली निगम अपनी बेकार लाइनों के तार व खंभों के प्रति जरा भी गंभीर नहीं हैं। इससे निगमों को लाखों रुपये का नुक्सान हो रहा है, जबकि ठेकेदारों की जेब तेजी से गर्म हो रही है।

दोनों निगमों की ओर से करीब 6 साल पूर्व हाई वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम शुरू किया गया था, ताकि डोमेस्टिक कंज्यूमर को कृषि क्षेत्र की अपेक्षा ज्यादा बिजली उपलब्ध कराई जा सके। प्रदेश के 90 फीसदी से अधिक गांवों में यह सिस्टम शुरू हो गया था। कई गांवों में यह सिस्टम आंशिक रूप से ही लागू किया गया है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद से लाखों बिजली के खंभे व हजारों किलोमीटर दूरी के तार नकारा हो चुके हैं।

इन तारों व खंभों को बेचकर निगम लाखों रुपये कमा सकते हैं, लेकिन दोनों ही निगमों की ओर से ऐसा नहीं किया गया है। बिजली निगमों ने अब उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन जारी करने का ठेका निजी लोगों को दिया हुआ है। इन ठेकेदारों को नए कनेक्शन जारी करने के लिए अपनी ओर से बिजली के तार व पोल खुद के खर्च पर खरीदने होते हैं। ठेकेदार अपनी जेब गर्म करने के लिए तार व पोल खरीदने की बजाय, निगमों की पुरानी आइडल लाइनों की तलाश में रहते हैं।

इन लाइनों के तार व पोल आसानी से ठेकेदार अपने कब्जे में ले लेते हैं। इसके बाद इन्हें नए कनेक्शनों मेें यूज किया जाता है। इन तारों और पोल का खर्च उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है, लेकिन ठेकेदार इस राशि की वसूली के बाद मुफ्त में इस सामान का इस्तेमाल करते हैं। जहां भी ठेकेदारों को आइडल लाइनें नजर आती हैं, उन लाइनों को हटाकर तार व पोल नए कनेक्शनों में यूज करने का सिलसिला शुरू कर दिया जाता है।

निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर इन तारों व खंभों की नीलामी की जाए, तो दोनों निगमों को इससे लाखों रुपए का राजस्व हो सकता है। निगम अधिकारी इन आइडल लाइनों को पूरी तरह भूल जाते हैं, जिसका फायदा निगम ठेकेदारों को हो रहा है। तार व खभों के अलावा अन्य मैटीरियल को भी ठेकेदार जमकर यूज कर रहे हैं। यह सब निगम अधिकारियों के साथ सांठगांठ से संभव हो रहा है।

निगम के पास नहीं रिकार्ड

निगम के पास इस बात का कोई रिकार्ड ही नहीं होता कि उसके पास कितनी आइडल लाइने हैं। लाइनों का पता नहीं होने का पूरा फायदा इन ठेकदारों को मिल रहा है। पूरी लाइन उखाड़ने के बाद पूरे सबूत ही खत्म हो जाते हैं। निगम को ठेकेदारों की करतूतों के कारण भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा है।

अफसरों के साथ सांठगांठ

निगम सूत्रों के अनुसार नए कनेक्शन जारी करने का ठेका हासिल करने वाले ठेकेदार अफसरों व लाइनमैन के साथ सांठगांठ करने में कामयाब हो जाते हैं। लाइनमैन ठेकेदारों को आइडल लाइनों की जानकारी प्रदान करते हैं। इसके बाद ठेकेदार इन लाइनों का सामान यूज करने का काम करते हैं।

हो जाती है एफआईआर

निगम सूत्रों के अनुसार किसी ऐसे मामले की जांच की बात आती है, तो निगम की ओर से पुलिस थानों में तार व पोल चोरी होने की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस की ओर से इस बात की जानकारी हासिल करने के प्रयास नहीं किए जाते कि चोरी के पीछे हकीकत क्या है।

गायब हुए एक लाख पोल

एचवीडीएस शुरू होने के बाद प्रदेश भर में करीब एक लाख पोल नकारा हो चुके थे। इन पोल पर एल्यूमिनियम के लाखों रुपए के तार भी नए कनेक्शनों में यूज कर लिए गए। इसके बावजूद निगम की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच के नाम पर अभी तक पुलिस ने भी कुछ नहीं किया है।

किसान भी रहते हैं खुश

नए नलकूप कनेक्शन लेने वाले किसानों को ठेकेदारों की ओर से बताया जाता है कि उनके पास पोल व अन्य सामान नहीं है। अगर उनके खेतों के आसपास पुरानी बंद लाइनें हैं, तो उनके सहारे कनेक्शन जारी किया जाता सकता है। इसके बाद किसानों के बताए अनुसार पुरानी लाइनों को गायब कर दिया जाता है।

मुझे लाइनों के तार व पोल गायब होने की जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मनोज कुमार, एसई, बिजली निगम।

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