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सीएम खट्टर का बयान, यमुना नदी पर हथनी कुंड बैराज के नजदीक बनेगा वाटर स्टोरेज डैम

मानसून के दौरान यमुना नदी का व्यर्थ बह जाता है लाखों क्यूसिक पानी। मुख्यमंत्री ने हथनीकुंड बैराज के अपस्ट्रीम पर वाटर स्टोरेज डैम की साइट का लिया जायजा।

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हरिभूमि न्यूज. यमुनानगर। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि मानसून के समय में यमुना नदी का लाखों क्यूसिक पानी व्यर्थ बह जाता है। जिसे नियंत्रित करने के लिए हथनीकुंड बैराज से ऊपर सात किलोमीटर दूर वाटर स्टोरेज डैम बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने योजना तैयार की है। इस डैम के बनने से जहां मानसून के मौसम में यमुना नदी के व्यर्थ बहने वाले पानी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, वहीं, जल पर आधारित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की चारों इकाइयों को भी बिजली उत्पादन करने में लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल मंगलवार सुबह हथनीकुंड बैराज के विश्रामगृह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बैराज के अपस्ट्रीम पर वाटर स्टोरेज डैम की साइट का जायजा लिया। मौके पर उन्होंने आउट प्लान के माध्यम से सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से वाटर स्टोरेज डैम योजना की पूरी जानकारी ली और उन्हें दिशा-निर्देश दिए। मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यमुना नदी पर अभी तक कोई भी वाटर स्टोरेज डैम नहीं बनाया गया है। जिसकी वजह से मानसून के समय में यमुना नदी उफान पर आ जाती है और लाखों क्यूसिक पानी बिना इस्तेमाल के व्यर्थ बह जाता है।

इस पानी को नियंत्रित करके इस्तेमाल किया जा सके इसके लिए सिंचाई विभाग ने वाटर स्टोरेज डैम बनाने के लिए योजना तैयार की है। इस डैम को हथनीकुंड बैराज से ऊपर सात किलोमीटर दूर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यमुना नदी पर किशाऊ डैम और रेणुका डैम बनाए जाने की योजना भी पहले से ही लंबित पड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस डैम के बनने से यमुना नदी के जल पर आधारित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की चारों इकाइयों को भी बिजली उत्पादन करने में लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस योजना को कारगर रुप देने के लिए हिमाचल, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के साथ संयुक्त रुप से यमुना रीवर बोर्ड बनाकर इसे प्रैक्टिकल अमल में लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने डैम की साइट का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री कंवरपाल, विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, नगर निगम के मेयर मदन चौहान, रामेश्वर चौहान, पूर्व राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज, सिंचाई विभाग के एससी देवेंद्र सिंह, इंजीनियर इन चीफ बिरेंद्र सिंह, हरमैल सिंह, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमएल राणा आदि मौजूद थे।

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