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अस्पतालों को मेडिकल दर्जे में ढीली सरकार, भिवानी से रोहतक गया, फिर भी कोबाल्ट बेअसर

चौ. बंसीलाल सामान्य अस्पताल को मेडिकल का दर्जा देने में तो सरकार ने ढील दिखाई ।

अस्पतालों को मेडिकल दर्जे में ढीली सरकार, भिवानी से रोहतक गया, फिर भी कोबाल्ट बेअसर

भिवानी. एशिया के जिला मुख्यालयों में स्थित बड़े अस्पतालों में शुमार चौ. बंसीलाल सामान्य अस्पताल को मेडिकल का दर्जा देने में तो सरकार ने ढील दिखाई ही, इसके साथ-साथ 12 साल पहले स्वीकृत हुआ कैंसर उपचार के लिए कोबाल्ट यूनिट भी रोहतक में चला गया। कारण चाहे जो भी रहे हों, पर अधिकारियों का रवैया भी ढुलमुल सा रहा। भिवानी में वर्ष 2003-04 में कैंसर उपचार का कोबाल्ट यूनिट स्वीकृत किया गया था। इसके लिए जगह का चयन व किरणों को समेटने वाला कक्ष बनाने के लिए सर्वेक्षण भी किया गया। विशेषज्ञ आए और उन्होंने अस्पताल का दौरा भी किया।

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लेकिन साल गुजर गया और कोबाल्ट यूनिट की स्थापना के लिए आई करीब तीन करोड़ रुपये की राशि वापस हो गई। अखबारों में सुर्खियां बनीं तो सवा तीन साल बाद 2007 में कोबाल्ट यूनिट के लिए राशि पुन: स्वीकृत की गई और नए सिरे से कैंसर उपचार के इस संयंत्र को लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। हिसार से कैंसर विशेषज्ञ डॉ. तेजपाल शर्मा को विशेष रूप से भिवानी स्थानांतरित किया गया। डॉ. शर्मा लम्बे समय तक भिवानी में रहे, लेकिन कोबाल्ट यूनिट का काम अधिकारियों की अनदेखी के चलते टस से मस नहीं हुआ।

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डॉ. शर्मा का स्थानांतरण कर दिया गया और कोबाल्ट यूनिट जिस ट्रक में लादकर भिवानी के अस्पताल लाया गया था। उसी ट्रक में उसे रोहतक में यह कहकर भेज दिया गया। कोबाल्ट यूनिट के लिए जो कक्ष बनाया जाना था और व्यवस्था की जानी थी, वह नहीं की गई। भिवानी को एक आधुनिक सुविधा मिलते-मिलते रह गई।

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