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Chaudhary Devi Lal Birth Anniversary : हरियाणा का वो किंग मेकर जिसके इर्द गिर्द ही घूमती रही प्रदेश की राजनीति

देवी लाल को आज भी ऐसे राजनेता के तौर पर याद किया जाता है जिसने कुर्सी से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। इसी क्रम में एक किस्सा याद किया जाता है जब उनके संसदीय दल का नेता चुने जाने पर सभी सहमत थे लेकिन उन्होंने वीपी सिंह को समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनाया।

Chaudhary Devi Lal  Birth Anniversary : हरियाणा का वो किंग मेकर जिसके इर्द गिर्द ही घूमती रही प्रदेश की राजनीति
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हरियाणा राजनीति में किंगमेकर के नाम से प्रसिद्ध चौधरी देवीलाल हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा वीपी सिंह की सरकार में उन्हें उपप्रधानमंत्री भी बनाया गया। देवी लाल को आज भी ऐसे राजनेता के तौर पर याद किया जाता है जिसने कुर्सी से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। इसी क्रम में एक किस्सा याद किया जाता है जब उनके संसदीय दल का नेता चुने जाने पर सभी सहमत थे लेकिन उन्होंने वीपी सिंह को समर्थन देकर संसदीय दल का नेता बनाया।

प्रारंभिक जीवन



25 सितंबर 1914 को चौधरी देवीलाल का जन्म हरियाणा के सिरसा जिले के तेजा खेड़ा गांव में हुआ था, उनके पिता एक संपन्न किसान थे। देवीलाल ने स्वंतत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और फिर राजनीति के साथ समाजसेवा से जुड़े। सन् 1947 में भारत की आजादी के बाद ही वह किसानों के नेता बन गए और उनके मुद्दों के लगातार उठाते रहे वह 1952 में काग्रेस पार्टी से पहली बार विधायक बने। किसानों और क्षेत्रीय मुद्दों से लगातार जुड़े रहने के कारण वह हरियाणा राजनीति में एक बड़े राजनेता के रूप में उभरे।1958 में वो सिरसा से चुने गए। पंजाब विधानसभा (1962-67) में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हिंदी भाषी हरियाणा को पंजाब से अलग राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी बीच कांग्रेस से वैचारिक मतभेद के चलते1971 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी।

इंमरजेंसी में गए जेल



इमरजेंसी के दौरान उन्हें इंदिरा गांधी का विरोध करने के कारण जेल जाना पड़ा। इसके बाद ये जनता पार्टी में शामिल हो गए और जीतने पर हरियाणा के सीएम बने। लेकिन पार्टी में आंतरिक असंतोष के चलते 1979 में इस्तीफा देकर इन्होंने लोकदल नामक अपनी पार्टी बनाई। इस दौरान वह किसानों व गरीबों की लड़ाई लड़ते रहे और हरियाणा में किसानों के बड़े नेता के तौर पर उभरे। धीरे-2 हरियाणा में उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि 1987 के चुनाव में देवीलाल की पार्टी को हरियाणा की 90 में से 85 सीटें जीत मिलीं और वह दूसरी बार हरियाणा के सीएम बने।

जब वह थे प्रधानमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब


देवी लाल को आज भी ऐसे राजनेता के तौर पर याद किया जाता है जिसने कुर्सी से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। इसी क्रम में एक किस्सा याद किया जाता है जब उनके संसदीय दल का नेता चुने जाने पर सभी सहमत थे लेकिन उन्होंने वीपी सिंह को समर्थन देकर संसदीय दल का नेता बनाया। कहा जाता है कि उस समय वह प्रधानमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब थे लेकिन सबको धन्यवाद करने के लिए वह खड़े हुए और बोले- 'मैं सबसे बुजुर्ग हूं, मुझे सब ताऊ बुलाते हैं मुझे ताऊ बने रहना ही पसंद है और मैं ये पद विश्वनाथ प्रताप सिंह को सौंपता हूं। जिसके बाद वी.पी. सिंह देश के प्रधानमंत्री बने।

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