Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Boxer Amit Panghal बोले, अवार्ड मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते लेकिन ओलंपिक में पदक जीतना चाहूंगा

वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक विजेता और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नामित बॉक्सर अमित पंघाल ने हरिभूमि से विशेष बातचीत में कहा मैं एक साधारण भारतीय सेना का जवान हूं पहले भी काफी बार कहा था कि अवॉर्ड्स मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते।

Boxer Amit Panghal
X
Boxer Amit Panghal

रोहतक। वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक विजेता और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नामित बॉक्सर अमित पंघाल ने कहा मैं एक साधारण भारतीय सेना का जवान हूं और देश का खिलाड़ी हूं और काफी लगन से खेलता हूं। मैंने पहले भी काफी बार कहा था कि अवॉर्ड्स मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते लेकिन प्रदर्शन और खेल मायने रखते हैं। लेकिन एक अवार्ड जरूर जीतना चाहूंगा वह है ओलंपिक में देश के लिए पदक। हरिभूमि से विशेष बातचीत की मुख्य बातें-

खेल अवार्डस को लेके काफी कुछ बातें हो रही है ओर आपके नाम की भी चर्चा चल रही है? आपका क्या कहना है?

अमित पंघाल: कुछ दिनों से मैं भी देख रहा हूं के खेल अवॉर्ड को लेकर काफी लिखा जा रहा है। और जाहिर है मैं भी खिलाड़ी हूं तो मेरी भी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई। मैं एक सधारण भारतीय सेना का जवान हूं और देश का खिलाड़ी हूं और अपने तन मन से खेलता हूं। मैंने पहले भी दोहराया है अवार्ड्स मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते है। प्रदर्शन ही खेल में मायने रखता है। एक अवार्ड मायने रखता है भारत की सेना व मेरे सैनिक भाई मुझपे गर्व करें। वो सेना ने मुझे विशिष्ट सेवा मेडल दे के बता दिया के हम सब साथ हैं और मेरी तरफ से वही अप्लाई भी कर रहे है।

आपके ऊपर प्रतिबंधित दवा लेने का आरोप लगाा था जब आप जूनियर थे?

अमित पंघाल: जब मैं बच्चा था और एक गांव में रहकर 100 गज के प्लॉट में प्रैक्टिस करता था तब बीमारी के चलते एक डॉक्टर ने दवा लिखी और मैंने ले ली। अब ये बताइए के एक बच्चा जिसके पास कोई साधन नहीं था, ये मालूम करे कि ये दवा क्या है और मुझे तो ये कम्प्यूटर भी नहीं आता था चलाना। जब सबने कहा की ये तेरी गलती है तो मैंने मान भी ली। मगर कुछ समय बाद जब मैं खेल नहीं सकता था, कोई साथ देने वाला नहीं था तब मेरे कोच अनिल धनखड़ जैसे मुझे संभाला है और जैसे कुंदन बनता है वैसे मेरे ऊपर मेहनत की ये उसी का नतीजा है के आज मैं एशिया का चैंपियन हूं और वर्ल्ड में नम्बर एक हूं। उनका योगदान मैं कभी भी नहीं भूल सकता।

उस दौर का आपका क्या अनुभव था, हमसे साझा करें।

अमित पंघाल: शायद वो बुरा दौर मैंने ना देखा होता या वो तकलीफ मेरे दिल में ना हुई होती तो मुझे अंदर से लगता है मैं ये बॉक्सर नहीं होता जो मैं आज हूं मेरे भाई और घर वालों ने कहा था उस वक्त के बुरा टाइम आता है ओर एक चीज जो हम कर सकते है बुरे टाइम में वो है हाड़तोड मेहनत।

कुछ न्यूज वाले कह रहे हैं कि आपको शायद अबकी बार भी इग्नोर किया जाए तथा कोई अवार्ड ना मिले। आपकी प्रतिक्रिया?

अमित पंघाल: अभी जो ये खेल अवार्ड्स की बात है ये मुझे मजबूत कर रही है कि ओलंपिक चैंपियन ही वो अवार्ड है जो मैं अपने देश अपनी सेना और अपनी बॉक्सिंग फेडरेशन की झोली में डाल सकता हूं क्योंकि इन्होंने जो साधन, तैयारियां व लक्ष्य दिया है मेरा मकसद बस वो है।

इसका आपके ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अमित पंघाल : मैं हमेशा हर बात में हर हाल में बस अच्छा सोचता हूं और मैं चाह कर भी ये आदत बदल नहीं सकता।

Next Story