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किरण चौधरी के दम पर सत्ता में वापसी के प्रयासों में जुटे भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी से मुलाकात। बिश्नोई समेत अन्य नाराज नेताओं से भी मुलाकात संभावित

किरण चौधरी के दम पर सत्ता में वापसी के प्रयासों में जुटे भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हरियाणा विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब सत्ता में वापसी के प्रयासों में जुट गए हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को मनाकर भाजपा को कड़ी चुनौती की तैयारी कर रहे हैं। हरियाणा चुनाव समिति (CLP) के अध्यक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी से मुलाकात की है। प्रदेश नेतृत्व में आए बदलाव के बाद किरण चौधरी की नाराजगी को दूर करने के लिए भूपेंद्र हुड्डा ने मुलाकात की है। सूत्रों के मुताबिक भूपेंद्र हुड्डा ने रविवार को दिल्ली स्थित आवास पर जाकर मुलाकात की। काफी देर तक चली मुलाकात के बाद किरण चौधरी मुस्कुराते हुए भूपेंद्र हुड्डा के साथ घर से बाहर निकलीं। जिससे माना जा रहा है कि दोनों कद्दावर नेताओं के बीच चली आ रही खटास अब दूर हो गई है।



चौधरी, तंवर व बिश्नोई रहे नदारद

नई प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा और नए सीएलपी लीडर हुड्डा के कार्यभार संभालने के दौरान पार्टी के बड़े नेता नदारत रहे थे। इस दौरान किरण चौधरी, पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर और कुलदीप बिश्नोई मौजूद नहीं थे। जिस वजह से हुड्डा ने दिल्ली स्थित किरण चौधरी के आवास पर उनसे व उनकी बेटी पूर्व सांसद श्रुती चौधरी से भी वार्ता की। किरण चौधरी ने मुलाकात के बारे में कहा कि भूपेंद्र सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। हम सब लोग कांग्रेस में ही हैं। आपस में मुलाकातें होती रहती हैं। वह चाय पर आए थे उनसे मुलाकत हुई, कोई नाराजगी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी व् हुड्डा को सबको साथ लेकर चलने के लिए निर्देशित किया गया है। जिस वजह से संभावित है कि हुड्डा जल्द ही कुलदीप बिश्नोई समेत अन्य नाराज नेताओं से बात कर गिले शिकवे दूर करेंगे।

कर्नाटक हादसे के बाद से सतर्क है कांग्रेस

इनेलो और निर्दलीय विधायकों के भाजपा में जाने के बाद भूपेंद्र हुड्डा की चुनौती कठिन हो गई है। ऐसे में भाजपा को टक्कर देने के लिए नाराज नेताओं को मनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कांग्रेस ने कर्नाटक में 17 विधायकों के पार्टी से इस्तीफे के बाद सत्ता खो दी थी। लेकिन अब कांग्रेस असंतुष्ठ विधायकों के बागी हो जाने का खतरा मोल नहीं लेगी। अगर तंवर, किरण से टिकट की आस लगाए बैठे नेताओं ने बगावत की तो कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।

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