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Haryana Assembly Election : मुख्यमंत्री मनोहर लाल की भी टिकट वितरण में नहीं चली, इस नेता ने लिए सभी फैसले

हरियाणा विधानसभा चुनावों के टिकट वितरण में भाजपा हाईकमान ने कड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की भी सिफारिशें दरकिनार कर नजदीकियों के टिकट काट दिए गए। टिकट वितरण और गठबंधन से जुड़े हुए फैसले भाजपा के इस नेता ने लिए।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की भी टिकट वितरण में नहीं चली, इस नेता ने लिए सभी फैसलेChief Minister Manohar Lal

हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने प्रत्याशियों की सूची में विधायक तो क्या मंत्रियों के भी टिकट काट दिए। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की भी सिफारिशों को भी नहीं माना गया है। हरियाणा में भाजपा को मजबूत करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने सिफारिशों को दरकिनार कर मेरिट के आधार पर टिकटों का वितरण किया। परिवार-वाद से पार्टी को आगे ले जाकर किसी भी सांसद, विधायक, मंत्री के परिजनों को टिकट नहीं दिया गया।

हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने टिकट वितरण में सख्त फैसले किए हैं। टिकट वितरण में सीएम मनोहर लाल खट्टर की भी नहीं चली है। सीएम मनोहर लाल के करीबियों में शामिल पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सहित कई समर्थकों के टिकट काट दिए हैं। इसके अलावा दक्षिण हरियाणा के सबसे बड़े नेता केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी को भी टिकट नहीं दिया गया। जिसके कारण ही 12 विधायकों के टिकट कट गए।

सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री अमित शाह ने मेरिट के आधार पर फैसले लिए हैं। विधानसभा सीटों पर टिकट के लिए मिलीं सभी सिफारिशों को नजर अंदाज किया गया। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा में पार्टी को मजबूत करने और क्षेत्रीय नेताओं का कद छोटा करने के लिए ऐसा फैसला किया गया। दक्षिण हरियाणा के दो बड़े नेता राव इंद्रजीत की बेटी और राव नरबीर का टिकट काटकर इनके कद को हल्का कर दिया है।

शिवसेना को भी दिया था सख्त संदेश

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले शिवसेना अधिक सीटें लेने के लिए भाजपा पर दवाब बना रही थी। काफी वक्त के बावजूद भी सीट बंटवारा नहीं होने पर अमित शाह ने हस्तक्षेप किया। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने भाजपा के केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के जरिये शिवसेना प्रमुख को संदेश भिजवाया। जिसमें कहा कि अगर 124 सीटों पर लड़ना है तो लड़ लें। यदि शिवसेना तैयार नहीं है तो भाजपा अकेले चुनाव लड़ेगी। जिसके बाद शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई।

(प्रस्तुती: प्रियांशु पंत)

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