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भारत में तेजी से बढ़ रहे बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले

आज बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एवं उन्हें छोड़ देने के मामले बढ़ रहे हैं। जिस कारण भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लगभग 12 साल पुराने इस कानून में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले
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बुजुर्गों के भरण पोषण कानून 2007 से जुड़े कानून के संबंध में रविवार को सिविल अस्पताल कलानौर में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिवक्ता राजबीर कश्यप द्वारा कानूनी जागरुकता व साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कश्यप ने बताया कि आज बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एवं उन्हें छोड़ देने के मामले बढ़ रहे हैं।

जिस कारण भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लगभग 12 साल पुराने इस कानून में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। संसद के 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान मंत्रीमंडल की संसदीय मामलों की समिति की ओर से लाये जाने वाले प्रस्तावित बिलों में इसे भी शामिल किया गया है।

जिसके अनुसार बुजुर्ग माता पिता सिर्फ अपने जैविक बच्चों से ही गुजारा भत्ता लेने के हकदार नहीं होगे बल्कि वह अपने नाती, पोते, दामाद या फिर वह हर संबंधी जो उसकी संपत्ति का अधिकारी, वारिस होगा, उन सभी से वह गुजारा भत्ता लेने के संबंध में मुकदमा दायर कर सकेगा।

प्रस्तावित कानून में गुजारा भत्ते की सीमा जो दस हजार रुपये की रखी गई वह हटाई जायेगी तथा हैसियत के हिसाब से गजारा भत्ता तय किया जायेगा। प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक उप-सहायक निरीक्षक (एएसआई) के रैंक का पुलिस अधिकारी बुजुर्गों की सुरक्षा व समस्याओं के समाधान के लिए बतौर नोडल अधिकारी तैनात किया जायेगा

तथा नये कानून के अधीन वृद्धाश्रमों को भी शामिल किया जायेगा। बुजुर्ग का ख्याल न रखने पर मौजूदा कानून में तीन माह की सजा का प्रावधान है लेकिन प्रस्तावित कानून के अनुसार बुजुर्ग का ख्याल न रखने पर छह महीने की जेल भी हो सकती है। इस अवसर पर पीएलवी माया देवी, डॉ एसपी यादव, स्टाफ नर्स दया, निर्मल, रामकिशन, संजय ईएमटी, गीता, सन्नी, लखन सहित अन्य उपस्थित रहे।

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