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मदवि के 250 ठेका सुरक्षाकर्मियों की हो गई काली दिवाली, वेतन के लिए ठेकेदारों ने दिनभर टरकाया

वेतन को लेकर सुबह से ही कर्मियों में कानाफूसी शुुरू हो गई थी। ठेकेदार द्वारा एक दो घंटे में वेतन खातों में जमा करवाने का आश्वासन दिया जाता रहा। लेकिन शाम को छह बजे तक खातों में वेतन जमा नहीं हुआ नारेबाजी करते सुरक्षाकर्मियों ने ड्यूटी छोड़ दी और गेट नंबर दो पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।

मदवि के 250 ठेका सुरक्षाकर्मियों की हो गई काली दिवाली, वेतन के लिए ठेकेदारों ने दिनभर टरकाया

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय गेट पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को ठेकेदार ने सितम्बर महीने का वेतन शुक्रवार देर रात नहीं दिया। जिसके चलते इन्होंने मजबूरी में ड्यूटी देनी बंद की और लामबंद होकर ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। मामले की जानकारी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के कानों तक पहुंची। लेकिन अधिकारियों ने भी सुरक्षाकर्मियों को कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक डेढ़ साल पहले कुल सचिव कार्यालय ने आदेश जारी किए थे कि ठेके के प्रत्येक सुरक्षाकर्मी को हर महीने की दस तारीख से पहले वेतन दिया जाएगा। लेकिन इन आदेशों की पालना आज तक विश्वविद्यालय ने नहीं की है।

वेतन के लिए दिनभर टरकाया

वेतन को लेकर सुबह से ही कर्मियों में कानाफूसी शुुरू हो गई थी। ठेकेदार द्वारा एक दो घंटे में वेतन खातों में जमा करवाने का आश्वासन दिया जाता रहा। लेकिन शाम को छह बजे तक खातों में वेतन जमा नहीं हुआ नारेबाजी करते सुरक्षाकर्मियों ने ड्यूटी छोड़ दी और गेट नंबर दो पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।

कैसे घर जाएं खाली हाथ

कर्मचारियों का कहना है कि रविवार को दिवाली है, इसलिए शनिवार को हम कैसे खाली हाथ अपने बच्चों के पास जाएं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार तो दो-तीन महीने तक भी वेतन नहीं मिलता है। विरोध करते हैं तो ठेकेदार नौकरी से निकालने की धमकी देता है। गत वर्ष भी दिवाली पर वेतन को लेकर ठेकदार ने झमेला डाला था। जब मामला खींचने लगा तो दीपावली वाले दिन कर्मचारियों को वेतन दिया गया। लेकिन उस प्रकरण में विरोध प्रदर्शन करने वाले कई सुरक्षाकर्मियों को ठेकेदार ने बाद में नौकरी से हटा दिया था। अब फिर ऐसे ही हालात इस बार बने हैं।

रजिस्ट्रार के आदेश ठेंगे पर

करीब दो साल पहले कुल सचिव कार्यालय ने अकाउंट ब्रांच को आदेश जारी किए थे कि ठेके के सभी कर्मचारियों को हर महीने की दस तारीख से पहले ठेकेदार वेतन देगा। लेकिन आज तक एक बार ऐसा नहीं हुआ। कुल सचिव डॉ. जितेंद्र भारद्वाज तीन साल का कार्यकाल पूरा करके विदा हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. गुलशन तनेजा ने कार्यभार सम्भाला। कर्मचारियों ने सोचा था कि चूंकि इस बार कुल सचिव विश्वविद्यालय से ही हैं। इसलिए उन्हें वेतन समय से मिलेगा। लेकिन बीते डॉ. तनेजा के कार्यकाल में एक भी महीना ऐसा नहीं आया, जिसमें वेतन उनके कार्यालय के आदेशों की पालना करते हुए दस तारीख से पहले मिला हो।

सेलरी में भी गड़बड़झाले का अंदेशा

वेतन तो समय पर मिलता ही नहीं है। इसके अलावा इसमें घोटाले की भी बू आ रही है। नाम न बताने की शर्त पर एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि सुरक्षाकर्मी का हर महीने का वेतन डीसी रेट के हिसाब से वर्ष 2018-19 में 13850 रुपये तय किया हुआ है। लेकिन ठेकेदार पूरा वेतन नहीं देता है। सुरक्षाकर्मियों की खाते में अगस्त की सेलरी 10893 रुपये जमा हुई है। जबकि वेतन 13850 रुपये है। कर्मचारियों का आरोप है कि जब से वर्तमान कम्पनी ने ठेका लिया है, तब से लेकर आज तक वेतन के एरियर का भुगतान नहीं किया गया है।

पूर्व प्रधान फूल कुमार बोहत समर्थन में

गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान फूल कुमार बोहत कहते हैं कि ठेके के कर्मचारियों को वेतन देने में काफी लम्बे समय से गड़बड़झाला हो रहा है। मैंने प्रधान पद पर रहते हुए इस मामले को कई बार यूनिवर्सिटी अधिकारियों के समक्ष रखा। लेकिन अधिकारियों ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। कुल सचिव कार्यालय की तरफ से आदेश जारी हैं कि हर महीने की दस तारीख से पहले ठेकेदार अपने कर्मियों काे अपने पास से वेतन देगा। बोहत ने कहा कि अगर इस बार उन्हें फिर से प्रधान की जिम्मेदारी मिली तो उनका पहला काम ठेके के कर्मचारियों को हर महीने की तारीख से पहले वेतन दिलाने का होगा। मालूम हो कि 31 अक्टूबर को गैर शिक्षक कर्मचारी संघ का चुनाव हो रहा है। और फूल कुमार पैनल मैदान में

हैं।

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