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हरियाणा: बेटी बचाओ अभियान को लगा झटका, दस गांवों का लिंगानुपात 500 से भी कम

एक रिपोर्ट के अनुसार दरौली खेड़ा में लिंगानुपात सबसे कम है। यहां एक हजार लड़कों के पीछे मात्र 217 लड़कियां हैं।

हरियाणा: बेटी बचाओ अभियान को लगा झटका, दस गांवों का लिंगानुपात 500 से भी कम
नई दिल्ली. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और सेल्फ़ी विद डॉटर जैसे नारों के बीच हरियाणा के जींद जिले का लिंगानुपात तेजी से घटता जा रहा है। यहां 10 गांवों में लिंगानुपात घटकर 500 से भी कम रह गया है। प्रदेश में लिंगानुपात सुधारने के लिए राज्‍य सरकार भले ही हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है, मगर इसके बावजूद जींद के दस गांव आज भी ऐसे हैं, जहां का लिंगानुपात 500 से भी कम है।
देशव्यापी अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कन्याओं को बढ़ावा देने के लिए बीते साल जनवरी में हरियाणा के पानीपत शहर से देशव्यापी अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया था। इसके बावजूद यहां के हालात में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जिले के दरौली खेड़ा में लिंगानुपात सबसे कम है। यहां एक हजार लड़कों के पीछे मात्र 217 लड़कियां हैं। इसी प्रकार सफीदों के सरफाबाद में एक हजार लड़कों के पीछे 231 लड़कियां, राजगढ़ ढोबी गांव में एक हजार लड़कों के पीछे 333 लड़कियां, अंबरसर गांव में 375, संगतपुरा गांव में 381, मांडोखेड़ी गांव में 400, सुलहेड़ा गांव में 400, बहादुरपुर में 406, खेड़ी बुल्ला गांव में 444, राजपुरा गांव में 467 लड़कियां हैं।यह रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित विभाग भी बगलें झांकने लगा है।
एएनएम व एमपीएचडब्यू के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश
यही नहीं, विभाग ने कालवा, खरकराजी, सफीदों, उचाना, कंडेला, उझाना के एसएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर इसका कारण पूछा है। इसके अलावा संबंधित गांवों की एएनएम व एमपीएचडब्यू के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।जिला उपायुक्त विनय सिंह ने कहा कि कुछ गांवों में कम लिंगानुपात का मामला सामने आया है और वहां की एएनएम व एमपीएचडब्ल्यू के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड जांचने के आदेश दिए गए हैं ताकि लिंग जांच न हो सके।
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