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रेलवे ई टिकट का नकली सॉफ्टवेयर बनाया, इन सॉफ्टवेयर से टिकट करते थे बुक

नकली सॉफ्टवेयर से रेलवे को चूना लगाने वाले तीन आरोपितों को रेलवे सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से एक आरोपित 2008 का बीसीए डिग्री धारक है।

परवेश मान गैंग के दो शूटर गिरफ्तार
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रेलवे को चूना लगाने वाले बदमाश गिरफ्तार (प्रतीकात्मक फोटो)

नकली सॉफ्टवेयर से रेलवे को चूना लगाने वाले तीन आरोपियें को रेलवे सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से एक आरोपित 2008 का बीसीए डिग्री धारक है। गिरोह के तीन सदस्यों के पकड़ में आने तथा 6 अन्य लोगों के नाम सामने आने के बाद नकली सॉफ्टवेयर बनाकर रेलवे को चूना लगाने वाले गिरोह का बाकी सदस्यों का पकड़े जाने की उम्मीद बढ़ी है।

उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अभय शर्मा ने बताया कि महाप्रबंधक आनंद प्रकाश व महानिदेशक अरूण कुमार ने नकली ई-टिकटिंग मामले की जांच मुख्य सुरक्षा आयुक्त ओमरा सिंह ठाकुर की अगुवाई में शुरू की थी। 2 फरवरी उपमुख्य सुरक्षा आयुक्त रूचिरा चटर्जी की स्पेशल टीम ने जांच शुरू की। दो संदेहास्पद मोबाइल नंबर के सीडीआर एवं उन नबंरों के आधार पर आरोपितों की लोकेशन ट्रेस की गई।

ऐसे किया गया गिरफ्तार

जिसमें सीआईबी जोधपुर उपनिरीक्षक सुरेन्द्र कुमार व कांस्टेबल ललित कुमार द्वारा वेरीफाइन करने के बाद दिनेश जांगिड़ की संलिप्ता की जांच के लिए निरीक्षक नानूराम , राजकुमार, अंबुज, हैड कांस्टेबल हेमकरा व भैरू को जांच के लिए जोधपुर भेजा गया।

जांच में दिनेश जांगिड़ निवासी गिरादरा की ढ़ाणी (राजस्थान) को साफ्टवेर के माध्यम से अनिधिकृत टिकटिंग करते पाया गया। 6 फरवरी को गिरफ्तार आरोपित ने बताया कि वह 2008 का बीसीए ग्रेजुएट है। 2013 में आनलाइन टिकट बुक करने वाले स्पीडो सॉफ्टवेयर की जानकारी व्हाट्सअप नंबर से हासिल की थी।

2013 से कर रहा था काम

इसे खरीदने के लिए 10 हजार रुपए दिए गए थे, परंतु उसे सॉफ्टवेयर नहीं मिला। कुछ समय बाद मोबाइल नंबर बंद हो गया था उनसे 2014 उसे मोईनुल हक साफ्टवेयर का सोर्स दिया। जिसे मोडिफाई कर आईकॉन सॉफ्टवेयर तैयार किया। सिंगल विंडो का ट्रांजेक्शन केवल एसीबीआई के माध्यम से कैप्चा मैनुअली उपयोग में लाया जा सकता था। जिसे उसने मोईनुल व शमशेर को ढ़ाई लाख में बेचा। शमशेर ने रूपांतरित कर फ्रीलांसर वेवसाइट के माध्यम से स्पार्क साफ्टवेयर में तब्दील कर लिया।

एडमिन के तौर पर एक अन्य व्यक्ति सलमान द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता था। इस समय हामिद अशरफ का ब्लेकटीएस साफ्टवेयर मार्केट में काफी लोकप्रिय था। वर्ष 2016 में हामिद के पकड़े जाने पर उसका साफ्टवेयर ब्लेकटीएस बंद हो गया। परन्तु दिनेश उर्फ रोशन जो नाम बदल कर साफ्टवेयर बना रहा था। पकड़े गया आरोपित दिनेश समय-समय पर नए-नए नाम से यथा-एचपी, काउंटर, एनगेट साफ्टवेयर का अपडेट विभिन्न लोगों को देता था।

आईआरसीटीसी कर्मचारी शमिल

वर्ष 2018 में शमशेर द्वारा नियो साफ्टवेयर जिसे अजय गर्ग ( पूर्व आईआरसीटीसी कर्मचारी ) द्वारा डेवलप किया गया था। सोर्स को यूज करते हुए आरोपी दिनेश ने ई-बिल साफ्टवेयर बनाया। परन्तु मार्केट में हामिद के एएनएमएस साफ्टवेयर के ज्यादा प्रभावी होने के कारण पुन: मोडिफाई करते हुए वर्ष 2019 में रीडबिल साफ्टवेयर बनाया। आरोपित की शिनाख्त पर दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि चार की तलाश जारी है।

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