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चुनावी पार्टियों के घोषणा पत्र में होगी लुभावने वादों की बहार, पेंशन, भत्ता, कर्जमाफी के अलावा भी बहुत कुछ

हरियाणा में चुनावी बिगुल बज चुका है, राजनीतिक पार्टियां जनमत को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। जनता के बीच जाकर दूसरी पार्टियों को जमकर निशाने पर लिया जा रहा है। इन सबके बीच अब इंतजार पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र का है, जिसमें वादों की भरमार होना तय है। अब देखना ये है कि आखिर किसका चुनावी घोषणा पत्र जनता को सबसे ज्यादा लुभाएगा।

चुनावी पार्टियों के घोषणा पत्र में होगी लुभावने वादों की बहार, पेंशन, भत्ता, कर्जमाफी के अलावा भी बहुत कुछ
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प्रदेश की सत्ता में कबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) का घोषणा पत्र लगभग बनकर तैयार है। जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है। पार्टी का मेनिफेस्टो बनाने की जिम्मेदारी ओपी धनखड़ के पास है, पार्टी ने इसमें हरियाणा से जुड़े 100 विशेष मुद्दे रखे हैं, इसे अब सीएम के पास भेजा गया है, इसमें कई चीजों में कटौती होगी और उसके बाद यह जनता के सामने आ जाएगा।


विपक्षी पार्टियों के पास चुनाव में बढ़त हासिल करने का सबसे बड़ा अधिकार उनका घोषणा पत्र ही है। वर्तमान में प्रदेश की विपक्षी पार्टियां आपसी अन्तर्कलह से जूझ रही हैं जिसके कारण जनता का भरोसा उनपर से कम हुआ है। भरोसे को बढ़ाने के लिए घोषणा पत्र एक अहम जरिया है। कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो को जारी करने से पहले ही उसमें से तमाम घोषणाएं कर दी हैं।

जैसे बेरोजगारी भत्ता 7 से 10 हजार रुपए, बुजुर्ग पेंशन 5 हजार रुपए, किसानों के कर्ज माफ करने के साथ ग्रुप डी की नौकरियों में बीए, एमए किए हुए युवाओं को ग्रुप सी में प्रमोट करना जैसी प्रमुख घोषणाएं कर दी गई हैं। प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा द्वारा चार डिप्टी सीएम बनाने की बात फिलहाल पार्टी के ही नेताओं के गले से नहीं उतर रही है।


संभावना है कि घोषणा पत्र की अध्यक्ष किरण चौधरी द्वारा 27 तारीख को घोषणा पत्र जारी किया जा सकता है। इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता दल भी अपने घोषणा पत्र में लगे हुए हैं। जजपा का घोषणा पत्र तो फिलहाल खुली किताब सा है, प्राइवेट नौकरियों में भी प्रदेश के 75 फीसदी युवाओं का कोटा तय करने, हर घर में एक नौकरी देने के साथ गांव में आरओ लगाने की बात उन्होंने घोषणा पत्र जारी करने के पहले ही जनता के बीच पहुंचा दी है।


पार्टी के टूटने के बाद इनेलो काफी पिछड़ गई है। इसलिए उनके वादे जनता के गले से नहीं उतर रहे हैं। ओपी चौटाला ने कहा कि हम ऐसा काम कर देंगे की किसानों में ऋण लेने नहीं देने की क्षमता आ जाएगी। फिलहाल इनेलो का घोषणा पत्र जारी होगा या नहीं इसपर भी अभी आशंका के काले बादल मंडरा रहे हैं। फिलहाल इतना तो तय है कि चुनाव के ठीक पहले पार्टियां जनता को सपना दिखाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ने वाली। उन सपनों में कितने फीसदी पूरी होते हैं फिलहाल इसपर कुछ कह पाना संभव नहीं।

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