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मनचलों से परेशान छात्राओं को खुद डीईओ स्कूल लेकर पहुंचे, सरपंच ने मांगी माफी

मनचलों से परेशान होकर स्कूल छोड़ने वाली दर्जनों छात्राओं को लेने खुद जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश यादव पहुंचे। निजी स्कूल की बस का इंतजाम कर उनके गांव राजावास पहुंचे। उसी बस में सवार होकर गांव मस्तापुर स्थित सरकारी स्कूल में पहुंचे। छात्राओं के स्कूल पहुंचने के बाद वहां पांच गांवों की पंचायत भी हुई।

सरकार बहाने बनाकर कर रही है सरकारी स्कूल बंद कराने की चेष्टाहरियाणा स्कूल (प्रतीकात्मक फोटो)

मनचलों से परेशान होकर स्कूल छोड़ने वाली दर्जनों छात्राओं को सुरक्षित स्कूल तक छोड़ने के लिए गुरूवार को खुद जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश यादव निजी स्कूल की बस का इंतजाम कर उनके गांव राजावास पहुंचे और फिर उसी बस में सवार होकर गांव मस्तापुर स्थित सरकारी स्कूल में पहुंचे।

छात्राओं के स्कूल पहुंचने के बाद वहां पांच गांवों की पंचायत भी हुई, जिसमें मस्तापुर के सरपंच ने माफी मांगते हुए छात्राओं की सुरक्षा से लेकर मनचलों पर शिकंजा कसने का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं स्कूल के प्राचार्य को भी छात्राओं की सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीईओ ने घर से स्कूल और वापस जाने के लिए बस का भी इंतजाम कर दिया है। अब छात्राओं अपने गांव से ही बस में बैठकर स्कूल जाएंगी।

बता दें कि बुधवार को राजावास सहित आसपास के पांच गांवों गंगायचा जाट, शादीपुर, नूरपुर व टहना की पंचायत हुई थी, जिसमें पांचों गांवों के ग्रामीणों ने अपने बच्चों को गांव मस्तापुर स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ाने की मना कर दी थी, क्योंकि राजावास गांव की छात्राओं को स्कूल जाते समय रास्ते में मस्तापुर गांव के कुछ मनचले परेशान करते थे।

कई बार इसको लेकर ग्रामीणों ने समझाया भी, लेकिन बाज नहीं आए तो बुधवार को यह निर्णय लिया गया। पंचायत के निर्णय के बाद बुधवार शाम तक ही शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन में खलबली मच गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सुबह सवेरे जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश यादव अपने स्टाफ के साथ पहले मस्तापुर गांव में पहुंचे और उसके बाद छात्राओं को स्कूल तक लाने के लिए निजी स्कूल की बस मंगवाई। उसके बाद छात्राओं को स्कूल लाया गया।

यह था मामला

ग्रामीणों ने बताया था कि उनके गांव से 35 छात्र-छात्राएं गांव मस्तापुर स्थित राजकीय स्कूल में पढ़ने के लिए जाते थी। परंतु रास्ते में गांव मस्तापुर के कुछ मनचले छात्राओं के साथ छेड़छाड़ तथा फब्तियां कसते थे। इस बारे में इसको लेकर पांच गांवों के ग्रामीण मस्तापुर के ग्रामीणों व ग्राम पंचायत को भी शिकायत कर चुके थे, लेकिन सिलसिला जारी रहने से बुधवार को पंचायत तक पांच गांवों ने अपने बच्चों को मस्तापुर स्कूल में भेजने से ही मना कर दिया था।

प्राचार्य-सरपंच की जिम्मेदारी

छात्राओं को स्कूल में छोड़ने के बाद वहां दोबारा पंचायत हुई। पंचायत में पांच गांवों के अलावा मस्तापुर के सरपंच को भी बुलाया गया। इस दौरान खुद जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश यादव भी मौजूद थे। उसके बाद मस्तापुर गांव के सरपंच ने पंचायत में गांव की तरफ से माफी मांगी और आगे से इस प्रकार की कोई हरकत नहीं होने का आश्वासन दिया। इसके अलावा डीईओ की तरफ से स्कूल के प्राचार्य की जिम्मेदारी भी छात्राओं की सुरक्षा को लेकर लगाई गई है।

मामला पंचायत स्तर पर सुलझा लिया गया है। गुरूवार को मैं खुद छात्राओं को घर से लाने के लिए बस लेकर गया और उन्हें स्कूल पहुंचाया। छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। छात्राओं के लिए स्पेशल बस लगा दी गई है। गांव के सरपंच व प्राचार्य की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।


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