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नमामि गंगे पर ''गंगा कानून'' जल्द, उमा ने कसी कमर

क़ानून को जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जिसके बाद आवश्यकता पड़ी तो इसे संसद में पेश करके पारित कराया जाएगा।

नमामि गंगे पर गंगा कानून जल्द, उमा ने कसी कमर
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उत्तराखंड की नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को गंगा और युमना को भारतीय नागरिक अधिकार देने वाले फैसले के बाद केंद्र सरकार गंगा एक्ट बनाने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए सरकार जल्द ही गंगा एक्ट को संसद में पेश करने की तैयारी में है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले से पहले ही केंद्रीय मंत्री उमा भारती नमामि गंगे अभियान और जल संरक्षण की दिशा में जल पर एक कानून लाने के विचार से मंत्रालय में काम करा रही है।
अदालत के इस फैसले के बाद गंगा एक्ट जैसे कानून की तैयारी को और तेज कर दिया गया है, ताकि जल्द से जल्द इस कानून को संसद में पारित कराया जा सके। उम्मीद है कि ऐसा कानून जल संबन्धी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
इस संबन्ध में बुधवार को गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थली यानि उत्तरकाशी के मुखवा गांव जाते हुए भी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि गंगा एक्ट का कार्य उनके मंत्रालय में तैयारी के अंतिम चरण में है।
उनका कहना है कि इसे जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जिसके बाद आवश्यकता पड़ी तो इसे संसद में पेश करके पारित कराया जाएगा।

कमेटी तैयार कर रही एक्ट

केंद्रीय मंत्री सुश्री भारती के अनुसार जल संबन्धी ऐसे कानून के लिए मंत्रालय में पहले से ही गठित एक समिति काम कर रही है। मसलन पिछले महीनों के दौरान महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के पोते पूर्व जस्टिस गिरधर मालवीय की अध्यक्षता में गठित की गई समिति को ऐसे ही कानून के अध्ययन और उसे मसौदे को तैयार करने का काम सौंपा गया था।
इस कानून के दायरे में गंगा व यमुना के साथ अन्य सहायक नदियां भी होंगी। सूत्रों के अनुसार इस कानून में गंगा-यमुना और अन्य सहायक नदियों में प्रदूषण फैलाने वालों को सीधे जिम्मेदार बनाकर दंडात्मक प्रावधान किये जा रहे हैं।

नमामि गंगे प्राधिकरण गठित

केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने यहां तक कहा है कि मां का दर्जा प्राप्त गंगा और यमुना को भरतीय नागरिक के अधिकार दिए जाने भी चाहिए। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे मिशन के लिए सरकारी तंत्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसके रूप में नमामि गंगे प्राधिकरण के गठन किया गया है।
मसलन नमामि गंगे को अब सोसाइटी की जगह प्राधिकरण का दर्जा देने के बाद जो काम पहले सोसाइटी की वजह से तेजी से नहीं हो पा रहे थे वे नमामि गंगे प्राधिकरण बनने से आसान होंगे, जिसे एक हजार करोड़ तक खर्च करने के अधिकार मिल गए हैं।

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