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ईमानदारी से काम करने में कोई दिक्कत नहीं आती: जाकिर हुसैन

जाकिर का कहना है कि यदि रोल अच्छा और हटकर हो, तो मेरे लिए मीडियम कोई मायने नहीं रखता।

ईमानदारी से काम करने में कोई दिक्कत नहीं आती: जाकिर हुसैन
नई दिल्ली. जाकिर हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की फिर उन्होंने टीवी की ओर रुख किया। ‘फिरदौस’, ‘किटी पार्टी’ और ‘युद्ध’ जैसे सीरियलों से जाकिर को पॉपुलैरिटी मिली। 2004 में श्रीराम राघवन की फिल्म ‘एक हसीना थी’ से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की। इसके बाद उन्होंने और भी कई फिल्मों में बेहतरीन किरदार निभाए। आजकल जाकिर टीवी सीरियल ‘एक मां जो लाखों के लिए बनी अम्मा’ में पावर पैक्ड परफॉर्मेंस दे रहे हैं। किरदार और करियर से जुड़े कुछ और अहम सवाल जाकिर हुसैन से।
आपका फिल्मी करियर बखूबी चल रहा है। ऐसे में अचानक टीवी की ओर दोबारा रुख करने का मन कैसे बना लिया?
रोल अच्छा और हटकर हो, तो मेरे लिए मीडियम कोई मायने नहीं रखता। दमदार आॅफर्स आते हैं, तो मना करना भी मुश्किल हो जाता है।
सीरियल ‘एक मां जो लाखों के लिए बनी अम्मा’ में आप पुलिस कमिश्नर के रोल में नजर आ रहे हैं। आपका कैरेक्टर सीरियल की कहानी में किस तरह जरूरी है?
सीरियल की कहानी 1950-60 के दौर की है। उस समय अंडरवर्ल्ड और गैरकानूनी तत्व कुछ ज्यादा ही पनप रहे थे। पुलिस वालों को इन्हें हैंडल करने में अच्छी-खासी मुश्किल होती थी। ऐसे में ही पुलिस कमिश्नर के. एम. दयाल की एंट्री होती है। वो कैसे इस माहौल में ऐसे तत्वों से जूझता है, यही सीरियल में दिखाया गया है। मेरा कैरेक्टर बेहद शांत और सूझबूझ वाला है। वो असामाजिक तत्वों से प्यार से बात करके उनको उनकी ही पावर के खिलाफ इस्तेमाल करता है। इस तरह वो उन्हें कमजोर बना देता है।
अन्याय और समाज के हित में काम करने वाली अम्मा के बारे में आपका क्या ख्याल है? क्या ऐसे लोगों को समाज में तरजीह मिलनी चाहिए?
भले ही ऐसे लोग समाज में कुछ अच्छे काम भी करते हों लेकिन कानून की नजर में वो हैं तो आपराधी। वो कानून से ऊपर उठकर ही काम करते हैं। ऐसे लोगों को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता।
सीरियल में आप पुलिस कमिश्नर के रोल में हैं, क्या इसके लिए कोई खास तैयारी करनी पड़ी?
फिल्मों में भी मैं पुलिस अधिकारी का रोल कर चुका हूं। लेकिन हर किरदार को बखूबी निभाने के लिए फिर से तैयारी तो करनी ही पड़ती है। हर कहानी में हर कैरेक्टर का मिजाज भी अलग होता है। ऐसे में कुछ नयापन लाने के लिए हर लेवल पर कलाकार को तैयार रहना पड़ता है।
आपका कैरेक्टर सीरियल में सच्चे और ईमानदार पुलिस कमिश्नर का है। क्या रियल में कोई आॅफिसर बिना समझौता किए ईमानदारी और सच्चाई के साथ काम कर सकता है?
आप किसी भी फील्ड या प्रोफेशन में हों, ईमानदारी से काम करने में कोई दिक्कत नहीं आती है। मैं बतौर एक्टर अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता हूं। ईमानदारी से किया गया काम लोगों को नजर आता है। तभी तो उसकी इमेज लोगों में अच्छी बनती है, लोग उसे सम्मान देते हैं। झूठ और बेईमानी ज्यादा दिन नहीं चल सकती। एक दिन सच्चाई सबके सामने आ ही जाती है। ऐसा भी नहीं है कि हर जगह बेईमानी और भ्रष्टाचार है। अगर ऐसा होता तो सिस्टम ही धराशायी हो जाता।
‘एक मां जो लाखों के लिए बनी अम्मा’ में आपका कैरेक्टर पॉजिटिव है, लेकिन आपने फिल्मों में ज्यादातर नेगेटिव और कॉमिक रोल प्ले किया है, आपको कौन से जॉनर में सबसे ज्यादा मजा आता है?
मुझे तो तीनों ही जॉनर करने में बहुत मजा आता है। कॉमिक रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन मुझे इसमें भी मजा आता है। ऑडियंस ने मुझे हर जॉनर में पसंद किया है।
आजकल आप और क्या कर रहे हैं?
टीवी में कुछ नहीं है। लेकिन, मैं तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘रागदेश’ कर रहा हूं। यह रियल लाइफ से इंस्पायर फिल्म है।
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