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Yashpal Sharma Interview: काम की तलाश और ''विकास'' का पैगाम लिए यशपाल शर्मा पहुंचे हरियाणा, गाएंगे लोक गीत

यशपाल शर्मा ‘हजार चौरासी की मां’, ‘लगान’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’, ‘गंगाजल’, ‘धूप’, ‘ट्यूबलाइट’, ‘करीम मोहम्मद’ जैसी बेहतरीन बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा रहे हैं।

Yashpal Sharma Interview: काम की तलाश और विकास का पैगाम लिए यशपाल शर्मा पहुंचे हरियाणा, गाएंगे लोक गीत
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यशपाल शर्मा ‘हजार चौरासी की मां’, ‘लगान’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’, ‘गंगाजल’, ‘धूप’, ‘ट्यूबलाइट’, ‘करीम मोहम्मद’ जैसी बेहतरीन बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा रहे हैं।

इतना ही नहीं वह असमी, हरियाणवी, गुजराती, तेलुगू के अलावा कई रीजनल लैंग्वेज की फिल्मों में भी एक्टिंग कर चुके हैं। उनकी हरियाणवी फिल्म ‘पगड़ी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

इन दिनों वह हरियाणा में सिनेमा के विकास के काम में लगे हुए हैं। इसी प्रयास में वह हरियाणा के संत लक्ष्मीचंद पर दो भागों में बायोपिक फिल्म बना रहे हैं। हाल ही में उनसे फिल्म ‘दादा लक्ष्मी’ और करियर को लेकर बात हुई।

आप हरियाणा से हैं। सुना है आप हरियाणा सिनेमा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं?

दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि दिल्ली के नजदीक होते हुए भी हरियाणा के गांव अभी तक विकसित नहीं हो पाए हैं। हरियाणा के लोग फौज, पुलिस या स्पोर्ट्स में ही जाते हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों से वे बहुत दूर हैं।

आप भी जानते हैं कि तमिल, कन्नड़, तेलुगू, पंजाबी, मराठी, गुजराती सिनेमा बहुत समृद्ध हो गया है। मराठी सिनेमा में तो क्रांति हो रही है। लेकिन हरियाणवी सिनेमा को कोई जानता ही नहीं है।

यही वजह है कि मैंने पिछले दो सालों से मुहिम छेड़ी हुई है कि वहां के युवा अभिनय के क्षेत्र से भी जुड़ें। मैंने हरियाणवी भाषा में ‘पगड़ी’ और ‘सतरंगी’ दो फिल्में की हैं, दोनों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

इसके अलावा हर साल हरियाणा में फिल्म फेस्टिवल कर रहा हूं। अब पंडित लक्ष्मीचंद पर फिल्म बना रहा हूं, जो मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है। भारत के लिए जो फिल्म बनेगी, उसका नाम होगा ‘दादा लक्ष्मी’, जबकि अंतरराष्ट्रीय फिल्म का नाम होगा-‘दादा लक्ष्मीः द शेक्सपियर।’ फिल्म हरियाणवी भाषा में ही बनेगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए हम सब टाइटल अंग्रेजी में देंगे।

पंडित लक्ष्मीचंद की फिल्म को लेकर क्या कहेंगे?

हरियाणा के पंडित लक्ष्मीचंद एक फोक कलाकार थे, जिन्हें सूरदास, कबीर और शेक्सपियर के अलावा कई नाम दिए गए थे। हम इन्हीं पर बायोपिक फिल्म बना रहे हैं। हमने गाने रिकॉर्ड कर लिए हैं।

जनवरी में हम फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं। इस फिल्म पर पिछले ढाई साल से काम कर रहा हूं। पंडित लक्ष्मीचंद कमाल के लेखक थे, उनको लेकर रिसर्च में हमें इतनी सामग्री मिली कि हम इस फिल्म को दो भागों में बनाएंगे।

इस फिल्म में उत्तम सिंह जी का संगीत है। रघुवीर यादव भी इसमें एक किरदार निभा रहे हैं। बाकी कलाकारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। यह फिल्म मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है।

पंडित लक्ष्मीचंद की बायोपिक को दो भागों में बनाने की वजह क्या है?

यह संगीत प्रधान फिल्म है। वह 1903 में पैदा हुए थे और महज 42 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। पंडित लक्ष्मीचंद कभी स्कूल नहीं गए थे। लेकिन वह फोक कलाकार, लेखक, गायक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे।

उन्हें सब कुछ कंठस्थ रहता था। उन्होंने खुद कागज पर कुछ नहीं लिखा और न ही अपनी तस्वीर ही खिंचवाई। वह आठ दस हजार लोगों के सामने गाते थे, तब तो बिजली भी नहीं थी।

यह पूरी फिल्म पांच घंटे से भी ज्यादा लंबी है, इसलिए दो भागों में बना रहा हूं। इसमें दो घंटे सिर्फ गाने हैं। पहले भाग में उनका बचपन और उनकी युवावस्था को शामिल कर रहा हूं। बाकी जीवन यात्रा की कहानी दूसरे भाग में होगी। मैं दूसरे भाग में पंडित लक्ष्मीचंद का किरदार निभाऊंगा।

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