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World Laughter Day: हिंदी सिनेमा की इन कॉमेडी फिल्म से ही जवां है बॉलीवुड

वर्ल्ड लाफ्टर डे पर जानिए हिंदी सिनेमा की उन बेस्ट हिंदी कॉमेडी फिल्मों के बार में हिंदी फिल्मों का पूरा परिदृश्य बदल दिया था। ‘दो दूनी चार’, ‘अंगूर’ और ‘गोलमाल’ इसी परंपरा की फिल्में हैं। वैसे देखा जाए तो सिनेमा में रोमांटिक कॉमेडी सबसे ज्यादा लोकप्रिय रही है। 1958 में ‘चलती का नाम गाड़ी’ से आरंभ यह परंपरा आज भी जारी है।

World Laughter Day: हिंदी सिनेमा की इन कॉमेडी फिल्म से ही जवां है बॉलीवुड
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फिल्मों में हमारे जीवन के हर रंग होते हैं, हास्य भी अपने रंग बिखेरता रहा है। शुरुआती दौर से ही हास्य, फिल्मों का एक अहम हिस्सा रहा है। अब तो हास्य यानी कॉमेडी फिल्मों का एक जॉनर बन चुका है। हिंदी फिल्मों में हास्य किन रूपों में बिखरा? किन कलाकारों ने अपनी अदाकारी में हास्य के रंग भरकर दर्शकों के दिल जीते हैं? हिंदी सिनेमा में हास्य के पूरे परिदृश्य पर एक नजर।

हमारी फिल्मों में शैशवकाल से ही हास्य को प्रधानता दी जाती रही है। हालांकि यह हास्य मौलिक न होकर विदेशी फिल्मों से प्रेरित हुआ करता था। शुरुआती दौर में हिंदी फिल्मों में कथात्मक हास्य बहुत ही कम हुआ करता था लेकिन 1970-80 के दशक में हृषिकेश मुखर्जी, बासु चटर्जी और गुलजार जैसे फिल्मकारों ने विलियम शेक्सपीयर के उपन्यास ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ को अलग-अलग अंदाज में परोस कर शिष्ट हास्य का सुखद सिलसिला आरंभ किया था।

‘दो दूनी चार’, ‘अंगूर’ और ‘गोलमाल’ इसी परंपरा की फिल्में हैं। वैसे देखा जाए तो सिनेमा में रोमांटिक कॉमेडी सबसे ज्यादा लोकप्रिय रही है। 1958 में ‘चलती का नाम गाड़ी’ से आरंभ यह परंपरा आज भी जारी है। जाने-माने हास्य कलाकार: हिंदी सिनेमा में हीरो-हीरोइन वाली मूल कहानी के साथ अमूमन कॉमेडी की कहानी भी चलती रहती है। कॉमेडियन दिखने में अजीब लगते हैं।

कभी हद से ज्यादा वजनी, कभी लटके हुए चेहरे वाले। वे तरह-तरह के मुंह बनाते हैं, मजाकिया अंदाज में बातें करते हैं। ऐसे ही लोकप्रिय एक्टर्स में एक जॉनी वॉकर थे, जिन्होंने गुरुदत्त के साथ ‘हलकी-फुलकी’, ‘आर-पार’ और ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ के साथ ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’ जैसी गंभीर फिल्मों में भी हास्य किरदार निभाया। वे काफी लोकप्रिय थे।

हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियंस में आई.एस. जौहर भी शामिल थे, जो अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम करने वाले भारत के चंद शुरुआती अभिनेताओं में से थे। इसी तरह छोटे कद के मुकरी को विदूषक और राजेंद्रनाथ को भारत का लाउ के‚स्टेलो कहा जा सकता है। महमूद ने बहुत-सी फिल्मों में शानदार अदाकारी की। यहां तक कि उन्होंने मुख्य भूमिकाएं भी निभाईं लेकिन उनका सबसे यादगार किरदार हैदराबादी व्यक्ति का रहा, जिसे उन्होंने फिल्म ‘गुमनाम’ और ‘पड़ोसन’ में निभाया।

कॉमिक रोल करने वाले नायक : अपने दौर के कई स्टार्स और सुपरस्टार्स ने भी फिल्मों में जमकर कॉमेडी के रंग बिखेरे। अपने दौर के ग्रेट एक्टर राज कपूर ने भी कई फिल्मों में अपने अंदाज में चार्ली चैप्लिन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दर्द को कॉमेडी के साथ पेश किया। उन्होंने फिल्म ‘श्री 420’ में कॉ‚मिक हीरो का किरदार निभाया। अभिनेता भगवान स्टंटमैन हुआ करते थे,

उनकी फिल्म ‘अलबेला’ को बड़ी कामयाबी मिली, जिसमें उन्होंने अपने जमाने की प्रसिद्ध अभिनेत्री गीता बाली के साथ काम किया था। हिंदी फिल्मों के इतिहास में किशोर कुमार जबरदस्त प्रतिभा के धनी कलाकार हुए हैं। वे अपने गाए गीतों में हर भावना को पेश करने की सलाहियत रखते थे, लेकिन जब अभिनय करते तो ज्यादातर कॉ‚मिक रोल में दिखते।

उनकी फिल्में ‘चलती का नाम गाड़ी’ और ‘पड़ोसन’ हिंदी सिनेमा की चंद सबसे ज्यादा सफल हास्य फिल्मों में से हैं। शम्मी कपूर रोमांटिक कॉमेडी के स्टार अभिनेता रहे हैं, जिनकी ‘प्रोफेसर’ बेहतरीन फिल्मों में शामिल हैं। ट्रेजडी फिल्मों के बड़े अभिनेता दिलीप कुमार ने भी फिल्म ‘राम और श्याम’ में अपनी कॉ‚मेडी से सबको चकित कर दिया। अमिताभ बच्चन भी बेहतरीन कॉमिक अभिनय करने में माहिर हैं।

‘अमर अकबर एंथनी’ में एंथनी गोंजालविस के रोल में उनके द्वारा की गई कॉमेडी को कौन भूल सकता है। बीती सदी के अंतिम दशक में गोविंदा ने कॉ‚मिक स्टार की ऐसी इमेज बनाई कि दर्शक उनके दीवाने हो गए। हालांकि वह ज्यादातर सीधे-साधे, नेक दिल इंसान का किरदार निभाते थे, जो भोलेपन की वजह से हास्यास्पद परिस्थितियों में फंसता, गलतफहमियों का शिकार होता, जिससे कॉमेडी क्रिएट होती।

बहुत सारे एक्शन हीरोज ने भी यादगार कॉ‚मेडी रोल्स निभाए हैं। इनमें अक्षय कुमार का नाम सबसे पहले आता है, जिन्होंने ‘सिंह इज किंग’, ‘हाउसफुल’, ‘हेरा-फेरी’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी ब्लॉकबस्टर में अभिनय किया। सलमान खान को एक्शन हीरो के रूप में जाना जाता है, लेकिन 1994 में ‘अंदाज अपना अपना’ में उन्होंने अपनी कॉमेडी का भी लोहा मनवाया।

हास्य को प्राथमिकता देने वाले निर्देशक : कई निर्देशकों की फिल्मों में हास्य के कुछ पल जरूर होते थे। हृषिकेश मुखर्जी को उनकी हल्की-फुल्की कॉमेडी के लिए आज भी याद किया जाता है। चाहे वे राज कपूर को ‘अनाड़ी’ में निर्देशित कर रहे हों या धर्मेंद्र को फिल्म ‘चुपके चुपके’ के शुद्ध हिंदी बोलने वाले टैक्सी ड्राइवर के रूप में। उनकी फिल्म ‘गोलमाल’ में अमोल पालेकर ने बेहद हंसाने वाला डबल रोल किया था।

साईं परांजपे की फिल्म ‘चश्मेबद्दूर’ कॉ‚मेडी में मील का पत्थर मानी जाती है। यह विधा आठवें दशक में आई सिनेमा की नई लहर में काफी लोकप्रिय रही। उसी जमाने में कुंदन शाह की जबरदस्त ब्लैक कॉमेडी ‘जाने भी दो यारों’ आई, जिसमें यूरोपियन सिनेमा की तर्ज पर व्यंग्य और स्वांग का मिश्रण है। श्याम बेनेगल की कॉ‚मेडी फिल्म ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ को नई पीढ़ी के नए दर्शक मिले।

पिछले दो दशकों में बॉक्स ऑ‚फिस पर हिट होने वाली फिल्मों में बहुत-सी कॉ‚मेडी की रही हैं, खासतौर से डेविड धवन की फिल्में, जिनमें गोविंदा ने उनके साथ काम किया। एक अन्य टैलेंटेड डायरेक्टर प्रियदर्शन की सुनील शेट्टी, अक्षय कुमार और परेश रावल अभिनीत कॉमेडी ‘हेरा फेरी’ क्लासिक में शुमार होती है। राजकुमार हिरानी अपनी फिल्मों में एक खास मकसद के तहत हास्य लाने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने हिंदी सिनेमा को मुन्ना भाई जैसा किरदार दिया। संजय दत्त ने इसमें मुन्ना भाई का यादगार किरदार और अरशद वारसी ने सर्किट का रोल निभाया था। आमिर खान अभिनीत हिरानी की ही ‘थ्री इडियट्स’ सदाबहार हिट फिल्मों में से एक है। यह सामाजिक संदेश वाली कॉ‚मेडी फिल्म है।

हालांकि अब भी कॉमेडी फिल्में तो बन रही हैं लेकिन जिस तरह से लाड एक्टर्स ही कॉमेडी करने लगे हैं, उससे अलग कॉमेडियन की जरूरत नहीं रह गई है।

फिर भी एक बात तो तय है कि जीवन में हास्य की तरह फिल्मों में भी हास्य शाश्वत है और जब तक जीवन है, सिनेमाई हास्य का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।

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