Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Women''s Day 2019 : ये हैं बॉलीवुड की टॉप 10 महिला बेस्ड फिल्म

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को पुरे विश्व में मनाया जाता है। महिला दिवस की शुरुआत 1911 से हुई और धीरे-धीरे ये दिवस एक समुदाय या लिंग की परिभाषाओं से ऊपर उठ कर पुरे विश्व में अपनी पहचान बनता गया

Women

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को पुरे विश्व में मनाया जाता है। महिला दिवस की शुरुआत 1911 से हुई और धीरे-धीरे ये दिवस एक समुदाय या लिंग की परिभाषाओं से ऊपर उठ कर पुरे विश्व में अपनी पहचान बनता गया , आज पुरे विश्व की आधी आबादी इसे अपने अधिकार दिवस के जश्न के रूप में मनाती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दिन है औरत के जज्बे उसकी अलग पहचान का, एक माँ, एक बेटी, एक पत्नी, एक दोस्त और उसके कई ऐसे रूपों को सलाम करने का जिसने इस दुनिया को और बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुनियाँ के अलग अलग क्षेत्रों में रहकर समाज और जाती के बंधनो को तोड़कर जिन औरतों ने अपनी एक अलग पहचान बनायीं है और नारी जाती को एक अलग पहचान दी और समाज में सर उठाकर अपने हक लेने सिखाया ये दिवस है उन औरतों के हौंसले को सजदा करने का।

बॉलीवुड ने भी महिलाओं के महत्व को समझा और इस बात को समय समय पर अपनी फिल्मों के जरिये ये बताने की कोशिश की है कि समाज में औरतों का क्या योगदान है और भारतीय महिलाओं ने अपनी हिम्मत अपने हौसले से किस्मत को अपने सामने झुकने को मजबूर किया है । हम आपको बताने जा रहे है बॉलीवुड की कुछ ऐसी चुनिंदा महिला प्रधान फिल्मों के बारे मैं जिन्हे आप जब भी देखेंगे एक नयी प्रेरणा नयी ऊर्जा का संचार पाएंगे ।

MOTHER INDIA - 1957

'मदर इंडिया' भारतीय फिल्म जगत की पहली महिला प्रधान फिल्म थी जिसे नरगिस ने अपने बेजोड़ अभिनय से सदा के लिए अमर कर दिया । मदर इंडिया भारत देश कि तरफ से पहली OSCAR के लिए नॉमिनेट होने पहली फिल्म भी है। ये फिल्म एक औरत के सच्चे प्यार, उसकी लगन को दिखती हुई यह सन्देश देती है की जो माँ सही होने पर अपने बेटे के लिए ढाल का कम करती है वही माँ बेटे के गलत होने पर उसकी जान भी ले सकती है ।

अर्थ 1982

अपनी निजी जिंदगी को फिल्मों का रूप देने के लिए मशहूर महेश भट्ट द्वारा निर्मित फिल्म 'अर्थ' एक बोल्ड कला फिल्म थी। ये कहानी थी 2 ऐसी औरतों की जिनकी जिंदगी एक ही पुरुष के इर्द गिर्द चलती है। मेलोड्रामा फिल्म 'अर्थ' घरेलु हिंसा, नारी की आजादी और समाज की बंदिशों को तोड़कर अपनी इच्छाओं के हक की लड़ाई थी जिसमें शबाना आजमी और स्मिता पाटिल के रोल की जमकर तारीफ हुई थी।

मिर्च मसाला 1987

केतन मेहता की मल्टि महिला स्टारकास्ट फिल्म 'मिर्च मसाला' महिला शक्ति को दिखाती एक सुपर फिल्म है जिसमें स्मिता पाटिल ने दिलेर 'सोन बाई' का किरदार निभाया है। अपने हक और इज्जत की रक्षा के लिए जालिम सूबेदार (नसीरुद्दीन शाह) से भिड़ जाने की कहानी फिल्म 'मिर्च मसाला' अपने तरहां की एक अनूठी फिल्म है जो साल 1987 में आयी एक आर्ट फिल्म थी।

आस्था 1999

बासु भट्टाचार्य की महिला नायक फिल्म 'आस्था' 1999 में एक ऐसी फिल्म थी जिसे आमतौर पर भारतीय समाज सवीकार नहीं करता । ये कहानी है एक ऐसी महिला की जो दिन में एक ग्रहणी और रात होते ही अपनी देह की इच्छाओं को पूरा करने के लिए वैश्या का रूप ले लेती है। फिल्म 'आस्था' में मुख्य रोल रेखा ने निभाया है ।

अस्तित्व (2000)

साल (2000) में तब्बू के सशक्त अभिनय से सजी फिल्म 'अस्तित्व' महिला प्रधान फिल्मों में एक अलग पहचान रखती है । खुद को भुला के सिर्फ अपने पति की अंधभक्ति और सिर्फ उसी के सुख को एहमियत देने की परम्परा को चेलेंज करती यह फिल्म है एक पत्नी के खुद के अस्तित्व को खोजने की कहानी है।

लज्जा (2001)

राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' उस भारतीय परंपरा के मुँह पर एक जोरदार तमाचा थी जिसके अंतर्गत एक तरफ बेटी को देवी मान पूजा जाता है और दूसरी तरफ उसी बेटी के पैदा होने पर उसे अभिशाप समझ कर मार दिया जाता है। समाज के हर वर्ग में केवल औरत को ही लोक लाज का जिम्मा सौपने वाली प्रथा की मुखालफत करती यह फिल्म बड़ी स्टारकास्ट के साथ साल 2001 में रिलीज हुई थी ।

डोर(2006)

आइशा टाकिया और गुल पनाग के अभिनय से सजी फिल्म 'डोर' साल 2006 में आई । ये फिल्म कहानी थी 2 ऐसी औरतों की जिनमें एक मीरा(आइशा टाकिया) के पति की मौत हो जाती है और दूसरी ज़ीनत (गुल पनाग) अपने पति की जान बचाने के लिए उसी औरत की मदद चाहिए। एक औरत के विधवा हो जाने के बाद कैसे उसके जीवन में समाज बदलाव कर उससे जीने की हर वजह छीन लेना चाहता है। जीनत, मीरा के अंदर अपने हक के लिए उठ खड़े होने के जज्बा पैदा करती है और कैसे जीनत अपने पति की जान बचाती है ये फिल्म की कहानी है।नागेश कुकनूर के निर्देशन में बनी फिल्म 'डोर' महिला शक्ति को दिखाती एक अच्छी फिल्म है ।

फैशन 2008

प्रियंका चोपड़ा, कंगना रनौत और मुग्धा गोडसे की फिल्म फैशन बॉलीवुड में आज की नारी के मॉडर्न रूप और उसकी महत्वकांशाओं को दिखाती एक सुपरहिट फिल्म थी। फैशन वर्ल्ड की खूबियों और कमियों को दिखाती फिल्म फैशन के लिए प्रियंका और कंगना रनौत को अवार्ड भी मिला। बिना किसी हीरो के फिल्म सुपरहिट हुई और इस फिल्म ने महिला प्रधान फिल्मों के लिए नए दरवाजे खोल दिए।

पिंक 2016

tappasi पन्नू की फिल्म पिंक साल 2016 में आयी एक path ब्रेकिंग फिल्म थी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की भी दमदार भूमिका थी। महिलाओं की न और हाँ के मायनों को फिर तलाशती फिल्म 'पिंक' कई सवालों का जवाब थी ।

मणिकर्णिका 2019

कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका झाँसी की रानी के जीवन पर बनी फिल्म है जो 2019 में रिलीज हुई । कंगना की दमदार एक्टिंग और फिल्म की शानदार कहानी ने फिर साबित किया कि आज के समय में भारतीय फिल्मों को अकेली हीरोइन भी अपने दम पर हिट करवा सकती है।

Next Story
Top