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जहां विश्वास न हो वहां प्यार की कोई अहमियत नहीं: शिवानी तोमर

शिवानी जल्द ही ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ सीजन-3 में नजर आएंगी।

जहां विश्वास न हो वहां प्यार की कोई अहमियत नहीं: शिवानी तोमर
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शिवानी तोमर जल्द ही अपकमिंग सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ सीजन-3 में चांदनी के किरदार में नजर आएंगी। सीरियल की कहानी प्यार के अनोखे अहसास को बयां करती है। असल जिंदगी में शिवानी के लिए प्यार के क्या मायने हैं? बता रही हैं शिवानी तोमर...

अपने करियर की शुरुआत में शिवानी तोमर ने टीवी सीरियल्स में छोटे किरदार किए, फिर लीड रोल निभाए। अब वह बहुत जल्द स्टार प्लस के नए सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ सीजन 3 में नजर आएंगी। यह एक लव स्टोरी है।

आज शिवानी टीवी पर एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। लेकिन यह पहचान वह नहीं बना पातीं अगर पैरेंट्स का साथ न मिला होता। शिवानी बताती हैं, ‘मैं दिल्ली से हूं। मेरे पापा बिजनेसमैन हैं, मम्मी हाउसवाइफ। बचपन में मैं भी दूसरे बच्चों की तरह बहुत कुछ बनने का सपना देखती थी। कभी पायलट तो कभी डॉक्टर तो कभी फैशन डिजाइनर बनना चाहती थी। फिर स्कूल के दिनों में डांस-ड्रामा में हिस्सा लेने लगी।

मुझे इसमें बहुत मजा आता था। इसके लिए हमेशा मम्मी-पापा मोटिवेट करते थे। स्कूल के बाद मैंने कमर्शियल आर्ट का कोर्स किया। लेकिन मेरा इंट्रेस्ट एक्टिंग में था। मैंने मम्मी-पापा को बताया कि एक्टिंग करना चाहती हूं, इसे अपना प्रोफेशन बनाना चाहती हूं।

उन्होंने कोई आॅब्जेक्शन नहीं किया, बल्कि मुझे लेकर मुंबई आए, यहां सेटल किया। मेरे लिए घर अरेंज किया। मेरी सारी जरूरतों का ख्याल रखा। मुंबई में मैंने कई जगह आॅडिशन दिए। इसी बीच मुझे चैनल वी के एक शो ‘गुमराह’ के कुछ एपिसोड्स करने का मौका मिला। धीरे-धीरे मैंने एक्टिंग को जाना-समझा और खुद को इंप्रूव किया।’

इस तरह मुंबई आने पर शिवानी के एक्टिंग करियर की राह बनी। उन्होंने अपने आपमें बदलाव भी महसूस किए। वह बताती हैं, ‘मुझे मुंबई ने बहुत कुछ सिखाया है। मैं पहले से ज्यादा मैच्योर हो गई हूं। पहले सोचती थी कि अपने शहर और पैरेंट्स से दूर कैसे रहूंगी।

लेकिन धीरे-धीरे आदत बनती गई। जब मैं अपने आसपास यंग गर्ल्स को देखती थी, जो देश के छोटे-छोटे शहरों से नौकरी या पढ़ाई के लिए मुंबई आती हैं, तो उन्हें देखकर इंस्पायर होती थी। आज तो लड़कियां विदेश तक अकेली जाती हैं, फिर मुझे तो मुंबई में रहना था।’

शिवानी की बड़ी ख्वाहिश थी कि वह रोमांटिक सीरियल करें, इसलिए जब उन्हें सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ के तीसरे सीजन का आॅफर मिला, तो वह बहुत खुश हुर्इं। शिवानी कहती हैं, ‘यह एक लव स्टोरी है। इलाहाबाद के गंगा किनारे से कहानी शुरू होती है।

मैं इसमें चांदनी नाम की लड़की के रोल में हूं। इसमें बरुण सोबती जैसे पॉपुलर एक्टर के साथ मेरी जोड़ी बनी है। इस सीरियल के पहले सीजन में भी बरुण थे, तब उनकी जोड़ी सनाया ईरानी के साथ बनी थी। उम्मीद है कि पहले सीजन की तरह ही इस बार भी दर्शक हमें प्यार देंगे।’

सीरियल में चांदनी के रोल को निभाना शिवानी के लिए आसान नहीं रहा है। वह बताती हैं, ‘चांदनी इलाहाबाद में रहती है। वह एक स्प्रिीचुएल लड़की है। उसे संस्कृत का ज्ञान है।

इसलिए मुझे संस्कृत के श्लोक याद करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। दरअसल, मैंने इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की है, हिंदी मेरी कोई बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में संस्कृत के श्लोक याद करके बोलना बहुत ही टफ रहा।’

सीरियल ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ की कहानी प्यार के अनोखे अहसास को बयां करती है। असल जिंदगी में शिवानी का प्यार को लेकर क्या कहना है, पूछने पर वह जवाब देती हैं, ‘मेरे लिए प्यार का मतलब है विश्वास। जहां विश्वास न हो, वहां प्यार की कोई अहमियत नहीं।

जो लोग एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं, उनका प्यार ताउम्र बना रहता है। दूसरे मैं प्यार के लिए पैरेंट्स को हर्ट नहीं कर सकती। मेरा मानना है कि प्यार तभी सफल होता है, जब उसमें पैरेंट्स का सपोर्ट भी हो। मैं पैरेंट्स का दिल दुखाकर प्यार पाने के फेवर में नहीं हूं। सीरियल की लीड एक्ट्रेस ऐसा कर सकती है, लेकिन असल जिंदगी में मैं ऐसा कभी नहीं कर सकती।’

मैं बहुत सिंपल हूं

सीरियल में शिवानी का लुक बहुत ही जुदा है। साड़ी पहनने का, ज्वेलरी कैरी करने का अंदाज बिल्कुल अलग है। क्या असल जिंदगी में भी शिवानी इतनी ही फैशनेबल हैं। पूछने पर वह बताती हैं, ‘असल जिंदगी में मैं बहुत सिंपल हूं।

मुझे ज्वेलरी बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मुझे ईयररिंग्स तक पहनना पसंद नहीं है। सिंपल कॉटन ड्रेसेस ही अच्छी लगती हैं। मैं सीरियल की चांदनी जितनी स्टाइलिश नहीं हूं।’

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