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Interview : विकास कुमार - मुझे फिल्मों और टीवी से ज्यादा थिएटर आसान लगता है

रेणु खंतवाल | UPDATED Mar 9 2019 3:50PM IST
Interview : विकास कुमार - मुझे फिल्मों और टीवी से ज्यादा थिएटर आसान लगता है

पहले थिएटर फिर छोटे पर्दे पर आकर विकास कुमार ने अपनी पहचान बनाई। वैसे यशराज का शो ‘पावडर’ उनका पहला टीवी शो था। इसके बाद वह यशराज के ही शो ‘खोटे सिक्के’ में नजर आए। करीब डेढ़ साल तक उन्होंने सीरियल ‘सीआईडी’ में काम किया। विकास कई फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। पिछले साल रिलीज फिल्म ‘परमाणु’ में भी वह नजर आए। विकास एक डायलॉग कोच भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर डायलॉग कोच काम किया है। अब वह शो ‘कोर्ट रूम’ में नैरेटर के रूप में नजर आ रहे हैं। पेश है विकास कुमार से शो ‘कोर्ट रूम’ से जुड़ी बातचीत। 

आपका शो ‘कोर्ट रूम’ किन मायनों में खास है?

 टीवी पर पहली बार इस तरह का कोई शो आ रहा है। पहले भी क्राइम जॉनर में शो बने हैं लेकिन यह क्राइम और लीगल ड्रामा है। इस शो की खासियत यह है कि जो ऐतिहासिक फैसले हमारी अदालतों ने सुनाए गए, ऐसे केसों से प्रेरित होकर यह शो बना है। इस शो में कई तरह के केस लिए गए हैं। इसके अलावा कोई क्राइम हुआ तो कैसे हुआ? उसकी बैक स्टोरी तो दिखाई ही जा रही है, लेकिन कोर्ट रूम में जब वह चीजें  तो क्या हुआ यह भी दिखाया जा रहा है।

शो ‘कोर्ट रूम’ में आपकी क्या भूमिका है? अपने किरदार के लिए आपने क्या तैयरियां की हैं?

शो में मेरी भूमिका केसेज की कहानी सुनाना है। मैं शो का नैरेटर हूं, एंकर हूं, कहानी को आगे ले जाता हूं। अपने किरदार के होमवर्क को लेकर मुझे लीगल भाषा को समझने के लिए मेहनत करनी पड़ी। क्योंकि जब तक मैं खुद चीजों और कानूनी भाषा को नहीं समझ पाऊंगा, तो दर्शकों को कैसे बता और समझा सकूंगा। इस काम में मैंने अपने एक वकील दोस्त की हेल्प ली। इसके अलावा एंकरिंग के लिए भाषा और उच्चारण पर काम किया। मेरा मानना है कि जब आप एंकरिंग करते हैं तो आप अपनी पर्सनालिटी भी सामने लाते हैं, क्योंकि यहां आप कोई किरदार नहीं निभा रहे होते हैं।

आपको एक्टिंग में काम करते हुए एक लंबा अरसा हो गया है। अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं?

मुझे एक्टिंग में आए चौदह साल हो गए हैं। इन चौदह सालों में मुझे अलग-अलग वैरायटी के किरदार करने के मौके नहीं मिले। ज्यादातर लोग मेरे पास पुलिस ऑफिसर का किरदार लेकर आते हैं। मैंने सीरियल ‘सीआईडी’ में काम किया है। इसलिए लोगों को लगता है कि मैं इस तरह के किरदार ही निभा सकता हूं। फिल्म ‘परमाणु’ में भी मैं इसी तरह के रोल में था। अपकमिंग फिल्म ‘हामिद’ में भी मेरा किरदार एक फौजी का है। ऐसे में जब मुझे शो ‘कोर्टरूम’ में एंकरिंग का मौका मिला तो मैं बहुत खुश हुआ कि चलो कुछ तो अलग करने का मौका मिला। 

आप थिएटर, टीवी और फिल्मों में काम कर चुके हैं। इसमें से आपको सबसे आसान कौन सा मीडियम लगा? 

मुझे तीनों माध्यमों में से थिएटर सबसे आसान लगता है, क्योंकि जब आप मंच पर होते हैं तो एक-डेढ़ घंटे तक आप उस किरदार में होते हैं। यह बहुत मजेदार होता है। 

आपकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट क्या रहा है?

मैंने एक्टिंग करियर चुनने से पहले बैरी जॉन के यहां थिएटर का तीन महीने का एक्टिंग कोर्स किया। कोर्स के अंत में एक नाटक हुआ, जिसमें मुझे बहुत तारीफें मिलीं। उसके बाद मुझे समझ में आ गया कि जिंदगी में इसी दिशा में आगे बढ़ना है। 

बैरी जॉन के साथ काम करके आपको क्या सीखने को मिला?

यही सीखा कि एक एक्टर के लिए सबसे पहले खुद को जानना जरूरी है। बल्कि यह बात हर पेशे के साथ लागू होती है। अगर आपने कोई पेशा चुना तो क्या आपके अंदर उस पेशे के लिए मिनिमम क्वालिटी है, जिस वजह से आपने अपने लिए वह पेशा चुना या नहीं है? या बस आपने दुनिया को देखकर कि ज्यादा लोग यह काम कर रहे हैं, इसलिए मुझे भी करना चाहिए, इस वजह से उस पेशे को चुना? इसलिए अगर आप अपना आकलन ठीक से कर पाए हैं तो आपको उसका अच्छा रिजल्ट मिलेगा। हां, हो सकता है कुछ समय लगे। 

फिल्म ‘हामिद’ में आपका किरदार क्या है?

फिल्म ‘हामिद’ एक बच्चे की कहानी है। फिल्म कश्मीर पर आधारित है। हामिद नौ-दस साल का एक बच्चा है, घर में उसकी मां है। एक दिन हामिद के अब्बू गायब हो जाते हैं। उसे बस यही बताया जाता है कि वह अल्लाह के पास गए हैं। उसे नहीं पता कि अल्लाह के पास जाने का मतलब क्या होता है। इस बीच वह एक सीआरपीएफ जवान के संपर्क में आता है, मैं उसी जवान का किरदार निभा रहा हूं। 

आगे क्या कर रहे हैं?

एक फिल्म की शूटिंग में बिजी हूं। इसकी शूटिंग लखनऊ में हो रही है। आशीष पंत की इस फिल्म का नाम ‘उलझन’ है। इसमें मेरा किरदार हटकर है। फिल्म में मैं एक छोटे से बिजनेसमैन बना हूं। यह पति-पत्नी की एक प्यारी-सी कहानी है।


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-Tags:#Entertainment News#Bollywood News#Vikas kumar#Interview

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