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हिसाब 2016: इन टीवी सीरियल्स ने बॉलीवुड को दी मात

टीआरपी के मामले में स्टार प्लस रहा एक नंबर पर।

हिसाब 2016: इन टीवी सीरियल्स ने बॉलीवुड को दी मात
मुंबई. अब केवल फिल्मों के ही नहीं टीवी के दर्शकों की पसंद भी काफी बदल गई है। अब वे भी कुछ नया देखना चाहते हैं। यही वजह है कि दर्शकों का फेवरेट बनने के लिए चैनल्स के बीच जबरदस्त कॉम्पिटिशन देखने को मिलता है। लेटेस्ट जानकारी के अनुसार इस साल के अंत तक करीबन एक हजार चैनल टेलीकास्ट हो रहे हैं। जाहिर है, दर्शकों के पास आॅप्शंस की भरमार है। ऐसे में बीत रहे साल के टीवी सिनेरियो पर नजर डालने से साबित होता है कि केवल उन्हीं चैनल्स ने टॉप की रेस में जगह बनाने में कामयाबी पाई, जिनके प्रोग्राम्स ने कंटेंट, प्रेजेंटेशन में नएपन के साथ दर्शकों का भरपूर एंटरटेनमेंट भी किया। बीते साल के टीवी सिनेरियो पर एक नजर-
कलर्स-स्टार प्लस में होती रही
टॉप पोजिशन के लिए टक्कर
बीत रहे पूरे वर्ष टॉप पोजिशन पर बने रहने के लिए स्टार प्लस और कलर्स चैनल के बीच टक्कर होती रही। जीटीवी तीसरे नंबर पर ही रहा, बीच-बीच में वह कुछ प्वांइट से दूसरे नंबर पर आया, लेकिन ज्यादा समय तक दूसरे नंबर पर टिक नहीं पाया। 2016 के पचासवें सप्ताह में सोनी टीवी तीसरे नंबर और जीटीवी चौथे नंबर पर रहा। पांचवें और छठे नंबर की लड़ाई सोनी टीवी और लाइफ ओके के बीच चलती रही।

नहीं चले लंबी अवधि के सीरियल
जहां तक नए सीरियलों का सवाल है, तो माइथोलॉजिकल सीरियल ‘सिया के राम’ को छोड़कर 2016 में ऐसा कोई सीरियल नहीं शुरू हुआ, जो लंबे समय तक टिक पाया। 2016 में भी कई सीरियल महज तीन से चार माह तक ही टेलीकास्ट हो पाए। पिछले कई सालों की ही तरह इस साल में भी सब टीवी को असित मोदी के कॉमेडी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने ही बचाए रखा। इस साल सभी चैनलों पर टेलीकास्ट सीरियल्स पर नजर डालने पर यह बात भी साफ होती है कि कुछ सीरियलों की कहानी अच्छी थी, लेकिन उनका प्रेजेंटेशन अच्छा नहीं रहा, जिसके चलते ऐसे सीरियल लंबे समय तक टिक नहीं पाए।
क्या कहते हैं आंकड़े
टीआरपी के साथ ही दर्शकों की पसंद को टटोलने के लिए अब टीएएम(टेलीविजन आॅडियंस मेजरमेंट)और बीएआरसी (ब्रॉडकास्ट आॅडियंस रिसर्च कौंसिल) की रेटिंग्स को भी अपनाया जाने लगा है। इनके चलते शहरों के साथ-साथ गांवों के दर्शकों की पसंद का भी अहसास होने लगा है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में अभी वही चैनल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं, जो फ्री हैं। मसलन गांवों में चैनल रिश्ते पहले नंबर, जी अनमोल दूसरे नंबर और स्टार प्लस छठे नंबर पर है, जबकि शहरों में स्टार प्लस पहले नंबर, रिश्ते नौवें और अनमोल दसवें नंबर पर हैं। 2016 के पचासवें सप्ताह में बीएआरसी की टीआरपी के अनुसार शहरी क्षेत्रों में स्टार प्लस (4,56,742) पहले नंबर पर, कलर्स (4,48,126) दूसरे नंबर पर, 3,11,050 के साथ सोनी तीसरे और 2,82,882 के साथ जीटीवी चौथे नंबर पर रहे। लेकिन 2015 के मुकाबले इस बार हर चैनल के दर्शक बड़ी मात्रा में कम हुए। हालांकि इनके उलट ‘आस्था’, ‘संस्कार’, ‘दिव्य’ सहित सभी धार्मिक चैनल तेजी से आगे बढ़े हैं। वहीं बिंदास, वी चैनल और एमटीवी युवा पीढ़ी के पसंदीदा चैनल बने रहे। 2014 में शुरू किए गए जिंदगी, पल और एपिक नामक तीन मनोरंजन के साथ जानकारी युक्त कार्यक्रम दिखाने वाले चैनल 2016 में बहुत ज्यादा उपलब्धि दर्ज नहीं करा पाए। उरी आतंकवादी हमले के बाद ंिजदंगी चैनल पर पाकिस्तानी कार्यक्रमों का प्रसारण बंद कर दिया गया।
कई सीरियल बने
दर्शकों की पसंद
कलर्स चैनल के सीरियल ‘नागिन’, ‘नागिन 2’, ‘शक्ति : अस्तित्व एक अहसास’, ‘उड़ान’, ‘शनि’ काफी पसंद किए गए। जीटीवी के सीरियल ‘कुमकुम’ में भी आॅडियंस का इंट्रेस्ट बना रहा। स्टार प्लस के सीरियल ‘ये हैं मोहब्बतें’, ‘साथ निभाना साथिया’, ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’, ‘इश्कबाज’, ‘मेरे अंगने में’, ‘जाना ना दिल से दूर’ ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इसी चैनल के सीरियल ‘दीया और बाती हम’ को भी काफी पसंद किया गया, लेकिन करीबन छह साल के प्रसारण के बाद चार माह पहले इस सीरियल का टेलीकास्ट बंद कर दिया गया। अब स्टार प्लस इस सीरियल का दूसरा सीजन 2017 में शुुरू करने वाला है। सबटीवी के सबसे पॉपुलर कॉमिक सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ कई सालों से दर्शकों की पसंद बना हुआ है, यह सिलसिला इस साल भी बरकरार रहा।
कॉमेडी का जलवा रहा बरकरार
लंबे समय से कपिल शर्मा टीवी पर अपनी कॉमेडी से दर्शकों हंसाते रहे हैं। इस साल भी सोनी चैनल पर अपने शो ‘द कपिल शर्मा शो’ के जरिए उन्होंने आॅडियंस को खूब हंसाया। इसके अलावा ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, ‘चिड़िया घर’, ‘भाबीजी घर पर हैं’, ‘मजाक मजाक में’, ‘मे आई कम इन मैडम’, ‘बहू हमारी रजनी कात’, ‘त्रिदेवियां’ और ‘यारों का टशन’ ने अपनी अलग-अलग किस्म की कॉमेडी से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया।
वैंप्स की धमाकेदार एंट्री
टीवी सीरियल्स में अच्छी कहानी, लीड कैरेक्टर्स के साथ-साथ वैंप का होना भी हिट होने की वजह बनती रही है। इस साल भी कई सीरियल्स में वैंप कैरेक्टर्स की धमाकेदार एंट्री हुई। सीरियल ‘कवच’ की मंजूलिका (महक चहल और सारा खान), ‘ये है मोहब्बतें’ की शगुन(अनीता हंसनंदानी), ‘साथ निभाना साथिया’ की गौरा (वंदना पाठक), ‘इश्कबाज’ की टिया (नवीना बोले), ‘कसम तेरे प्यार की’ की मलिका (स्मृति खन्ना), ‘नामकरण’ की दयावंती (रीमा लागू) जैसी एक्ट्रेसेस ने खलनायिकों को एक बार फिर टीवी पर हिट कर दिया।
बिग बॉस रहा बेअसर
बड़े पर्दे पर सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ ने भले ही कमाल किया हो, लेकिन छोटे पर्दे पर यानी कि कलर्स चैनल पर टेलीकास्ट हो रहे रियालिटी शो ‘बिग बॉस’ से बिग बॉस के रूप में उनके जुड़ होने होने के बावजूद दर्शकों को इसके लेटेस्ट सीजन ने अट्रैक्ट नहीं किया। इस बार ‘बिग बॉस’ में एंटरटेनमेंट ना के बराबर रहा।
डिफरेंट कंटेंट वाले सीरियल्स
इस साल के अंतिम महीनों में कई चैनल्स पर कुछ बहुत अलग और बिल्कुल नए कंटेंट वाले सीरियल्स शुरू हुए। इन्हें दर्शकों का शुरुआती रेस्पॉन्स अच्छा मिल रहा है। इन सीरियल्स में ‘स्वाभिमान’, ‘मोह मोह के धागे’, ‘खटमल ए इश्क’, ‘थाली’, ‘सेठजी’, ‘राम की लीला रंग लाएगी’, ‘अजी सुनते हो’, ‘त्रिदेवियां’, ‘फिर यह नादानियां’, ‘क्वींस हैं हम’, ‘शनि’, ‘परदेस में है मेरा दिल’, ‘पी ओ डब्ल्यू बंदी युद्ध के’, ‘चंद्र- नंदनी’।
सैटेलाइट चैनलों से
आगे रहा दूरदर्शन
इसमें दो राय नहीं है कि तमाम सैटेलाइट चैनलों की मौजूदगी के बावजूद दूरदर्शन की स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है। सभी सरकारी चैनल अच्छा काम कर रहे हंै। मराठी में सह्याद्री चैनल भी अच्छा कर रहा है। इसके कई सीरियल काफी पसंद किए जा रहे हंैं। किसानों के लिए जनवरी 2015 में शुरू किया गया किसान चैनल भी काफी पसंद किया जा रहा है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस साल भी वही सीरियल्स पसंद किए गए, वही चैनल्स टॉप पर रहे, जिनसे दर्शकों को भरपूर एंटरटेनमेंट मिला।
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