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मां का कैरेक्टर निभाना जरा भी अटपटा नहीं लगा- छवि मित्तल

करीब ढाई साल बाद सीरियल ‘कृष्णदासी’ की छवि मित्तल ने टीवी पर वापसी की है।

मां का कैरेक्टर निभाना जरा भी अटपटा नहीं लगा- छवि मित्तल
मुंबई. करीब ढाई साल बाद छवि मित्तल ने टीवी पर वापसी की है। कलर्स चैनल के नए सीरियल ‘कृष्णदासी’ में वह एक देवदासी के रोल में नजर आ रही हैं। अपने रोल को रियल बनाने के लिए उन्होंने किस तरह तैयारी की? सीरियल में वह एक बड़ी उम्र की बेटी की मां की भूमिका में हैं, इतनी कम उम्र में मां की भूमिका में आना छवि को असहज नहीं लगा?

लंबा अवकाश बिताकर छवि मित्तल ने कलर्स चैलन के नए सीरियल ‘कृष्णदासी’ से टीवी पर वापसी की है। सीरियल में वो एक देवदासी की भूमिका में नजर आ रही हैं लेकिन इसमें उनका कैरेक्टर मातृत्व से परिपूर्ण भी है।सीरियल, कैरेक्टर और करियर से जुड़ी बातचीत छवि मित्तल से।

आप ‘कृष्णदासी’ में देवदासी बनी हैं। इस किरदार के बारे में कुछ बताइए?

मैं इस सीरियल में तुलसी का कैरेक्टर निभा रही हूं, जो कुमुदनी की बेटी है। कुमुदनी असल में कृष्णदासी यानी देवदासी है, तुलसी को उसकी परंपरा को फॉलो करते हुए कृष्णदासी बनना पड़ता है।


शो की स्टोरी के बारे में कुछ बताइए?

शो की स्टोरी देवदासी प्रथा को लेकर है। इसके केंद्र में देवदासी की एक फैमिली है। जैसा मैंने बताया कि मैंने इसमें तुलसी का किरदार निभाया है। तुलसी और उसकी मां को बुरे एक्सपीरियंस से गुजरना पड़ता है। इसी वजह से दोनों पूना में आ बसते हैंं। जहां तुलसी की बेटी आराध्या का जन्म होता है। मां फिर से पुरानी जिंदगी में लौटने की जिद करती है, जबकि तुलसी अपनी बेटी को देवदासी अर्थात् कृष्णदासी बनने से बचाना चाहती है। फिर कहानी कैसे आगे बढ़ती है, क्या-क्या बदलाव आते हंै, वो इस सीरियल में दिखाया जाएगा। कृष्णदासी की कहानी प्यार, त्याग और समर्पण की कहानी है।


कृष्णदासी का कैरेक्टर निभाना कितना मुश्किल है?

काफी मुश्किल है। इस किरदार को रियल बनाने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। कुछ समय के लिए तो मैं सब कुछ भूल गई थी। तुलसी का किरदार निभाने को लेकर बहुत ज्यादा इंवॉल्व हो गई थी। ‘कृष्णदासी’ में मेरा कैरेक्टर, डांस, डायलॉग्स सभी कुछ बहुत टफ है।


इतनी कम उम्र में एक युवा लड़की की मां का कैरेक्टर निभाने में आपको असहजता नहीं हुई?

नहीं, मुझे मां का कैरेक्टर निभाने में कोई अनकंफर्टेबल फीलिंग्स नहीं हुई। आखिर मां तो मां होती है, फिर वह कोई भी उम्र की हो। वैसे भी मैं एक बेटी की मां हूं, तो मेरे भीतर ममता तो है ही। इस सीरियल में भी भले ही मंै एक बड़ी बेटी की मां बनी हूं, लेकिन मेरे कैरेक्टर की अपनी इंपॉर्टेंस है। मेरा कैरेक्टर पूरी स्टोरी में गुंथा हुआ है। इसलिए मुझे कृष्णदासी में मां का कैरेक्टर निभाना जरा भी अटपटा नहीं लगा।


कृष्णदासी में डांस की भी अपनी अहमियत है। क्या आपने इसके लिए कोई खास ट्रेनिंग ली?

हां, मैंने कथक में डांस की फॉर्मल ट्रेनिग ली है। बेसिकली मैं डांस की बहुत शौकीन हूं। इसलिए जब मुझे पता चला कि मुझे कृष्णदासी में डांस करने का पूरा मौका मिलेगा तो मैं बहुत खुश हुई।


अगर आप डांस की इतनी शौकीन हैं तो अब तक ‘नच बलिए’ या ‘झलक दिखला जा’ जैसे डांस शो से कैसे दूर रहीं?पिछले तीन सालों से तो मैं मैटरनिटी लीव पर थी। उससे पहले अपने सीरियलों में बिजी थी। इस वजह से मुझे कोई ऐसा मौका ही नहीं मिला कि मैं डांस शो में जाने के बारे में सोचूं।

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