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टोटल धमाल रिव्यूः दिमाग से नहीं दिल से देखें

कुछ फिल्में होती हैं जो आपके दिमाग को चुनौतियां देती हैं और सीन दर सीन आप फिल्म में डूबते चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसी फिल्में ऐसी भी होती हैं जिनके लिए आपको दिमाग घर पर छोड़कर आना होता है। इंद्र कुमार की मल्टीस्टारर फिल्म टोटल धमाल भी ऐसी ही फिल्म है।

टोटल धमाल रिव्यूः दिमाग से नहीं दिल से देखें

कुछ फिल्में होती हैं जो आपके दिमाग को चुनौतियां देती हैं और सीन दर सीन आप फिल्म में डूबते चले जाते हैं लेकिन कुछ ऐसी फिल्में ऐसी भी होती हैं जिनके लिए आपको दिमाग घर पर छोड़कर आना होता है। इंद्र कुमार की मल्टीस्टारर फिल्म टोटल धमाल भी ऐसी ही फिल्म है।

फिल्म के ट्रेलर से ही साफ हो गया था कि इस फिल्म में लॉजिक और तर्क वितर्क की संभावना ना के बराबर होगी, लेकिन ये भी सच है कि ये इंद्र कुमार ही हैं जो 'दिल' और 'इश्क' जैसी मजेदार कॉमेडी फिल्में भी बना चुके हैं पर टोटल धमाल किसी भी मायने में अच्छी कॉमेडी फिल्म के तौर पर अपनी जगह नहीं बना पाती।

टोटल धमाल फिल्म की कहानी

चोरी की रकम को कमिश्नर बोमन ईरानी एक होटल में रखता है ,लेकिन गुड्डू की भूमिका में अजय देवगन और जॉनी की भूमिका में संजय मिश्रा की नजर इन पैसों पर पड़ती है और वे इसे चुरा लेते हैं। गुड्डू और जॉनी को चकमा देकर बंटी यानि मनोज पाहवा इस पैसों को एक चिड़ियाघर में छिपा देता है। इसके बाद एक हादसे में बंटी की मौत हो जाती है, लेकिन वो मरने से पहले इस चिड़ियाघर के बारे में लल्लन(रितेश देशमुख), झिंगुर, आदि (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी), अविनाश(अनिल कपूर) और बिंदू(माधुरी दीक्षित) को भी बता देता है। इसके बाद शुरु होता है 50 करोड़ के खजाने को हासिल करने का खेल।
निराश करते हैं ज्यादातर सितारे
आदि और मानव की जोड़ी फिल्म धमाल में तो कमाल लगी थी, लेकिन फिल्म के तीसरे संस्करण तक उबाऊ होने लगी है। ये दुर्भाग्य ही है कि अरशद वारसी और जावेद जाफरी जैसे टैलेंटेड कलाकारों को ऐसी स्क्रिप्ट पर आश्रित होना पड़ रहा है, जहां वे अपनी कॉमिक टाइमिंग के बावजूद हंसाने में नाकामयाब रहते हैं।
अजय देवगन ने गोलमाल में दिखाया था कि वे अच्छी स्क्रिप्ट होने पर कॉमेडी भी कर सकते हैं, इस फिल्म के साथ उन्होंने ये भी साबित किया कि अच्छी फिल्म न होने पर वे बेअसर साबित होते हैं। फिल्म उम्मीद के मुताबिक ही चलती रहती है और इसमें कोई शॉकिंग फैक्टर नहीं है। पूरी फिल्म में संजय मिश्रा ब्रो-ब्रो करते रहते हैं और उनके रोल में गहराई ढूंढने पर निराशा ही हाथ लगती है।
निर्देशन
फिल्म के दौरान कई बार ऐसा भी फील होता है कि इस फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म को देख रहे हैं। हालांकि ये फिल्म धमाल जितनी असरदार भी नहीं लगती और टुकड़ों में महज कुछ सीन्स अच्छे हैं। इस फिल्म को देखकर बार-बार सिर्फ इंद्र कुमार के फिल्मों के ग्राफ में गिरते स्तर पर हैरानी होती रहती है।
इंद्र कुमार ने फिल्म बेटा में माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी वाला आइकॉनिक गाना 'धक-धक' दिया है और इस फिल्म में भी केवल माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की केमिस्ट्री ही देखने लायक है। इससे पहली दो फिल्मों में संजय दत्त लीड रोल में दिखे थे, लेकिन इस बार अजय देवगन उनकी जगह नजर आए। फिल्म में हॉलीवुड स्टार क्रिस्टल भी अजय के साथ नजर आते हैं।

क्यों देखें और क्यों नहीं
अगर आप घर पर बोर हो रहे हैं और दिमाग पर जोर डालने का बिल्कुल मन नहीं है तो इस फिल्म को थियेटर में जाकर देखा जा सकता हैं। अन्यथा बेहतर होगा कि फिल्म के टीवी पर आने का इंतजार करें। यदि फिल्म के स्टारकास्ट के फैन नहीं हैं, तो धूप में खुद को परेशान कर सिनेमा हॉल में जाने की गलती ना करें।
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