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पुण्य तिथि: मोहम्मद रफी की पहली कमाई थी 50 रुपए, जानिए कैसा रहा इनका सफर

- एक बार नेहरू जी ने रफी साहब को एक गाना सुनाने के लिए आमंत्रित किया था। गाना था ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ रफी साहब गाते-गाते इतना भावुक हो गए कि फूट-फूट कर रोने लगे क्योंकि कुछ दिन पहले ही उनकी बेटी की शादी हुई थी। उन्हें अपनी बेटी की विदाई का मंजर याद आ गया था।

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